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अंतिम जलेब के साथ मंडी शिवरात्रि महोत्सव संपन्न, लौटे देवी-देवता

Thu, 22 Feb 2018 10:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मंडी
अमर उजाला ब्यूरो, मंडी Updated Thu, 22 Feb 2018 10:33 AM IST
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Madho Rai Shobha Yatra Jaleb Mandi Shivratri 2018

देवी-देवताओं की विदाई के साथ सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव बुधवार को संपन्न हो गया। महोत्सव की तीसरी और अंतिम जलेब राज देवता माधो राय की अगुवाई में शाही अंदाज में निकली।

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जलेब में देव माधो राय की पालकी के साथ चुनिंदा देव रथ साथ चले। जलेब में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने भी शिरकत की। महोत्सव की अंतिम जलेब को देखने के लिए सड़क के दोनों तरफ लोगों की भीड़ उमड़ी रही।
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इस बार महोत्सव में 192 पंजीकृत देवी-देवता पहुंचे थे।  शिवरात्रि महोत्सव के समापन पर बुधवार को चौहटा की जातर के बाद दोपहर एक बजे के बाद जलेब शुरू हुई।

राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने राज देवता माधो राय और आराध्य देव बाबा भूतनाथ मंदिर में पूजा अर्चना की। इसके बाद पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर जलेब धूमधाम से चौहटा, मोती बाजार, समखेतर, बालकरूपी, भूतनाथ बाजार होते हुए पड्डल ग्राउंड पहुंची।

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Madho Rai Shobha Yatra Jaleb Mandi Shivratri 2018

जलेब के आगे घुड़सवार पुलिस, बैंड, पुलिस जवान, महिला पुलिस मार्च करते हुए चले। देवता छाजणू और छमांहू जलेब में सबसे आगे रहे।

कोटलू घटोत्कच, देव कोटलू, देव विष्णु मतलोड़ा, देव मगरू महादेव, बायला नारायण, सराज घाटी के देव बिट्ठू नारायण, लक्ष्मी नारायण, तुंगासी ब्रह्मदेव, महामाया निहरी, अंबिका नाऊ, राज देवता माधो राय की पालकी, शुकदेव थट्टा, चौहार घाटी के बड़ोदेया हुरंग नारायण, देव पशाकोट, देव घड़ौनी नारायण, देव पेखर का गैहरी आदि देवता भी जलेब में साथ चले। दे

व रथों के साथ ढोल, नगाड़े, शहनाई, रणसिंगों की धुनों पर देवलुओं ने नाचते-गाते जलेब की शोभा बढ़ाई।

मानवता में विश्वास के प्रतीक हैं मेले, महोत्सव: राज्यपाल
अंतर्राष्ट्रीय महाशिवरात्रि उत्सव में शिरकत करने के बाद राज्यपाल देवव्रत आचार्य ने समापन समारोह में कहा कि हम हिमाचल के लोग देव संस्कृति के उच्च मूल्यों का सम्मान करते हैं क्योंकि यह राज्य की उन्नति में मदद करते हैं। आचार्य देवव्रत ने कहा कि भगवान शिव मानवता के कल्याण के प्रतीक हैं और भगवान शिव के नाम पर हर वर्ष मनाया जाने वाला यह महोत्सव मानवता में हमारे विश्वास को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि हमें देव संस्कृति के नाम पर बुराइयों तथा गलत परंपराओं को नहीं अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिवरात्रि भगवान शिव का त्योहार है और उन्होंने ही पहली बार योग को मानवता के लिए प्रचारित किया था। उन्होंने कहा कि त्रिशूल समाज में बुरे तत्वों के विनाश का प्रतीक है।

उन्होंने विश्व के कल्याण का संदेश दिया, लेकिन दुर्भाग्यवश तथाकथित कुछ धार्मिक लोग इसको अन्यथा परिभाषित करते हैं। मेले और त्यौहार अपने आप में अनूठे हैं और राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रखने के उद्देश्य से मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि इन उत्सवों के दौरान रीति-रिवाजों के समृद्ध रंगों को खुशहाली के लिए संरक्षित करना चाहिए क्योंकि इनसे हमारी पहचान एक महान राज्य एवं राष्ट्र के रूप में होती है।

उन्होंने कहा कि समाज से सामाजिक बुराइयों का उन्मूलन करना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। उन्होंने युवाओं से समृद्ध संस्कृति का सम्मान करने तथा इसे आगे बढ़ाने का आह्वान किया। इससे पूर्व, आचार्य देवव्रत ने माधोराय मंदिर में पूजा-अर्चना की और जलेब शोभा यात्रा में भी भाग लिया।

राज्यपाल ने विभिन्न विभागों तथा संगठनों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनियों का दौरा किया और प्रदर्शित किए गए उत्पादों में गहरी रूचि दिखाई। मंडी के उपायुक्त एवं मेला समिति के अध्यक्ष ऋग्वेद ठाकुर ने राज्यपाल का स्वागत किया और उत्सव के पिछले सात दिनों के दौरान आयोजित की गई विभिन्न गतिविधियों का ब्यौरा दिया। उन्होंने इस अवसर पर राज्यपाल को सम्मानित भी किया।

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