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Shimla News: एमसी के गले की फांस बन गई रोजगार योजना
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सरकार से नहीं मिला बजट, नगर निगम ने शहरी विकास विभाग को भेजा रिमाइंडर
3 करोड़ रुपये की नगर निगम की है मांग
शहरी बेरोजगारों को रोजगार देने की है योजना
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहरी बेरोजगार लोगों को 120 दिन काम देने की सरकार की योजना नगर निगम के गले की फांस बन गई है।
नगर निगम ने इस योजना को शुरू करने के लिए बेरोजगारों के आवेदन तो ले लिए लेकिन अब पैसा न होने के कारण रोजगार नहीं दे पा रहा है। सरकार से इस योजना के लिए अभी तक नगर निगम को कोई बजट नहीं मिला है। निगम के पास खुद भी इतना पैसा नहीं है कि इस योजना को शुरू किया जा सके। ऐसे में निगम ने शहरी विकास विभाग को बजट जारी करने के लिए रिमाइंडर भेजा है। बजट मिलने के बाद ही शहरी बेरोजगार लोगों को काम मिल पाएगा।
नगर निगम के अनुसार सरकार ने मनरेगा की तर्ज पर शहरी बेरोजगार लोगों को काम देने की योजना शुरू की है। साल 2021 में भी इस योजना को चलाया गया था। लेकिन कोरोनाकाल खत्म होने के बाद इस योजना को बंद कर दिया गया। अब तीन साल बाद निगम इसे फिर शुरू करने जा रहा है। इसके लिए शहरी विकास विभाग से बजट मिलना है। नगर निगम ने योजना को शुरू करने के लिए अगस्त में ही तीन करोड़ रुपये का बजट देने का प्रस्ताव विभाग को भेज दिया था। लेकिन आज तक इसका पैसा नहीं आया। पार्षद वार्डाें में मजदूर न होने के कारण काम ठप होने से परेशान हैं। पार्षद सरोज ठाकुर ने कहा कि रुल्दूभट्ठा में सफाई व्यवस्था ठप हो गई है। मलबा उठाने और झाड़ियां काटने तक के लिए निगम कर्मचारी नहीं दे रहा।
बेरोजगारों को मिलना है 120 दिन काम
मनरेगा की तर्ज पर शहरी बेरोजगारों के भी जॉब कार्ड बनेंगे। इसमें साल में 120 दिन काम की गारंटी दी जाएगी। नगर निगम इनसे मरम्मत कार्याें के अलावा सफाई और झाड़ियां काटने जैसे काम करवा सकता है। इन्हें सरकार की तय दिहाड़ी के अनुसार पैसा मिलेगा। निगम ने अगस्त से ही इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी थी। 150 से ज्यादा लोगों ने अब तक काम के लिए निगम में आवेदन कर दिया है। नगर निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने कहा कि बजट के लिए विभाग को रिमाइंडर भेजा है। निगम अपने बजट से भी जल्द इस योजना को शुरू करवाने जा रहा है।
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3 करोड़ रुपये की नगर निगम की है मांग
शहरी बेरोजगारों को रोजगार देने की है योजना
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहरी बेरोजगार लोगों को 120 दिन काम देने की सरकार की योजना नगर निगम के गले की फांस बन गई है।
नगर निगम ने इस योजना को शुरू करने के लिए बेरोजगारों के आवेदन तो ले लिए लेकिन अब पैसा न होने के कारण रोजगार नहीं दे पा रहा है। सरकार से इस योजना के लिए अभी तक नगर निगम को कोई बजट नहीं मिला है। निगम के पास खुद भी इतना पैसा नहीं है कि इस योजना को शुरू किया जा सके। ऐसे में निगम ने शहरी विकास विभाग को बजट जारी करने के लिए रिमाइंडर भेजा है। बजट मिलने के बाद ही शहरी बेरोजगार लोगों को काम मिल पाएगा।
नगर निगम के अनुसार सरकार ने मनरेगा की तर्ज पर शहरी बेरोजगार लोगों को काम देने की योजना शुरू की है। साल 2021 में भी इस योजना को चलाया गया था। लेकिन कोरोनाकाल खत्म होने के बाद इस योजना को बंद कर दिया गया। अब तीन साल बाद निगम इसे फिर शुरू करने जा रहा है। इसके लिए शहरी विकास विभाग से बजट मिलना है। नगर निगम ने योजना को शुरू करने के लिए अगस्त में ही तीन करोड़ रुपये का बजट देने का प्रस्ताव विभाग को भेज दिया था। लेकिन आज तक इसका पैसा नहीं आया। पार्षद वार्डाें में मजदूर न होने के कारण काम ठप होने से परेशान हैं। पार्षद सरोज ठाकुर ने कहा कि रुल्दूभट्ठा में सफाई व्यवस्था ठप हो गई है। मलबा उठाने और झाड़ियां काटने तक के लिए निगम कर्मचारी नहीं दे रहा।
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बेरोजगारों को मिलना है 120 दिन काम
मनरेगा की तर्ज पर शहरी बेरोजगारों के भी जॉब कार्ड बनेंगे। इसमें साल में 120 दिन काम की गारंटी दी जाएगी। नगर निगम इनसे मरम्मत कार्याें के अलावा सफाई और झाड़ियां काटने जैसे काम करवा सकता है। इन्हें सरकार की तय दिहाड़ी के अनुसार पैसा मिलेगा। निगम ने अगस्त से ही इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी थी। 150 से ज्यादा लोगों ने अब तक काम के लिए निगम में आवेदन कर दिया है। नगर निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने कहा कि बजट के लिए विभाग को रिमाइंडर भेजा है। निगम अपने बजट से भी जल्द इस योजना को शुरू करवाने जा रहा है।
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