विभाग का कारनामा, रिटायरमेंट पर बैठीं और नौकरी छोड़ चुकीं नर्सों को ट्रेनिंग पर भेजने के आदेश
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हिमाचल के स्वास्थ्य विभाग में एक नया कारनामा सामने आया है। अस्पताल में रिटायरमेंट पर बैठीं और नौकरी छोड़ चुकीं नर्सों को तीन महीने के प्रशिक्षण पर भेजने के आदेश जारी किए गए हैं। ट्रेंड नर्सों को भी दोबारा ट्रेनिंग पर भेजा गया। अस्पताल प्रशासन को इसका पता चला तो सरकार को सूचित किया गया।
सरकार से फटकार लगने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आनन-फानन में अपने आदेश रद्द कर दिए हैं। अब 60 नर्सों को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाना है। यह प्रशिक्षण एसएनजीएनसीए आईजीएमसी शिमला और जेएनएम ट्रेनिंग स्कूल राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा (कांगड़ा) में दिया जाना है।
स्वास्थ्य विभाग ने 25 जून को चार नर्सों को प्रशिक्षण के लिए भेजने के आदेश दिए। एक नर्स की सेवानिवृत्ति 30 सितंबर को है। उसे भी तीन महीने का प्रशिक्षण देने के आदेश जारी किए गए। एक अन्य नर्स ने नौकरी छोड़ दी है, उसका भी नाम प्रशिक्षण के लिए भेजा गया। दो अन्य नर्सों ने तीन महीने का वार्ड एडमिनिस्ट्रेशन कोर्स किया है। उन दोनों को दोबारा प्रशिक्षण पर भेजने को कहा।
बाद में जब संबंधित इकाई ने यह मामला स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय के ध्यान में लाया तो तीन और छह जुलाई को दो संशोधित आदेश जारी किए गए। इन चारों के नाम आदेशों से हटा दिए गए। इनके स्थान पर चार नए नाम शामिल किए गए।
इन आदेशों की कॉपी सरकार के अलावा मेडिकल कॉलेजों, मेडिकल अधीक्षक आदि को भेजी गई है। स्वास्थ्य निदेशक से इस बारे में प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। विशेष सचिव स्वास्थ्य डॉ. निपुण जिंदल ने बताया कि इस बारे में स्वास्थ्य विभाग से पूछा जाएगा।
प्रशिक्षण के लिए 60 नर्सों का चयन
प्रशिक्षण कोर्स के लिए 60 नर्सों का चयन किया जा रहा है। नर्सों को वार्ड प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें वार्ड नर्स एक तरह से वार्ड इंचार्ज होती है। किस मरीज को कब दवाई देनी हैं और कब इंजेक्शन लगाना है और मरीजों को ऑपरेशन के लिए तैयार करने का जिम्मा वार्ड इंचार्ज नर्स का रहता है। अन्य जूनियर नर्सों से काम लेने की जिम्मेदारी भी वार्ड प्रबंधन नर्स की रहती है। प्रशिक्षण के दौरान इन नर्सों को यह प्रशिक्षण दिया जाता है।