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निजी विवि में गड़बड़झाला, स्टेट कोटे में दाखिला देने से इनकार

Wed, 07 Sep 2016 11:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन/धर्मशाला
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन/धर्मशाला Updated Wed, 07 Sep 2016 11:17 AM IST
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Maharishi Markandeshwar Uni MM Medical College did not giving admissions to NEET qualified students

प्रदेश के एक निजी मेडिकल कालेज में एमबीबीएस की 150 सीटों की एडिमशन को लेकर संशय की स्थिति बनी है। कोर्ट के निर्देशों के बाद प्रदेश विवि में निजी और प्राइवेट कालेजों की काउंसलिंग हो चुकी है। लेकिन एमएमयू में काउंसलिंग के बाद भी एडमिशन देने में आनाकानी हो रही है। सूचना है कि सोमवार को देर शाम तक कुछ अभिभावक एडमिशन के लिए एमएमयू कालेज में मौजूद रहे, लेकिन एडमिशन नहीं हो सकी है।

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ऐसे में स्टूडेंटस  को एक साल खराब होने की चिंता सता रही है। वहीं, मेडिकल कालेज की मनमानी पर कुछ अभ्यर्थियों व अभिभावकों ने लाखों रुपये के कथित गबन की मंशा से स्टेट कोटे के आधार पर एडमिशन न देने का आरोप लगाया है। आरोप हैं कि नीट के आधार पर स्टेट कोटे में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से अभ्यर्थी अथॉरिटी लेटर लेकर इस निजी विश्वविद्यालय में एडमिशन लेने के लिए जा रहे हैं। लेकिन, छात्रों को विश्वविद्यालय में एडमिशन नहीं मिल रहा है।
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एचपीयू का अथॉरिटी लेटर लेकर एमबीबीएस करवाने वाले इस विश्वविद्यालय में एडमिशन लेने गए एक छात्र और उसके अभिभावकों ने अमर उजाला को निजी विवि के कथित गड़बड़झाले के बारे में बताया। बताया कि करीब 40 अभ्यर्थियों को इसी तरह स्टेट कोटे के आधार पर एडमिशन दिए बिना ही वापस लौटा दिया गया है। अभिभावकों ने बताया कि इस संबंध में वे बुधवार को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को निजी विश्वविद्यालय के खिलाफ लिखित शिकायत भी सौंपेंगे।
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निजी विवि में एडमिशन लेने गए सुब्रत, अभिभावक रजनीश राणा के अलावा कई ने आरोप लगाया कि निजी विवि प्रशासन ने उन्हें यह कहकर एडमिशन नहीं दी है कि उन्होंने पूर्व में ही हायर अथॉरिटी को लिखित पत्र लिखकर एडमिशन न करने की सूचना दे दी थी, जबकि इसके बारे में विवि अभ्यर्थियों को लिखित में कुछ भी नहीं दे रही है।

अभ्यर्थियों का आरोप है कि निजी विवि प्रशासन आठ सितंबर के बाद मैनेजमेंट कोटे के आधार पर एमबीबीएस सीटों को भरने की फिराक में है। इसी का नतीजा है कि उन्हें एडमिशन नहीं दी जा रही है। अभिभावकों का यह भी आरोप है कि अथारिटी लेटर के आधार पर छात्र पांच लाख रुपये में एमबीबीएस कर सकेगा। जबकि, 8 सितंबर के बाद मैनेजमेंट कोटे से एमबीबीएस की यही सीट विश्वविद्यालय 75 लाख रुपये में देगा।


उधर इस संदर्भ में जब निजी मेडिकल कालेज प्रबंधन से बात करनी चाही तो किसी भी अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका। अधिकांश के मोबाइल स्विच आफ आ रहे थे। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर छात्रों के भविष्य से कतई खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। फिलहाल ऐसी कोई शिकायत हमारे पास नहीं आई है, अगर आती है तो इसकी जांच करवाई जाएगी।

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