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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Bilaspur News ›   Lok Sabha Elections: The arena has started getting decorated in Himachal...the drum is about to be played.

Lok Sabha Elections: हिमाचल में सजने लगा अखाड़ा ...बस बजने को है नगाड़ा

Mon, 11 Mar 2024 02:06 PM IST
Krishan Singh अनिमेष कौशल, शिमला
अनिमेष कौशल, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 11 Mar 2024 02:06 PM IST
सार

हिमाचल में लोकसभा चुनाव के लिए दो मुख्य दलों भाजपा-कांग्रेस के अलावा राज्य निर्वाचन आयोग ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रदेश की चार सीटों के प्रत्याशियों को फाइनल करने की माथापच्ची जारी है।

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Lok Sabha Elections: The arena has started getting decorated in Himachal...the drum is about to be played.
सत्ता संग्राम 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच एक सियासी छिंज अभी रुकी नहीं है कि अब दूसरी महाछिंज (लोकसभा चुनाव)का नगाड़ा बजने वाला है। कांग्रेस में बगावत और इसे हवा देती भाजपा ने इस महाछिंज के अखाड़े को ही बदल दिया है। हालांकि अभी प्रमुख पहलवान (प्रत्याशी) तय नहीं हैं। यानी पहले से ही चल रही सरकार गिराने और बचाने की कशमकश के बीच भाजपा और कांग्रेस दोनों के ही उम्मीदवार अभी तय नहीं हो पाए हैं। पर दोनों दल कठोर कसरत कर रहे हैं। पिछले दो आम चुनाव में कांग्रेस को चारों खाने चित कर चुकी भाजपा हैट्रिक लगाने की हुंकार भर चुकी है।

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सवा दो साल पहले उपचुनाव में कांग्रेस ने भाजपा से मंडी की सीट झटककर प्रतिभा सिंह को अकेला सांसद बनाया जरूर था, पर बदले माहौल में अंतर्कलह से जूझती कांग्रेस के पास चारों सीटों पर इसी दमखम को बनाए रखना पहाड़ जैसी चुनौती है। गृह राज्य होने के चलते भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ प्रादेशिक नेताओं के लिए भी यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल है। कांग्रेस के घर में फूट पड़ने के बाद सीएम सुक्खू और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह की भी कड़ी परीक्षा है, विशेषकर जब 6 विधायक अपनी सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के खिलाफ बगावत कर इसे संकट में डालने से भी नहीं हिचके।
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तीन सीटों हमीरपुर, कांगड़ा और शिमला में भाजपा का परचम है। भाजपा को इसे लहराए रखने के लिए सत्तारूढ़ दल कांग्रेस से दो-चार होना होगा। कांग्रेस की अकेली मंडी सीट पूर्व सीएम जयराम का भी प्रभाव क्षेत्र है। राज्यसभा की जीती-जिताई सीट को बहुमत होने के बावजूद बगावत और लापरवाही से गंवा चुकी कांग्रेस को मंडी के किले को बचाए रखना है, वहीं अन्य सीटों पर भी खाता खोलना होगा। भाजपा के सामने अपने तीनों दुर्गों को बचाकर मंडी को हासिल करने का लक्ष्य होगा। 

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कांग्रेस : बागियों से निपटी तो ही अचूक रणनीति पर काम कर पाएगी  
चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बागी हैं। पार्टी के छह विधायक कांग्रेस के प्रत्याशी को राज्य सभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग से हरा उत्तराखंड में पड़ाव डालकर  कांग्रेस की परेशानी बने हैं। हरियाणा के बाद उन्होंने उत्तराखंड में भाजपाशासित राज्य में पनाह ली है। वहीं, वर्ष 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने शिमला, मंडी और कांगड़ा में जीत दर्ज की। हमीरपुर में हार हुई। वर्ष 2009, 2014 और 2019 के चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन लगातार कमजोर होता रहा। वर्ष 2019 में कांग्रेस चारों सीटें हारी। 2021 में उपचुनाव में मंडी में प्रतिभा सिंह ने जीत दर्ज की। वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा ने चारों सीटों पर जीत दर्ज की।

