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लोकसभा चुनाव मुद्दा: हिमाचल में आपदा के जख्मों पर मरहम कम, सियासत ज्यादा

Sat, 16 Mar 2024 01:47 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 16 Mar 2024 01:47 PM IST
सार

 बीते साल मानसून में आपदा ने खूब कहर बरपाया। जख्म इतने गहरे हैं कि अभी तक भर नहीं पाए हैं। आपदा के जख्मों पर मरहम कम और सियासत ज्यादा हो रही है। 

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Lok Sabha election issue: There is less ointment on the wounds of disaster in Himachal, more politics
हिमाचल की आपदा - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में बीते साल मानसून में आपदा ने खूब कहर बरपाया। जख्म इतने गहरे हैं कि अभी तक भर नहीं पाए हैं। आपदा के जख्मों पर मरहम कम और सियासत ज्यादा हो रही है। कांग्रेस सरकार शुरू से ही केंद्र को राहत न मिलने, केंद्रीय आपदा घोषित न करने और अनदेखी पर घेर रही है। भाजपा राहत राशि के आवंटन में बंदरबांट व गड़बड़ी के आरोप लगा रही है। लोकसभा चुनाव में आपदा राहत बड़ा मुद्दा बनेगी। साल 2023 में मानसून के बादल कहर बनकर बरसे। आपदा में 400 लोगों की जान चली गई। हजारों लोग बेघर हो गए। राज्य का आधारभूत ढांचा तहस-नहस हो गया। पर्यटन कारोबार बुरी तरह ठप हो गया। हजारों लोग बेरोजगार हो गए। देवभूमि के लिए यह सदी की सबसे बड़ी त्रासदी थी। 

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राज्य सरकार ने आपदा प्रभावित राज्य घोषित कर अपने संसाधनों से 4500 करोड़ का राहत पैकेज जारी किया। अब आठ महीने बाद भी आपदा प्रभावितों के लिए किए तमाम प्रयास नाकाफी हैं। केंद्र सरकार से भी कई मदों में मदद जरूर आती रही, लेकिन राज्य सरकार इसे अपर्याप्त बताती रही। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर कह चुके हैं कि जिस तरह से आपदा राहत बांटने में बड़ा घोटाला हुआ है।  मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू बार-बार दोहरा रहे हैं कि आपदा में केंद्र ने हिमाचल के हितों की अनदेखी की है। भाजपा सांसदों पर निशाना साधते रहे कि राज्य के हक का मामला केंद्र के समक्ष नहीं उठाया गया। 

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कांग्रेस
प्रदेश के लोग जब आपदा से जूझ रहे थे, भाजपा नेता राजनीति में व्यस्त थे। लोकसभा चुनाव में प्रदेश की जनता भाजपा प्रत्याशियों से पूछेगी कि आपदा को लेकर प्रधानमंत्री से कब राशि देने का मुद्दा उठाया। भाजपा केंद्रीय मदद के झूठे दावे करती आई है। अगर दावों में सच्चाई है तो केंद्र से जारी राशि को लेकर श्वेत पत्र लाए। प्रभावितों को सरकार की ओर से जो राहत राशि दी गई है, उसका पूरा हिसाब देने को हम तैयार हैं। - देवेंद्र बुशैहरी, प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस

भाजपा
कांग्रेस ने राहत पैकेज बांटने के नाम पर भाई-भतीजावाद किया। जनता जानती है कि आपदा प्रभावितों के स्थान पर कांग्रेस ने पार्टी कार्यकर्ताओं को पैसा बांटा। केंद्र ने हिमाचल को आपदा राहत के लिए 1782 करोड़ जारी किए हैं। पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद जेपी नड्डा ने आपदा प्रभावित जिलों के दो बार दौरे किए। दोनों बार 300-300 करोड़ की किस्त लेकर आए। प्रियंका गांधी ने शिमला में घर होने के बावजूद सुध नहीं ली। - करण नंदा, प्रदेश मीडिया प्रभारी, भाजपा

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दलीय राजनीति से ऊपर उठना होगा : उपमन्यु
पर्यावरणविद कुलभूषण उपमन्यु का कहना है कि हिमालय के स्वरूप को बनाए रखना बेहद जरूरी है। सरकारों को दलीय राजनीति से ऊपर उठकर इसके लिए प्रयास करने होंगे। विकास के नाम पर अवैज्ञानिक तरीके से हो रहे निर्माण को रोकने की जरूरत है। हिमालय की नाजुकता को ध्यान में रखना जरूरी है। पर्यटन को बढ़ावा देना सही है लेकिन जो कचरा फैल रहा है। इसकी अनदेखी नहीं हो सकती। 

अनियोजित विकास रोकने को कदम उठाएं : चंदेल
पूर्व राजस्व सचिव आईएस चंदेल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान से बचाव के लिए सस्टेनेबल डेवलपमेंट जरूरी है। वक्र रेखाओं की तरह बेतरतीब सड़कें बन रही हैं। सड़क बनाने के लिए डंगे पहले लगने चाहिए। सरकारों को प्रदेश में हो रहे अनियोजित विकास रोकने के लिए गंभीर कदम उठाने चाहिए। आपदा से बचाव के लिए अग्रिम बंदोबस्त होने चाहिए ताकि अगर आपदा आती है तो नुकसान को कम से कम किया जा सके।

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