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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Mandi Shivratri: 31 kg butter offered on Shivling on Tararatri, now a different form of Mahadev will be carved

Mandi Shivratri: तारारात्रि पर शिवलिंग पर चढ़ा 31 किलो मक्खन,अब हर दिन उकेरा जाएगा महादेव का अलग रूप

Sat, 21 Jan 2023 08:09 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Published by: Krishan Singh Updated Sat, 21 Jan 2023 08:09 PM IST
सार

छोटी काशी मंडी के अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि मेला-2023 के कारज शुक्रवार रात 12:00 बजे प्राचीन भूतनाथ मंदिर में स्वयं भू प्रकट शिवलिंग पर मक्खन के घृतकंबल चढ़ने के साथ शुरू हो गए हैं। 

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Mandi Shivratri: 31 kg butter offered on Shivling on Tararatri, now a different form of Mahadev will be carved
शिवलिंग पर चढ़े मक्खन पर इटहिया शिव मंदिर महराजगंज का स्वरूप उकेरा। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की छोटी काशी मंडी के अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि मेला-2023 के कारज शुक्रवार रात 12:00 बजे प्राचीन भूतनाथ मंदिर में स्वयं भू प्रकट शिवलिंग पर मक्खन के घृतकंबल चढ़ने के साथ शुरू हो गए हैं। तारारात्रि को शिवलिंग पर 31 किलो गाय के दूध से बना मक्खन चढ़ाया गया। अब 17 फरवरी तक हर दिन मक्खन पर भारत के शिवमंदिरों के शिवरूप उकेरे जाएंगे। 18 को बाबा भूतनाथ अपने स्वरूप में नजर आएंगे। 19 फरवरी को पहली जलेब के साथ महाशिवरात्रि मेला शुरू होगा। 25 फरवरी को अंतिम जलेब के साथ इसका समापन होगा। 

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पहले दिन शिवलिंग पर चढ़े मक्खन पर इटहिया शिव मंदिर महराजगंज उत्तर प्रदेश का स्वरूप उकेरा गया। शिवरात्रि से पहले प्राचीन परंपरा के तहत बाबा भूतनाथ के शिवलिंग पर मक्खन का घृतकंबल चढ़ाया जाता है। शुक्रवार मक्खन चढ़ाने से पहले बाबा भूतनाथ के मंदिर में विशेष पूजा हुई। रात 10:00 बजे बाबा भूतनाथ मंदिर के कपाट आम लोगों के लिए बंद कर दिए गए। मंदिर परिसर में करीब एक घंटे तक साफ-सफाई की गई। इसके बाद शिवलिंग का अभिषेक किया गया। तदोपरांत, भोले बाबा को लंगोटी बांधी गई। इसके बाद मक्खन का लेप चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की गई। 
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यह है मान्यता
बाबा भूतनाथ के महंत की मानें तो तारारात्रि से शिवरात्रि तक भगवान शंकर तपस्या में लीन होते हैं। ताररात्रि से शिवरात्रि तक मां पार्वती ने भगवान शंकर को वर के रूप में पाने के लिए तपस्या की थी। यह एक माह तक चली। प्रतिदिन एक बेलपत्र का आहार माता पार्वती करती थीं। एक माह की तपस्या के बाद भोले बाबा प्रसन्न हुए और माता पार्वती के साथ परिणय सूत्र में बंधे। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए घृतमंडल चढ़ाया जाता है। एक मान्यता यह भी है कि सर्दी से भगवान शिव को बचाने के लिए मक्खन का घृतकंबल चढ़ाया जाता है। 
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उत्तर प्रदेश के महराजगंज में है इटहिया पंचमुखी शिव मंदिर 
इटहिया पंचमुखी शिव मंदिर उत्तर प्रदेश के महराजगंज में है। कहा जाता है कि शिव के इस धाम में पंचमुखी महादेव भक्तों के दुखों को दूर करते हैं। यह धाम महाराजगंज जिले के निचलौल क्षेत्र में है। मान्यता है कि 200 वर्ष पूर्व आम के पेड़ के नीचे खोदाई के दौरान पंचमुखी शिवलिंग किसान को मिला था। तभी से पूजन-अर्चन की जाती है। सैकड़ों साल से यह मंदिर श्रद्धालुओं की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।


परंपरा के अनुसार महाशिवरात्रि पर्व से पहले शिवलिंग पर घृतकंबल चढ़ाया जाता है। पहले दिन पहाड़ों से इसके लिए देसी नस्ल की गाय के दूध का 31 किलो मक्खन लाया गया है। इसके बाद रोजाना श्रद्धालु जितना मक्खन लाएंगे, उतना घृतकंबल पर चढ़ाया जाएगा। शिवभक्त अपने स्तर भी मक्खन पहुंचा रहे हैं। मंदिर में अब शिवरात्रि पर्व तक बाबा अलग अलग स्वरूप में नजर आएंगे।
- महंत देवानंद सरस्वती, भूतनाथ मठ मंदिर मंडी

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