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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Maa Shoolini Fair: In the Thodo Maidan of Solan there was a lot of arrows between the Pashi and Shathi parties

Maa Shoolini Fair: सोलन के ठोडो मैदान में पाशी और शाठी दलों के बीच खूब चले तीर

Sat, 25 Jun 2022 11:14 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन Published by: Krishan Singh Updated Sat, 25 Jun 2022 11:14 PM IST
सार

सोलन में मां शूलिनी मेले के दौरान शनिवार को इस नृत्य का ठोडो मैदान में प्रदर्शन किया गया। इसे देखने के लिए भारी संख्या में लोग उमड़े। विशेष लिबास पहने ठोडा के खिलाड़ियों ने न सिर्फ विरोधी आक्रमण को झेला बल्कि धनुष और बाण से उसका जवाब भी दिया।

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Maa Shoolini Fair: In the Thodo Maidan of Solan there was a lot of arrows between the Pashi and Shathi parties
ठोडा नृत्य व खेल। - फोटो : संवाद

विस्तार

महाभारत काल की युद्ध शैली को सोलन, सिरमौर समेत शिमला के दूरदराज के ग्रामीणों ने ठोडा नृत्य के रूप में जीवंत रखा है। सोलन में मां शूलिनी मेले के दौरान शनिवार को इस नृत्य का ठोडो मैदान में प्रदर्शन किया गया। इसे देखने के लिए भारी संख्या में लोग उमड़े। विशेष लिबास पहने ठोडा के खिलाड़ियों ने न सिर्फ विरोधी आक्रमण को झेला बल्कि धनुष और बाण से उसका जवाब भी दिया। ठोडा नृत्य के इस युद्ध में थककर बाहर होने वाले को पराजित माना जाता है। हालांकि इस बार ठोडा नृत्य की प्रतियोगिता नहीं करवाई गई। सिर्फ शगुन के तौर पर खेल को चार टीमों के बीच खेला गया। इनमें ठोडा दल पीरन से चुन्नीलाल, चौपाल से धनीराम, सिरमौर से नेत्र नेगी, डिब्बर ढरोल से लक्ष्मी सिंह की टीम ने भाग लिया। इस मौके पर प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी सदस्य तरसेम भारती ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। 

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जानकारी के अनुसार जैसे ही खिलाड़ी मैदान में पहुंचे तो ठोडो नृत्य और खेल में रुचि रखने वाले लोगों की भीड़ मैदान में जुट गई। घुटने से नीचे तीर मारने का खेल खेला गया। ठोडो नृत्य के अध्यक्ष नेत्र सिंह ने बताया कि तीर कमान के इस खेल में पाशी और शाठी दो दल एक दूसरे के खिलाफ खेलते हैं। यह खेल सतयुग से खेला जा रहा है। पहले यह युद्ध शैली थी जो अब खेल का रूप ले चुका है। इस खेल में प्रयोग किए जाने वाले तीर विशेष चांव की लकड़ी से बनते हैं। इसमें हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों के पास तीर कमान, ढांगरू, सिलारा, डागरा और चमड़े का जूता पहना जाता है। खेल में पैर पर तीर मारने पर फाउल माना जाता है। इस दौरान मैदान में खिलाड़ियों में ठोडा खेलने के लिए काफी उत्साह रहा। पूरा दिन ठोडा खेल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। इस मौके पर ठोडा नृत्य के सचिव चंद्रकात, कोषाध्यक्ष कांति स्वरूप और प्रेस सचिव मुकेश गुप्ता मौजूद रहे।

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मां शूलिनी और बहन के दर्शन के लिए उमड़ा जन सैलाब

वहीं अधिष्ठात्री मां शूलिनी और बहन के दर्शन करने के लिए गंज बाजार स्थित मंदिर में लोगों की कतारें लगी रहीं। शनिवार को सुबह से दोनों बहनों के दर्शन करने के लिए लोग काफी उत्साहित दिखे। मंदिर परिसर में लोगों की दिन भर सैकड़ों लोगों की भीड़ उमड़ी रही। पूजा-अर्चना के बाद शनिवार को 12:00 बजे दोनों बहनों को भोग लगाया गया। उसके बाद फिर से श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दर्शनों के लिए लग गईं। इससे पहले मां शूलिनी शुक्रवार देर रात करीब 11:35 पर गंज बाजार बहन के पास पहुंची थीं। इसके बाद विधिवत पूजा-अर्चना की गई। गंज बाजार में सुरक्षा की दृष्टि से कड़े इंतजाम किए गए थे। 

मां शूलिनी की पालकी में शुक्रवार को अपनी बहन से मिलने के लिए निकलीं। इसी के साथ राज्य स्तरीय मेले का भी शुभारंभ हुआ। मां की पालकी को पूरे शहर का भ्रमण करवाया और देर रात मां शूलिनी अपनी बहन के पास पहुंची। दो दिन रुकने के बाद रविवार को करीब रात 10:00 बजे अपने मंदिर वापस जाएंगी। मेले के दूसरे दिन माता के दर्शन के लिए दूर दराज क्षेत्रों से लोग पहुंचे। इन्होंने दिन भर लंबी कतारों में लगकर मां के दर्शन किए और दोनों बहनों का आशीर्वाद लिया। रविवार को मां वापस अपने मंदिर चली जाएंगी।

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