Himachal: चेहरा दिखाने से नहीं चलेगा काम, कॉलेज शिक्षकों को कक्षाएं लेना अनिवार्य, निर्देश जारी
प्रदेश के सरकारी और संस्कृत कॉलेजों में अब केवल बायोमेट्रिक मशीन पर उपस्थिति दर्ज कराना या चेहरा दिखाना ही पर्याप्त नहीं होगा।
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हिमाचल प्रदेश के सरकारी और संस्कृत कॉलेजों में अब केवल बायोमेट्रिक मशीन पर उपस्थिति दर्ज कराना या चेहरा दिखाना ही पर्याप्त नहीं होगा। शिक्षकों को अपनी निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार नियमित रूप से कक्षाएं और प्रायोगिक कक्षाएं भी लेनी होंगी। उच्च शिक्षा निदेशालय ने साफ किया है कि शिक्षक की उपस्थिति तभी सार्थक मानी जाएगी, जब वह वास्तविक रूप से शिक्षण कार्य में संलग्न हो। उच्च शिक्षा निदेशक सुनीता सिंह की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि निदेशालय के संज्ञान में ऐसे मामले आए हैं, जिनमें कुछ शिक्षक बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने के बाद बिना पूर्व सूचना संस्थान से चले जाते हैं। इससे न केवल शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि विद्यार्थियों की पढ़ाई और शैक्षणिक गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।
निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि बायोमेट्रिक प्रणाली का उद्देश्य केवल कर्मचारियों की मौजूदगी दर्ज करना नहीं, बल्कि संस्थानों में जवाबदेही और कार्य संस्कृति विकसित करना है। यदि शिक्षक कक्षाओं में उपस्थित नहीं होंगे तो विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया प्रभावित होगी और पाठ्यक्रम समय पर पूरा करना भी चुनौती बन जाएगा। कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। इसलिए अब संस्थानों के प्रमुखों को भी यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि शिक्षक निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार कक्षाएं संचालित करें। शिक्षा निदेशक ने कहा कि राज्य के सरकारी कॉलेजों में हजारों विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे में यदि शिक्षक नियमित रूप से कक्षाएं नहीं लेते हैं तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की परीक्षा तैयारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रदर्शन और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ता है।
प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभानी होंगी
निर्देशों में शिक्षकों से केवल पढ़ाने तक सीमित न रहने, बल्कि छात्रों के समग्र विकास और संस्थानों के सुचारु प्रशासन में भी सक्रिय भूमिका निभाने को कहा गया है। निदेशक ने कहा कि कॉलेज केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान न रहें, बल्कि व्यक्तित्व विकास, कौशल संवर्धन और अकादमिक उत्कृष्टता के केंद्र बनें।