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लोकसभा चुनाव 2019: सुधीर पीछे हटे; काजल आगे किए, बाली मौन

Sat, 30 Mar 2019 01:06 PM IST
अरविन्द ठाकुर सुनील चड्ढा, अमर उजाला, धर्मशाला
सुनील चड्ढा, अमर उजाला, धर्मशाला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 30 Mar 2019 01:06 PM IST
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lok sabha election 2019 Kangra seat candidate Sudhir Sharma Pawan Kajal and GS Bali
पवन काजल - फोटो : फाइल फोटो

नेताओं के आपसी द्वंद्व की वजह से हमेशा सीएम की कुर्सी से दूर रहने वाली कांगड़ा-चंबा संसदीय सीट से उम्मीदवार उतारने को लेकर कांग्रेस दुविधा से बाहर नहीं निकल पा रही है।

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भाजपा हाईकमान ने शांता कुमार का टिकट काट कर गद्दी नेता किशन कपूर पर जातीय कार्ड खेला है, जिसका कांग्रेस पिछले एक हफ्ते से तोड़ नहीं निकाल पा रही है। बीते दिन भी कांगड़ा सीट पर पेच फंसा रहा। विधानसभा चुनाव में हार के बाद बड़े नेता रिस्क लेने से बच रहे हैं। 
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सूत्रों के अनुसार टिकट के लिए शक्ति प्रदर्शन करने वाले सुधीर शर्मा ने अब सियासी माहौल भांप कर चुनावी मैदान से अचानक पांव पीछे खींच लिए हैं। सुधीर ने अपने मित्र पवन काजल को ओबीसी नेता के रूप में आगे कर दिया है। इससे इतर जीएस बाली मौन रहकर चुपचाप सियासी लकीर खींच रहे हैं।
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इसी बीच लोकसभा चुनाव न लड़ने की बात कहने वाले पवन काजल की दिल्ली में सुधीर खेमे की ओर से कांगड़ा सीट से पैरवी की जा रही है। काजल को गद्दी नेता किशन कपूर के खिलाफ ओबीसी कार्ड के रूप में उतारने को लेकर सियासी मंथन चल रहा है।

पवन काजल ने अमर उजाला से कहा कि अब हाईकमान ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए कहा तो वह जरूर लड़ेंगे। काजल के नाम पर भी सुधीर और बाली के बीच दिल्ली में शीत युद्ध गर्मी पैदा कर रहा है। 

कपूर के खिलाफ काजल उतरे तो होगा जातीय मुकाबला
भाजपा से किशन कपूर के रूप में खेले गए जातीय कार्ड को टक्कर देने के लिए कांग्रेस ओबीसी कार्ड खेलने के लिए विचार कर रही है क्योंकि जिला कांगड़ा में ओबीसी वोट बैंक करीब 25 से 30 फीसदी है। वर्ष 2004 में भी कांग्रेस ने ओबीसी नेता चंद्र कुमार को मैदान में उतारकर शांता कुमार को पटकनी दी थी।

ओबीसी और गद्दी कार्ड के समीकरण

कांगड़ा जिले में 13 में से बैजनाथ, धर्मशाला, शाहपुर, पालमपुर विस क्षेत्रों में गद्दी वोट बैंक का ज्यादा प्रभाव है। चंबा जिले के चारों भटियात, चंबा, चुराह, डलहौजी विस क्षेत्रों में करीब 55 से 70 फीसदी वोट बैंक गद्दी समुदाय से है। शांता को पिछली बार भटियात से 25000 वोट की लीड मिली थी।

कांगड़ा जिले में नगरोटा बगवां, कांगड़ा, शाहपुर, ज्वालाजी, धर्मशाला, जवाली में ओबीसी वोट बैंक ज्यादा है। कांगड़ा जिले में ओबीसी वोट बैंक गद्दी वोट बैंक से ज्यादा है लेकिन चंबा में गद्दी समुदाय का वोट बैंक ज्यादा निर्णायक स्थिति में है। हालांकि, कांगड़ा जिले में पूर्व सैनिकों, राजपूत और ब्राह्मण वर्ग का वोट बैंक भी अच्छा खासा है। 

बाली और सुधीर की नजर मिशन 2022 पर
उम्मीदवारी की रेस में आगे रहने के लिए शक्ति प्रदर्शन करने वाले सुधीर शर्मा के सामने पसोपेश वाली स्थिति है। दरअसल, विधानसभा के बाद लोकसभा में हार का रिस्क लेने से बेहतर वह धर्मशाला में उपचुनाव या मिशन 2022 को बेहतर विकल्प मान रहे हैं। उधर, बाली भी हाईकमान पर फैसला छोड़कर मिशन 2022 पर ध्यान दे रहे हैं।

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