बागवान वैज्ञानिक सलाह से ही करें बगीचों का उचित प्रबंधन
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प्रदेश के बागवान वैज्ञानिक सलाह से ही बगीचों का उपयुक्त समय पर उचित प्रबंधन करें। वैज्ञानिक की राय लेकर ही वैज्ञानिक विधि से तौलिये तैयार करें। बागवान अगर तौलिया बनाने में थोड़ी भी कोताही करेंगे तो बगीचों को क्षति पहुंचेगी।
इससे फल उत्पादन पर विपरीत असर पड़ सकता है। बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि सेब बगीचों में तौलिये बनाने में सावधानी बरतें और पेड़ों की सुरक्षा का खास ख्याल रखें। तौलिये बनाते समय ध्यान रखें कि पेड़ों की मुख्य जड़ों को नुकसान न पहुंचे।
सेब के पेड़ के आसपास तीन फुट की दूरी बनाकर खुदाई करें। पेड़ों के साथ मुख्य जड़ें रहती हैं और अगर बागवान खुदाई गहरी करते हैं तो इससे पेड़ों को क्षति पहुंचने की आशंका बनी रहती हैं। ऐसा करने से पेड़ों तक खाद आसानी से पहुंच पाएगी।
तौलिये बनाने का काम पूरा इस माह तक करें पूरा
राज्य के बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज कहते हैं कि दिसंबर और जनवरी में सेब बगीचों में तौलिये बनाने का काम पूरा कर सकते हैं। तौलिये पेड़ से तीन फुट की दूरी पर बनाए जाएं।
इससे पेड़ों की जड़ों को नुकसान होेने से बचा सकते हैं। बगीचों में पूरी नमी उत्पन्न होने के बाद खाद डालने का काम करें। बगीचों में नमी नहीं है तो खाद न डालें। ऐसे समय में खाद डालना पौधों के लिए घातक होता है।
बारिश और बर्फबारी होने के तुरंत बाद भी बगीचों में खाद न डालें। बगीचों में प्रति पेड़ 2 किलो सुपर फास्फेट या चालीस किलो गोबर की गली सड़ी खाद उपयोग में लाएं। देसी खाद लंबे समय तक बगीचों में नमी बनाने में सहायक रहती है।