भाजपा : मोदी के करिश्मे, राम मंदिर और कांग्रेस की फूट से बंधी आस
भाजपा को हिमाचल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर करिश्मे की आस है। भाजपा को यह उम्मीद है कि पिछले दो आम चुनाव में जिस तरह मोदी फैक्टर ने काम किया, ठीक वैसे ही इस बार भी करेगा। भाजपा मोदी की नीतियों और योजनाओं को गिनाते हुए फील्ड में उतर चुकी है। वहीं, इसके निशाने पर आपसी फूट से जूझती सुक्खू सरकार है। भाजपा को एक आस यह भी है कि राम मंदिर का मुद्दा भी देवभूमि में काम कर सकता है। आदर्श चुनाव आचार संहिता लगने से पहले केंद्र ने प्रदेश में उद्घाटन और शिलान्यास की झड़ियां लगा दी हैं। भाजपा यहां कांग्रेस के बागियों को टिकट देकर मैदान में उतारने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। कांग्रेस नेताओं को तोड़कर अपने साथ मिला लाने की रणनीति पर भी विचार-मंथन कर रही है।

कांग्रेस और भाजपा के अलावा तीसरा कोई नहीं
इस चुनावी कुश्ती में कांग्रेस और भाजपा के अलावा कोई तीसरा बड़ा पहलवान नजर नहीं आ रहा है। पिछले कई दशकों की बात करें तो हिविकांं के गठबंधन से 1998 में भाजपा की सरकार बनने के बाद 1999 में धनीराम शांडिल शिमला लोकसभा सीट से गठबंधन के बाद हिविकां से सांसद बने। उसके बाद हिविकां अपना वजूद खो गई तो यह बात साफ हो गई कि यहां पर द्विदलीय प्रणाली ही जनता की पसंद है। लोकसभा चुनाव के दौरान हिमाचल प्रदेश में अन्य दलों में सिर्फ जनता पार्टी और हिमाचल विकास कांग्रेस को एक-एक बार जीत मिली। इसके अलावा वर्ष 1977 में मंडी सीट से जनता पार्टी के प्रत्याशी गंगा सिंह जीते। 

2004 से कमजोर होता गया कांग्रेस का प्रदर्शन
वर्ष 2004 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने शिमला, मंडी और कांगड़ा सीट पर जीत दर्ज की। हमीरपुर में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। 2009, 2014 और 2019 में कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर होता गया। वर्ष 2019 के चुनाव में कांग्रेस चारों सीटें हारी थीं। 2021 में हुए उपचुनाव के दौरान प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद प्रतिभा सिंह ने जीत दर्ज कर मंडी संसदीय सीट को कांग्रेस की झोली में डाला। वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा ने चारों सीटों पर जीत दर्ज की थी। 2009 में भाजपा तीन सीटें जीती थीं। कांग्रेस को सिर्फ सीट मंडी में जीत नसीब हुई थी। मंडी से वीरभद्र सिंह चुनाव जीते थे।

जनता पार्टी-हिविकां को मिली एक-एक बार जीत  
लोकसभा चुनाव में प्रदेश में अन्य दलों में सिर्फ जनता पार्टी और हिमाचल विकास कांग्रेस को एक-एक बार जीत मिली है। शेष लोकसभा चुनावों में कांग्रेस या भाजपा के प्रत्याशियों ने ही जीत दर्ज की है। हिमाचल में आम आदमी पार्टी, बसपा, सपा, माकपा ने भी कुछ लोकसभा चुनावों में अपने-अपने प्रत्याशी उतारे।

पहाड़ में चुुनौती से कम नहीं चुनाव करवाना  
हिमाचल में इस चुनाव में नेताओं और पार्टियों की ही नहीं, मतदाताओं की भी परीक्षा होगी। अभी भी कई क्षेत्र बर्फ से लकदक हैं जहां मई में बर्फ पिघलती है। प्रदेश में 20 मतदान केंद्र 12,000 फुट की ऊंचाई स्थापित होते हैं। 65 मतदान केंद्र ऐसे हैं जो 10,000 से 12,000 फुट की ऊंचाई पर बनाए जाते हैं। इन मतदान केंद्रों तक बुजुर्गों, दिव्यांगों का पैदल पहुंचना आसान नहीं होता। राज्य निर्वाचन विभाग में पिछली बार से मतदान प्रतिशतता बढ़ाने के लिए अभियान शुरू कर दिए हैं। 

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