फर्जी डिग्री मामले में मानव भारती विवि की रजिस्ट्रार गिरफ्तार
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फर्जी डिग्री मामले में मानव भारती विवि की रजिस्ट्रार अनुपमा को सोलन पुलिस ने कैंपस में दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने यह कार्रवाई अग्रिम जमानत याचिका रद्द होने के बाद की है। विवि के मालिक राजकुमार राणा ने सोलन कोर्ट में दाखिल अग्रिम जमानत याचिका वकील के माध्यम से वापस ले ली है। राणा को पुलिस तलाश रही है।
विवि के मालिक और रजिस्ट्रार दोनों याचिकाओं पर शुक्रवार को अतिरिक्त सत्र एवं जिला न्यायाधीश कोर्ट में सुनवाई हुई। राजकुमार राणा के वकील ने अग्रिम जमानत याचिका वापस लेने की बात कही, जिसे जज ने स्वीकार कर लिया। अनुपमा की ओर से याचिका वापस लेने के बारे में कोई दलील नहीं दी गई। इसके बाद कोर्ट ने याचिका खारिज करने का फैसला दिया।
याचिका खारिज होने के बाद पुलिस सक्रिय हुई और मामले में तीसरी गिरफ्तारी की। अब राजकुमार राणा की गिरफ्तारी को लेकर हरियाणा, राजस्थान समेत देश के अन्य राज्यों में संदिग्ध ठिकानों पर छापामारी की जा सकती है। पुलिस कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रही थी। पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव ने बताया कि रजिस्ट्रार को गिरफ्तार कर लिया है जबकि मालिक की तलाश की जा रही है।
गिरफ्तार आरोपियों को तीन दिन की पुलिस रिमांड
फर्जी डिग्री प्रकरण में गिरफ्तार मानव भारती के दोनों कर्मचारियों को पुलिस ने शुक्रवार को सीजेएम राजेश चौहान के समक्ष पेश किया। उन्होंने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद असिस्टेंट रजिस्ट्रार मनीष गोयल निवासी मोहाली व डाटा ऑपरेटर करनाल निवासी प्रमोद कुमार को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा। पुलिस ने आरोपियों के लिए पांच दिन की रिमांड मांगी थी।
पुलिस को राजस्थान की माधव विवि से कुछ और बरामदगी की संभावना है, लेकिन कोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद तीन दिन की रिमांड का फैसला किया। पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव ने कहा कि पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ करेगी। राजस्थान व मानव भारतीय से मान्यता प्राप्त संस्थानों की भी पड़ताल करेगी।
पांच लाख डिग्रियां बेचना चिंतनीय : शांता
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की ओर से फर्जी डिग्रियों की जांच शुरू करवाने पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने उन्हें बधाई दी है। शांता का कहना है कि मुख्यमंत्री ने गंभीरता से कुछ विश्वविद्यालयों की ओर से डिग्रियां बेचने के मामले में जांच शुरू करवा दी है। यूजीसी के अनुसार पिछले सात सालों से पांच लाख डिग्रियां बेचने की बात चिंता का विषय है।
डिग्रियां सात साल से बिक रही थीं और 2017 में इस संबंध में कुछ शिकायतें भी हुई थीं। जबकि उस समय प्रदेश के सचिव शिक्षा ने इसकी लिखित रूप से पुलिस को रिपोर्ट भी की थी। शिकायतें आने के बाद भी सरकार के सोयी रही। प्रदेश में 22 विश्वविद्यालय हैं। एक जिले में आठ और एक पंचायत में तीन। भारत में कहीं भी एक जिले और एक पंचायत में इतने विवि नहीं होंगे। छोटे से प्रदेश में 60 नर्सिंग कालेज हैं। 70 के करीब बीएड कॉलेज हैं।