Lok Sabha Elections: इस बार 80 नहीं, 85 वर्ष से अधिक आयु के मतदाता ही घर से दे सकेंगे वोट
अब तक 80 वर्ष से अधिक के मतदाता घर से मतदान कर सकते थे, लेकिन अब 85 वर्ष से अधिक के मतदाता ही घर से वोट कर सकेंगे।
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बुजुर्गों को घर से ही मतदान की सुविधा के नियम में इस बार केंद्रीय चुनाव आयोग ने बदलाव किया है। अब तक 80 वर्ष से अधिक के मतदाता घर से मतदान कर सकते थे, लेकिन अब 85 वर्ष से अधिक के मतदाता ही घर से वोट कर सकेंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनीष गर्ग ने बताया कि प्रदेश में 80 से अधिक आयु वर्ग के एक लाख 9 हजार 813 मतदाता हैं। इनमें से उन्हीं मतदाताओं को घर से वोट डालने की सुविधा मिलेगी, जिनकी आयु 85 वर्ष से अधिक है।
ऐसे मतदाताओं को निर्वाचन कार्यालय में अनुरोध भेजना पड़ेगा। ऐसे वोटरों को बीएलओ से 12-डी फार्म भरवाना होगा। भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट से भी फॉर्म 12 डी डाउनलोड किया जा सकता है। अनुमति मिलने पर मतदानकर्मी उनके घर जाकर पोस्टल बैलेट के जरिये मतदान करवाएंगे। खास बात यह है कि घर से होने वाले मतदान की जानकारी संबंधित क्षेत्र के राजनीतिक दलों को भी दी जाती है, ताकि वह मतदान प्रक्रिया को देख सकें।
2019 में मिली थी घर बैठे मतदान की सुविधा
80 साल से ऊपर के बुजुर्गों को घर बैठे मतदान करने की सुविधा 2019 में मिली थी। इसके बाद कई बुजुर्ग मतदाताओं ने सुविधा का लाभ लिया। हालांकि कुछ बुजुर्ग मतदाता खुद मतदान केंद्र जाकर वोट डालने को प्राथमिकता देते हैं। चुनाव आयोग ने निर्देश दिए हैं कि मतदान प्रक्रिया में सेवाएं देने वाले लोगों को भी पोस्टल बैलेट के जरिये मतदान का अधिकार होगा और वह मतदाता केंद्र से पोस्टल बैलेट के जरिये मतदान कर पाएंगे।
अब सादे प्रचार का दौर नहीं, नेता और वोटर दोनों चालाक
हमीरपुर जिले के अणु निवासी 102 वर्षीय जफर राम का कहना है कि अब चुनाव का दौर बदल चुका है। प्रचार करने के तरीके बदल गए हैं। अब नेता के साथ वोटर भी चालाक है। पहले सार्वजनिक कार्यों और समाज के हितैषी नेता को देखकर वोट करते थे। अब व्यक्तिगत कार्यों को तवज्जो दी जा रही है। पहले वाला सादा प्रचार-प्रसार भी अब नहीं है। अब आबादी भी बढ़ गई है और राजनीतिक दल भी बढ़ गए हैं। लगभग हर चुनाव में वोट डाला है। इस उम्र में भी मतदान केंद्र तक वोट डालने के लिए पैदल जाता हूं।
अब वोट डालने को लेकर पहले की तरह लोगों में आपसी चर्चा नहीं होती है। मतदान से पहले गांव में चौपाल सजती थी और लोग आपस में गपशप करते थे। चुनाव में मतदान को लेकर भी चर्चा होती थी। परिवार और गांव एक होकर वोटिंग के लिए निर्णय लेते थे। अब बदलते दौर में एक परिवार में ही अलग-अलग पार्टियों व नेताओं को वोट डाले जा रहे हैं। परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे के वोट के बारे में मालूम नहीं होता है। कौन किसे वोट दे रहा है, यह अब कम ही साझा किया जाता है। पहले वोट की चर्चा खुलेपन में होती थी।