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नहीं मिले पानी के बिल, लोगों की बढ़ी परेशानी
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Fri, 07 Nov 2014 10:32 AM IST
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राजधानी शिमला में बीते डेढ़ माह से पीने के पानी के बिल जारी नहीं हुए हैं। नगर निगम के अफसरों की लापरवाही के चलते न तो पानी के बिल जारी हो रहे हैं और न ही जमा। हाईकोर्ट ने नगर निगम की दोबारा रेट निर्धारित करने की अधिसूचना को रद किया है।
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कोर्ट के आदेश के बाद से निगम के अफसर आगामी फैसला नहीं ले पा रहे हैं। अफसरों की इस लापरवाही के चलते शहरवासियों को बिल जारी नहीं हुए हैं। राज्य सरकार पानी बिल का फ्लैट रेट रिनोटिफाई करवाने में भी अफसर नाकाम साबित हुए हैं।
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ऐसे में जनता पर एक साथ आर्थिक बोझ डालकर नगर निगम लोगों की परेशानियों को बढ़ाने में लगा है। राजधानी में पानी की दरों को दोबारा निर्धारित करने की अधिसूचना रद होने से नगर निगम की एक बड़ी खामी भी सामने आई है।
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2012 में फ्लैट कर दिए थे बिल
निगम प्रशासन ने अक्तूबर 2012 में शहर में पानी का बिल फ्लैट कर दिया था लेकिन सरकार से इसकी अधिसूचना जारी नहीं करवाई। अब हाईकोर्ट से फटकार लगने के बाद नगर निगम ने शहर में पानी के फ्लैट बिल का मामला सरकार को भेजने का फैसला लिया है। मामला सरकार को भेजकर नगर निगम फ्लैट रेट को नोटिफाई करवाएगा। लेकिन इस मामले पर गंभीरता नहीं दिखाने के चलते लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
एमसी ने कमर्शियल बिल भी रोके
नगर निगम की कार्य प्रणाली भी अजब की है। हाईकोर्ट ने सिर्फ घरेलू पानी के रेट को दोबारा निर्धारित करने की अधिसूचना को रद किया है। नगर निगम ने अब कामर्शियल बिल जारी करना और जमा करना शुरू कर दिए हैं। शहर के चार हजार से अधिक कामर्शियल कनेक्शन धारकों से मीटर रीडिंग के आधार पर बिल की वसूली होती है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कामर्शियल कनेक्शनों का कहीं भी जिक्र नहीं किया है।
26 सितंबर को आया था फैसला
हाईकोर्ट ने पानी की दरों को दोबारा निर्धारित करने की अधिसूचना को 26 सितंबर को रद किया था। कोर्ट ने कहा है कि दरें निर्धारित करने की शक्ति केवल राज्य सरकार की है। हाईकोर्ट ने पर्यटन आवाम जन कल्याण समिति द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए कहा है कि नगर निगम शिमला पानी की दरों का निर्धारण नहीं कर सकता। यह शक्ति केवल सरकार के पास निहित है।