केंद्रीय टीम की सहमति से जगी उम्मीद, यहां बनेगा केंद्रीय विवि
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिछले करीब सात साल से राजनीतिक झूले में झूल रहे केंद्रीय विश्वविद्यालय के भवन निर्माण के लिए प्रदेश सरकार की ओर से चामुंडा मंदिर के पास जदरांगल में करीब 300 हेक्टेयर चिह्ति की गई भूमि का वीरवार को केंद्र की साइट सेलेक्शन टीम ने निरीक्षण किया। जदरांगल में तीन साइटों का निरीक्षण किया गया।
तीसरी साइट पर बैठक कर टीम ने भूमि की फिटनेस को लेकर चर्चा की। पुख्ता सूत्रों के अनुसार चर्चा के दौरान केंद्रीय विवि के भवन निर्माण के लिए जदरांगल में प्रदेश सरकार की ओर से चिह्नित करीब 300 एकड़ भूमि साइट सिलेक्शन कमेटी को ओवरआल ठीक दिखी।
टीम ने ऑब्जेक्शन भी लगाए
हालांकि, चर्चा के दौरान टीम ने कई ऑब्जेक्शन भी लगाए। खासकर, घने फॉरेस्ट एरिया पर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की महिला अधिकारी ने सवाल उठाया। महिला अधिकारी ने कहा कि जमीन में वन क्षेत्र घना और ज्यादा है। जमीन पर सैकड़ों पेड़ हैं।
प्रशासन ने महिला अधिकारी से कहा कि केंद्रीय विवि का भवन निर्माण पूरी जमीन में करीब 30 से 40 फीसदी होना है। वन क्षेत्र का बेहद कम प्रयोग किया जाएगा। वहीं, सुझाव यह भी दिया गया कि वन क्षेत्र को केंद्रीय विवि को इस शर्त पर दे दिया जाए कि इस पर निर्माण न कर इसे संरक्षित किया जाए।
चिह्नित भूमि पर वन क्षेत्र की फोटो कर ली कैमरे में कैद
इससे विवि की शोभा बढ़ेगी। महिला अधिकारी ने चिह्नित भूमि पर वन क्षेत्र की काफी ज्यादा फोटो खींचकर अपने कैमरे में कैद कीं। निरीक्षण टीम में प्रधान सचिव शिक्षा, जम्मू और हिमाचल विवि के वीसी, यूजीसी ग्रांट कमीशन के सचिव, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के एआईजी, सीपीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव शामिल रहे। निरीक्षण टीम का सहयोग करने के लिए कांगड़ा जिला के डीसी रितेश चौहान, एसडीएम धर्मशाला श्रवण मांटा, एडीएम बलबीर ठाकुर, आईपीएच, पीडब्ल्यूडी, विद्युत बोर्ड के एक्सईएन, डीएफओ धर्मशाला सहित अन्य अफसर भी मौजूद रहे।
नाला, निजी जमीन, भवन निर्माण पर सवाल
टीम की बैठक में चर्चा के दौरान जमीन में पड़ते नाले पर भी बात की गई। इसके अलावा कहा गया कि पूरी जमीन के अंतर्गत आने वाली निजी जमीन को अधिगृहित नहीं किया जाएगा।
किसी भी परिवार को विस्थापित नहीं किया जाएगा। इसके अलावा टीम ने यह भी कहा कि पहाड़ की इस जमीन पर मल्टीस्टोरी कैंपस आप कैसे बनाएंगे जिसका जवाब प्रशासन के तकनीकी कर्मचारियों ने दिया।
चिह्नित जमीन में हैं सात गांव
चिह्नित जमीन करीब तीन से चार किलोमीटर के क्षेत्र में फैली है। इसमें सात गांव उपमहाल कस्बा, पटोला, सकोली, करडयाणा, कंड, बगियाड़ा, सालग आते हैं।
आगे क्या होगा
साइट सिलेक्शन कमेटी अब चर्चा की मिनट्स बनाकर जमीन की फिटनेस को लेकर अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को भेजेगी। इसके बाद अगर कमेटी जमीन की फिटनेस को अप्रूव कर देती है तो इसके बाद मामला पर्यावरण एवं वन मंत्रालय केंद्र सरकार को जाएगा। इसके लिए काफी लंबा वक्त लगेगा।
क्योंकि, फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए राजस्व रिकॉर्ड, वन क्षेत्र, स्थानीय लोगों और पंचायतों की आपत्तियां, भूमि की नाप नपाई, केंद्रीय विवि का मास्टर प्लान बनाकर प्रस्ताव पर्यावरण एवं वन मंत्रालय केंद्र सरकार को जाएगा। इसके बाद अगर पर्यावरण एवं वन मंत्रालय फॉरेस्ट क्लीयरेंस देगा तभी केंद्रीय विवि के भवन निर्माण का रास्ता साफ हो पाएगा।