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आईजीएमसी: बिस्तर है नहीं, अब स्ट्रेचर भी छीन रहे मरीजों से
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 08 Feb 2016 12:32 PM IST
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आईजीएमसी में लोक कल्याण समिति के कुछ कर्मचारियों पर मनमानी के आरोप मरीजों ने लगाए हैं। अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को सुविधा तो उपलब्ध करवा देती है, लेकिन बाद में अपनी चीजों को वापस लेने के लिए मरीजों और उनके परिजनों को धमकाने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। ऐसा ही मामला रविवार सुबह अस्पताल में सामने आया, जब एलकेएस के कर्मचारी मरीज को धमकाकर स्ट्रेचर वापस मांग रहे थे।
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आईजीएमसी में शुक्रवार को उपचार के लिए आए मरीज के साथ लोककल्याण समिति के लोगों पर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा। नालदेहरा से आए खेमचंद की शुक्रवार को शटरिंग उतारते हुए बाजू में चोट लग गई। चिकित्सकों ने जब युवक की जांच की तो पाया कि युवक की बाजू की नस फट चुकी है। डाक्टरों ने युवक का सफल ऑपरेशन किया। लेकिन ऑपरेशन के बाद जब मरीज को ट्रामा वार्ड में शिफ्ट किया गया तो लोक कल्याण समिति के लोगों ने आपरेशन के बाद ही मरीज से स्ट्रेचर वापस मांग लिया।
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मरीज की हालत को देखते हुए जब उसके साथियों ने इस बात का विरोध किया तो संस्था के लोगों ने उन्हें डराने व धमकाने की कोशिश भी की। नौबत यहां तक आ गई थी कि मरीज को इतनी ठंड के मौसम में जमीन पर सोना पड़ गया था। अस्पताल में स्ट्रेचर एलकेएस समिति लोगों को उपलब्ध करवाती है, लेकिन बदले में वह सौ रुपये सिक्योरिटी के रूप में ले लेती है। अस्पताल में बहुत से ऐसे भी मरीज होते हैं, जिन्हें बिस्तर की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती और आगामी उपचार स्ट्रेचर पर ही चलता रहता है। लेकिन ये लोग एक से दो घंटों के भीतर ही मरीजों के तीमारदार को स्ट्रेचर की मांग करना शुरू कर देते हैं।
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दुर्व्यवहार की जानकारी नहीं
आईजीएमसी में लोक कल्याण समिति के संचालक राजेश सरस्वती ने कहा कि वर्करों द्वारा लोगों से किए दुर्व्यवहार की सूचना नहीं है। अगर इस तरह की सूचना आती है तो उन पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि अस्पताल में स्ट्रेचरों के लिए काफी मारामारी है। मौजूदा समय में केवल 25 स्ट्रेचर की हालत ठीक है।
क्या कहना है मरीजों का
रामपुर के प्रेम सिंह ने बताया कि अस्पताल में एलकेएस के पास स्ट्रेचर लेने गए तो सौ रुपये लेने के बाद उनके लोगों ने कहा कि अपने मरीज को जल्दी से स्ट्रेचर पर डाल दो और हमें हमारा स्ट्रेचर वापिस कर देना। घर में बच्चे ने अपना हाथ जला दिया है। अब अस्पताल में बिस्तर की सुविधा भी नहीं है। ऐसी मुसीबत में क्या करें समझ से बाहर है। करसोग से आए गुलाब सिंह ने बताया कि उनका बच्चा बीमार है। स्ट्रेचर पर ही बच्चे का उपचार चल रहा है लेकिन एनजीओ के लोग स्ट्रेचर वापस छोड़ने की बात कर रहे हैं।
आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश ने कहा कि अगर मरीजों को कोई दिक्कत है तो वह उनके पास आएं और लिखित में शिकायत करें। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यवहार करने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।