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मंडी हादसा: हाईकोर्ट ने दिया एक अहम फैसला

Thu, 26 Jun 2014 03:48 PM IST
Updated Thu, 26 Jun 2014 03:48 PM IST
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Mandi tragedy: Court orders Rs.5 lakh for each victim's kin

हिमाचल हाईकोर्ट ने लारजी हादसे के लिए बिजली बोर्ड के लारजी प्रोजेक्ट प्रबंधन और हैदराबाद इंजीनियरिंग कॉलेज से छात्रों के साथ आए टीचर्स की प्रथम दृष्ट्या लापरवाही मानते हुए उन्हें पीड़ित परिवारों को 5-5 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।

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अंतरिम राहत की ये धनराशि बिजली बोर्ड और कॉलेज प्रबंधन को बराबर वहन करनी होगी। केस की अगली सुनवाई अब नौ जुलाई को होगी।

हाईकोर्ट के स्व संज्ञान से चल रहे इस केस की सुनवाई के दौरान बुधवार को मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने कहा कि इस हादसे पर औट थाना में दर्ज एफआईआर 61/2014 की निगरानी अब कोर्ट करेगा।
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जांच रिपोर्ट पेशी से पहले बताने के निर्देश

Mandi tragedy: Court orders Rs.5 lakh for each victim's kin

कोर्ट ने एसपी मंडी को आदेश दिए कि एफआईआर पर हुई जांच की रिपोर्ट कोर्ट को अगली पेशी से पहले बताई जाए। मंडलायुक्त की रिपोर्ट और राज्य सरकार की स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर खंडपीठ ने लारजी प्रोजेक्ट के फिटर हरबंस सिंह, शिफ्ट इंजीनियर वेद प्रकाश, अतिरिक्त सहायक इंजीनियर प्रेमसुख, सहायक एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बलबीर शर्मा, सीनियर एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एमएस ढटवालिया, आवासीय इंजीनियर मनदीप सिंह को केस में प्रतिवादी बना दिया है।

लारजी प्रोजेक्ट में उत्पादन घटाने का आदेश देने वाले एसएलडीसी और एनआरएलडीसी को भी प्रतिवादी बनाया गया। छात्रों के साथ आए इंजीनियरिंग कॉलेज स्टाफ के तीन सहायक प्रोफेसर भी अब प्रतिवादी होंगे। खंडपीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता दलीप शर्मा को इस केस में कोर्ट की मदद के लिए नियुक्त किया।

सरकार से फिर मांगी स्टेटस रिपोर्ट

Mandi tragedy: Court orders Rs.5 lakh for each victim's kin

हाईकोर्ट ने इस केस में राज्य सरकार के मुख्य सचिव से दो हफ्ते में नई स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। इसमें सरकार को बताना होगा कि इस तरह के हादसे दोबारा न हों, इस बारे में क्या क्या कदम उठाए गए? कोर्ट ने हैदराबाद के कॉलेज से भी दो सप्ताह में जवाब तलब किया है। कॉलेज ने पहले कहा था कि इस टूर के लिए सभी अभिभावकों से कन्सेंट ली गई थी।

‘अमर उजाला’ की खबर पर लिया संज्ञान

8 जून की शाम को हुए इस हादसे की रिपोर्ट अमर उजाला के 9 जून के अंक में देखने के बाद हाईकोर्ट ने इसका स्वसंज्ञान लिया था। 16 जून को हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से नियुक्त जांच अधिकारी मंडलायुक्त को अपनी जांच रिपोर्ट कोर्ट में रखने को कहा। मंडलायुक्त ने 19 जून को पेश रिपोर्ट में लारजी प्रोजेक्ट प्रबंधन और एसएलडीसी को दोषी बताया था।

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