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बेगमा की ये दर्दनाक कहानी पढ़ भर आएंगी आंखें

Wed, 10 Sep 2014 03:09 PM IST
Updated Wed, 10 Sep 2014 03:09 PM IST
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mandi attack case: read begma story

सिरफिरे युवक की बर्बरता का शिकार हुई 20 साल की बेगमा देवी ने आखिरकार आईजीएमसी अस्पताल शिमला में दम तोड़ दिया। वह तीन दिन से मौत से जंग लड़ रही थी। डाक्टरों ने उसे बचाने की काफी कोशिश की मगर उसे बचाया नहीं जा सका।

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अधिक खून बहने और संक्रमण फैलने से बेगुनाह बेगमा जिन्दगी की जंग हार गई। मंगलवार शाम करीब साढ़े पांच बजे बेगमा ने जैसे ही दम तोड़ा कि परिजनों के साथ डॉक्टरों की आंखें भी नम हो गई।
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सभी बेगमा को बचाना चाहते थे लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। बेगमा को बचाने के लिए उसकी बहन भी जान पर खेल गई थी। लेकिन उसके बावजूद बेगमा नहीं बच पाई। मामला हिमाचल के मंडी जिले का है। आइए आपको बताएं कब क्या हुआ?

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शादी से किया था इंकार

mandi attack case: read begma story

मंडी के थलौट की रहने वाली बेगमा के साथ गांव का तेजराम नाम का युवक शादी करना चाहता था। यह युवक पांचवीं पास था जबकि ‌बेगमा काफी पढ़ी लिखी थी। बेगमा ने शादी से इंकार कर दिया। पिता ने भी उसका साथ दिया।

लेकिन आरोपी इसके बाद उसे धमकाने लगा। आए दिन रास्ता रोकता, धमकियां देता। मगर बेगमा ने इसकी परवाह नहीं की। सिरफिरे आशिक ने इसके बाद जो किया वो किसी दरिंदगी से कम नहीं था।

शनिवार को अपनी चचेरी बहन के साथ कंप्यूटर सेंटर जाते वक्त तेजराम ने बेगमा और उसकी बहन को सरेराह हमला कर दिया। इसने चाकू बेगमा के पेट में घोंप दिया था।

बहन ने किया बीच बचाव

mandi attack case: read begma story

बहन को बचाने के लिए चचेरी बहन मथुरा देवी चिल्लाते हुए आरोपी को रोकने का प्रयास करने लगी तो आरोपी ने उसके पेट में भी चाकू घोंप दिया। दोनों चचेरी बहनों के पेट पर चाकू से कई वार करने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।

वहीं, गरीब परिवार की इस बिटिया की हालत पर अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद मदद के लिए कई हाथ आगे बढ़े। बेगमा की सलामती के लिए दुआएं मांगी गईं, लेकिन बेगमा एक सिरफिरे की दरिंदगी का शिकार हो गई।

बिटिया की तीमारदारी में जुटे अकेले पिता के लिए यह किसी सदमे से कम नहीं था। वह इस उम्मीद से रात दिन आईसीयू के बाहर बैठे थे कि कभी भी उनकी लाड़ली उन्हें पुकार सकती है उन्हें एक ही बात का मलाल है कि वह अपनी बेटी का हाल तक नहीं पूछ पाए।

मौत के बाद बिटिया को कफन तक नसीब नहीं

mandi attack case: read begma story

चाकू के हमले से घायल बिटिया के आईजीएमसी में दम तोड़ने के बाद उसे कफन तक नसीब नहीं हुआ। बेबस बाप ने रात को ठंड से बचने के लिए ओढ़ रखे कंबल को कफन बनाकर इकलौती बेटी के शव पर डाल दिया।

बुधवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद ही शव परिजनों के सपुर्द कर दिया जाएगा। बाप दामोदार के सामने सबसे बड़ी मुश्किल आ पड़ी है कि वह कैसे बेटी का शव घर तक पहुंचाएगा। उसके पास बेटी के शव घर तक पहुंचाने के लिए पैसे तक नहीं है।

लाचार बाप ने कहा कि उसकी बेटी की मौत शाम करीब साढ़े पांच बजे हुई, लेकिन जब देर शाम तक लाश पर किसी ने सफेद कफन नहीं ओढ़ाया तो उसने कंबल को कफन बना कर बेटी पर ओढ़ दिया। बेटी की मौत के बाद काफी लोग सहानुभूति जताने तो पहुंचे लेकिन कफन के लिए किसी ने नहीं पूछा।

बहन से महरूम हो गए तीन भाई

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एकतरफा इश्क के जनून ने तीन भाइयों की इकलौती बहन बेगमा को हमेशा के लिए उनसे जुदा कर दिया। अब भाईयों की कलाई भी बिना राखी के सूनी रहेगी। बेगमा की मौत से देर शाम तक गांव दुंदला (थाची) में परिजन और गांव के लोग बेखबर थे।

मंगलवार देर शाम तक बेगमा की मौत से बेखबर परिजन उसकी सलामती के लिए दुहा मांगते रहे। अपनी बहन की सलामती के लिए भाई रोजाना अभिभावकों से जानकारी ले रहे थे। लेकिन चार दिन तक जिंदगी और मौत के बीच झूलने के बाद बेगमा की मौत से बेखबर भाई मंगलवार को भी उसकी वापसी का इंतजार करते रहे।

परिजनों को यही सूचना दी कि बेगमा को आईजीएमसी से पीजीआई रेफर किया गया। इसके लिए चचेरा भाई रामलाल भी घर से शिमला के लिए रवाना होने के लिए तैयार था। चार भाई-बहनों में बेगमा दूसरे नंबर पर थी। बेगमा का एक बड़ा और दो छोटे भाई हैं।

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