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Shimla News: मैगी में कीड़े निकलने के दावे पर निजी कंपनी को बड़ी राहत

Thu, 17 Sep 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 17 Sep 2026 11:59 PM IST
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Major relief for private company regarding claims of worms found in Maggi.
आयोग ने खारिज की उपभोक्ता की अपील
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मैगी में कीड़े और लार्वा मिलने का किया था दावा
रुचि सांख्यान
शिमला। मैगी नूडल्स में कीड़े और लार्वा निकलने के मामले में राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने नेस्ले इंडिया लिमिटेड के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उपभोक्ता की अपील खारिज कर दी है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि जब तक उत्पाद की किसी प्रयोगशाला से रासायनिक या फॉरेंसिक जांच नहीं करवाई जाती और खरीद का पक्का बिल पेश नहीं किया जाता तब तक केवल तस्वीरों तथा वीडियो के आधार पर कंपनी की सेवा में कोई कमी या मैन्युफैक्चरिंग दोष साबित नहीं किया जा सकता। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंद्र सिंह मेहता और सदस्य योगिता दत्ता की पीठ ने जिला उपभोक्ता आयोग, कांगड़ा (धर्मशाला) के फैसले को सही ठहराते हुए यह आदेश पारित किया।
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धर्मशाला निवासी आशिमा कालरा ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि उन्होंने 5 अक्तूबर 2022 को स्थानीय स्टोर से 54 रुपये में मैगी के दो डबल पैक खरीदे थे। इनका आरोप था कि पकाते समय नूडल्स में कीड़े और लार्वा तैरते दिखाई दिए। उन्होंने 10 अक्तूबर 2022 को कंपनी को ईमेल भेजकर फोटो तथा वीडियो संलग्न किए। उपभोक्ता का कहना था कि उचित कार्रवाई करने के बजाय कंपनी ने जनवरी 2024 में उन्हें गिफ्ट हैंपर भेज दिया। इसके बाद उन्होंने सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया था। नेस्ले इंडिया ने आयोग के समक्ष दलील दी कि उत्पाद सीलबंद पैकेट में भंडारण के उचित दिशा-निर्देशों के साथ आता है। फैक्ट्री से निकलने के बाद दुकानदार या ग्राहक इसे कैसे स्टोर करते हैं, इस पर कंपनी का कोई नियंत्रण नहीं रहता। कंपनी ने तर्क दिया कि उपभोक्ता ने न तो दुकान का बिल प्रस्तुत किया और न ही विवादित पैकेट को किसी सक्षम प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा।
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इस आधार पर खारिज हुई अपील

उपभोक्ता यह साबित करने के लिए कोई पक्का बिल या इनवॉयस पेश नहीं कर पाईं कि मैगी उक्त दुकान से ही खरीदी गई थी। दुकान से मैगी खरीदी गई, उसके संचालक को न तो पार्टी बनाया गया और न ही गवाह के तौर पर पेश किया गया। मैगी के नमूनों की कोई फॉरेंसिक या केमिकल जांच नहीं करवाई थी। वैज्ञानिक रिपोर्ट के बिना यह तय नहीं किया जा सकता कि खराबी उत्पादन के दौरान आई थी या बाद में। ने कहा कि विशेषज्ञ राय के अभाव में सिर्फ मोबाइल से लिए गए फोटो और वीडियो यह सिद्ध करने के लिए नाकाफी हैं कि उत्पाद खरीदते समय ही दूषित था।
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