माइनस में पहुंचा पारा, पहाड़ों में जम गईं झीलें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल के पर्वतीय इलाकों में ताजा बर्फबारी के बाद सूबे के कई पहाड़ी क्षेत्रों में पारा शून्य के नीचे चला गया है। तापमान गिरने के कारण लाहौल, किन्नौर और चंबा जिलों के पहाड़ों में बनीं झीलें जमना शुरू हो गई हैं। 12 हजार से 17 हजार फीट की ऊंचाई पर बनीं इन झीलों के अलावा कई झरने भी नवंबर माह में ही जमने लगे हैं। कई इलाकों में न्यूनतम तापमान माइनस 10 डिग्री के आसपास है।
लाहौल और चंबा में ही लगभग दो दर्जन झीलें जम गई हैं। रोहतांग मार्ग पर राहलीनाला और इसके आसपास के क्षेत्रों में भी झरने जम गए हैं। नवंबर के पहले पखवाड़े में ही बर्फबारी के कारण इस बार झीलें पहले ही जमनी शुरू हो गई हैं। अमूमन दिसंबर में ये झीलें जमती थीं। शुक्रवार को लाहौल स्पीति के जिला मुख्यालय केलांग में ही पारा माइनस 1.7 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।
जम गईं चंद्रताल, सूरज ताल झीलें
लाहौल स्पीति की चंद्रताल, सूरज ताल, दीपक ताल, नीलकंठ सहित अन्य छोटी-बड़ी झीलें जम चुकी हैं। चंबा जिले की ऊंची चोटियों पर मणिमहेश झील, लम डल झीलें, कुवारसी डल, क्यूंर डल, गरुड़ासन महादेव डल झील और खुंडी माता डल झील के जमने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जानकारों के अनुसार यहां एक फीट से ज्यादा बर्फ जमी हुई है।
मौसम की नजाकत को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी ट्रैकिंग रूटों पर सैलानियों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। एसडीएम उदयपुर डॉ. अमित गुलेरिया ने बताया कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण तापमान में गिरावट आई है। कई झीलें जम चुकी हैं। कांगला ग्लेशियर, जोबरंग, मणिमहेश, कुगति ट्रैकिंग रूट पर एक फीट से अधिक बर्फबारी हो चुकी है। इस कारण इन रूटों पर ट्रैकरों के जाने पर पूर्ण रोक लगा दी है। अब गर्मियों में ही ट्रैकिंग से रोक हटाई जाएगी।