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सर्च रेस्क्यू ऐंड इन्वेस्टिगेशन: वादियों में गुम होने वालों को ढूंढना ही इनका पेशा

Thu, 07 Jun 2018 03:07 PM IST
छापेराम नेगी
छापेराम नेगी Updated Thu, 07 Jun 2018 03:07 PM IST
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Meet Chhape Ram Negi who rescued many individuals in Parvati valley in Kullu
Chhape Ram Negi

हिमाचल की वादियों का रुख करने वाले पर्यटकों में से कई या तो नशे में डूबे होते हैं या फिर किसी अवसाद का शिकार होते हैं। ऐसे लोग पहाड़ों में विचरण करते हुए राह भटक जाते हैं और तब तक भटकते रहते हैं, जब तक मेरे जैसा कोई टूर गाइड उन तक पहुंचकर उन्हें सही रास्ता न बताए। हिमाचल प्रदेश की पार्वती पहाड़ियों में काम करने वाला मैं एक पेशेवर टूर व ट्रेकिंग गाइड हूं। मेरे इस काम की शुरुआत तब हुई थी, जब मैं आठवीं कक्षा में पढ़ रहा था। उस वक्त मेरे परिवार की माली हालत खराब थी और पहाड़ों में करने को कुछ था नहीं। पर्यटकों की आमद भी उस दौर में ज्यादा नहीं थी। दसवीं में आते-आते मुझे पढ़ाई छोड़नी पड़ गई, क्योंकि परिवार को स्कूल से लौटने के बाद कुछ घंटे काम करने वाले के बजाय ऐसे शख्स की जरूरत थी, जो पूरे दिन काम करे।

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नजरों को सुहाने वाली इन मोहक पहाड़ियों में घूमने के इरादे से जो भी पर्यटक आते हैं, उन्हें हिदायत दी जाती है कि वे किसी गाइड के साथ ही ट्रेकिंग आदि पर जाएं। लेकिन चंद पैसों के लालच और खतरनाक एडवेंचर की तलाश में कई लोग किसी सलाह की फिक्र नहीं करते। मैं इन्हीं वादियों में पला हूं। जितना घर में नहीं रहा होऊंगा, उससे ज्यादा पहाड़ियों को वक्त दिया है। यहां के चप्पे-चप्पे का नक्शा मेरे दिमाग में मौजूद है। हालांकि इसके बावजूद कई बार मुझे सैलानियों को ढूंढने में वक्त लग जाता है, क्योंकि मौसम के मुताबिक पहाड़ों पर खतरे वाले इलाके बदलते रहते हैं। हमें जंगली जानवरों से भी बचना होता है।
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2004 की एक घटना के बाद प्रशासन ने भी मेरी मदद लेनी शुरू की। मुझे अच्छी तरह से याद है कि उस वक्त पुलिस के एक बड़े दस्ते ने घाटी में अवैध रूप से गांजे की बिक्री करने वाले ठिकाने पर धावा बोला था। पुलिस से बचने के लिए कई लोग जंगलों की ओर भागे। लेकिन पुलिस से बचने के चक्कर में वे वादियों में खो गए। प्रशासन ने उन लोगों को बचाने के लिए मेरी मदद मांगी। मैंने दिन-रात एक करते हुए सभी लोगों को सुरक्षित ढूंढ निकाला। उस घटना के बाद तो प्रशासन को जब भी ऐसी कोई जरूरत होती, मुझे याद करने लगे। 

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मैं कभी किसी से कोई आर्थिक मदद की उम्मीद नहीं करता

आज की तारीख में मेरे परिवार के पोषण के लिए मेरे काम की कोई जरूरत नहीं है। अपने भाई की मदद से मैं होटल और पर्यटन से जुड़ा व्यापार भी करता हूं। लेकिन मेरा मन इस बात के लिए नहीं मानता कि मैं उस काम से दूर हो जाऊं, जिसने अब तक सैकड़ों लोगों को गुम होने से बचाया है। लोगों को बचाने के लिए मैं कभी किसी से कोई आर्थिक मदद की उम्मीद नहीं करता। मैं जल्द ही पचास साल का होने वाला हूं। मेरे परिवारवाले मुझसे उम्र के इस पड़ाव में उम्मीद करते हैं कि मैं अब पहाड़ों पर चढ़ने-उतरने का काम नहीं करूंगा। लेकिन मेरा शरीर जब तक साथ देगा, मैं इसे नहीं छोड़ने वाला।

मैंने अपने काम को खुद तक सीमित नहीं रखा। सर्च रेस्क्यू ऐंड इन्वेस्टिगेशन नाम से मेरी अपनी टीम है। सैकड़ों लड़कों को मैंने इस काम के लिए प्रशिक्षित किया है। और मैंने सभी को यही सिखाया है कि पेशे में इंसानियत को हमेशा ऊपर रखना। स्वतंत्रता दिवस और हिमाचल दिवस पर मेरे काम के लिए सरकारी अधिकारी मुझे आमंत्रित करके प्रमाण पत्र देते हैं। यह तो ठीक है, लेकिन मैं यह चाहता हूं कि सरकार के लिए उन उपकरणों की व्यवस्था करना ज्यादा जरूरी है, जो गुम हुए लोगों को रेस्क्यू करने में मददगार हों।
 

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