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कांगणीधार हेलीपैड होगा बीएसएफ का चुनावी बैस कैंप, चॉपर से होगी पोलिंग पार्टियों की मदद
Fri, 17 May 2019 12:07 PM IST
अरविन्द ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 17 May 2019 12:07 PM IST
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हिमाचल के 64 फीसदी भूभाग में फैले और छह जिलों के साथ जुड़े सबसे बड़े मंडी संसदीय क्षेत्र में जरूरत पड़ने पर हवाई सेवाओं से पोलिंग पार्टियों की मदद की जाएगी। निर्वाचन आयोग के आदेशानुसार चुनाव के दिन मंडी संसदीय क्षेत्र में बीएसएफ के हेलीकॉप्टर मंडी में तैनात रहेंगे। इनका बेसकैंप कांगणीधार हेलीपैड होगा। किसी भी बड़ी मुसीबत जैसे पोलिंग पार्टी का फंस जाना, बैकअप में दी गई ईवीएम मशीनों के खराब हो जाने जैसे समय में हेलीकॉप्टर की मदद ली जाएगी।
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गौरतलब है कि लोकसभा की चार सीटों का कुल क्षेत्रफल 55673 वर्ग किलोमीटर है। अकेेला मंडी संसदीय क्षेत्र ही करीब 34,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है। 17 विधानसभा सीटों वाले मंडी संसदीय क्षेत्र में कुल्लू, चंबा, शिमला, लाहौल-स्पीति, मंडी और किन्नौर के दुर्गम क्षेत्र भी शामिल हैं।
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बिजली, पानी और दूरसंचार सुविधाओं से लैस एशिया का सबसे ऊंचा गांव किब्बर और सबसे ऊंचा मतदान केंद्र टशीगंग भी इसी संसदीय क्षेत्र की स्पीति घाटी में है। उधर, जिला निर्वाचन अधिकारी ऋग्वेद ठाकुर ने बताया कि मंडी संसदीय क्षेत्र में बहुत ही दुर्गम पोलिंग बूथ हैं। ऐसे में अगर चुनाव करवाने में कोई दिक्कतें आएं तो हेलीकॉप्टर की सेवाएं ली जाएंगी।
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चीन के कब्जे वाले तिब्बत और लेह से लगती हैं सीमाएं
स्पीति का शीत मरुस्थल भी मंडी संसदीय क्षेत्र के तहत आता है। यहां साल में छह माह तक बर्फ जमी रहती है। इस क्षेत्र की सीमा चीन के कब्जे वाले तिब्बत और जम्मू-कश्मीर के लेह-लद्दाख क्षेत्र से लगती हैं। ब्यास, सतलुज, चंद्रभागा और चिनाब जैसी नदियां इसी क्षेत्र में बहती हैं। यही नहीं, हिमाचल में सर्वाधिक बिजली प्रोजेक्ट भी यही हैं। एशिया की सबसे बड़ी पार्वती परियोजना, नाथपा झाकड़ी, ब्यास सतलुज लिंक प्रोजेक्ट इसी क्षेत्र में हैं।