हैरतअंगेज! माचिस की तिल्ली ने बचाई दो लोगों की जान
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रोहतांग की बर्फीली तूफान के बीच फंसे दो लोगों के लिए माचिस की एक तिल्ली जीवनदायिनी साबित हुई है।
शून्य से लगभग 25 डिग्री तापमान के साथ बर्फीली तूफान में करीब 15 घंटे तक फंसने के बाद यह दोनों शख्स जिंदा निकल आए हैं।
ये हैं 52 साल के धर्मचंद और 53 वर्षीय टीचर प्रेम सिंह। दोनों बर्फ में फंस गए थे। इन्हें ढूंढने के लिए जिला प्रशासन और रेस्क्यू टीमों के हाथ पांव फूल गए थे।
गनीमत यह रही कि रोहतांग से सटे हरचा गढू में वन विभाग के रेस्क्यू हट में घुसकर दोनों ने अपनी जान बचाई।
इस तरह बच पाई दोनों की जान
इस हट में हालांकि पहले से ही खाद्य सामग्री, लकड़ी और मिट्टी तेल मौजूद था, लेकिन कड़ी मशक्कत के बाद कमरे के एक कोने में माचिस की एक गीली डिब्बी मिली।
ठंड के कारण मानों नसों में खून की रवानगी अब थमने ही वाली थी। माचिस की एक चिंगारी ने दोनों में जीने में एक नई उर्जा प्रदान की।
मौत को शिकस्त देकर मंगलवार को सुरक्षित मनाली पहुंचे फारेस्ट गार्ड धर्मचंद ने फोन पर अमर उजाला के साथ रोहतांग दर्रे में बिताए उन खौफनाक 15 घंटो की आपबीती सुनाई।
धर्मचंद 52 साल के मुताबिक उनके साथ 53 वर्षीय टीचर प्रेम सिंह सोमवार को कोकसर से रेस्क्यू टीम के साथ रोहतांग की तरफ निकले।
धर्मचंद ने बताया कि कोर्ट कोर्स के सिलसिले में उन्हें कुल्लू पहुंचना था। हरचा गढू के समीप रेस्क्यू टीम को अलबिदा कह कर वह दोनों रोहतांग की तरफ निकले।
कड़ाके की ठंड के बीच गुजारी रात
हालांकि उस दौरान ही बर्फ बारी के साथ तूफान भी चल रहा था। ब्यास कुंड पहुंच कर बर्फ बारी और तेज हो गई। धुंध के कारण पूरे इलाके में अंधेरा छा गया। इस दौरान दोनों करीब डेढ घंटे तक रोहतांग में भटकते रहे।
हालात खराब होते देख दोनों ने वापस हरचा गढू वापस जाने का निर्णय लिया। बर्फ में अपने कदमों के निशानों के सहारे वह दोनों हरचा गढू पहूंचे।
जहां पर दोनों ने कड़ाके की ठंड के बीच खौफनाक रात गुजारी। मंगलवार सुबह 4 बजे दोनों ने फिर मढ़ी की तरफ कूच किया।
धर्मचंद ने बताया कि इस दौरान भी बर्फ बारी और तूफान जारी था। मंडी रेस्क्यू पोस्ट पहुंच कर दोनों की जान में जान आई।
उसके बाद दोनों ने कोठी तक का सफर पैदल ही तय किया। जहां से वह दोनों रेस्क्यू के वाहन से मनाली पहुंचे। डीएफओ वन मंडल केलांग हीरा लाल राणा ने दोनों के सुरक्षित मनाली पहुंचने की पुष्टि की है।