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विदेशी परिंदों की आमद से मछुआरों को सताने लगी रोजी-रोटी की चिंता
Thu, 02 Jan 2020 05:27 PM IST
अरविन्द ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जवाली (कांगड़ा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जवाली (कांगड़ा)
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Thu, 02 Jan 2020 05:27 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
पौंग झील में प्रवासी परिंदों ने मछुआरों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। प्रवासी पक्षियों की आमद से मछुआरों को अपनी रोजी-रोटी की चिंता सताने लगी है। रूप सिंह, काका राम, करनैल सिंह, देवेंद्र सिंह, अश्विनी कुमार, फितू राम, मदन सिंह, सबोराम, बिल्लू, प्रीतम सिंह और रणजीत सिंह ने कहा कि हर साल दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, ऑस्ट्रेलिया, साइबेरिया, चीन, इंग्लैंड और मंगोलिया से लाखों प्रवासी पक्षी पौंग झील में पहुंचते हैं।
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इनमें अधिकतर पक्षी मांसाहारी होते हैं। ये एक से डेढ़ किलो तक मछली को अपना आहार बनाते हैं। इससे पौंग झील में मछली उत्पादन कम हो जाता है। बाहरी देशों में ठंड ज्यादा होने से पानी बर्फ बन जाता है और परिंदे हिमाचल की झीलों में आते हैं। पौंग झील में करीब 2500 मछुआरे मछली पकड़ कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं।
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उन्होंने कहा कि प्रवासी पक्षी अक्तूबर में पौंग झील में आना शुरू करते हैं और अप्रैल तक झील में डेरा जमाए रखते हैं। मछुआरों ने कहा कि सरकार और मत्स्य विभाग की ओर से दौरान मछुआरों को कोई राहत नहीं दी जाती है। सरकार से हर बार मांग की जाती है कि जब तक प्रवासी पक्षी पौंग झील में रहते हैं, तब तक अतिरिक्त राहत भत्ता दिया जाए, लेकिन उनकी इस मांग को अनसुना किया जाता रहा है। उन्होंने एक बार फिर मछुआरों को अतिरिक्त राहत भत्ता देने की मांग की है।
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