अनिल शर्मा की मुश्किलें बढीं, सीएम जयराम ने कही बड़ी बात
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लोकसभा चुनाव खत्म होते ही जयराम सरकार में मंत्री रहे भाजपा विधायक अनिल शर्मा की मुश्किलें बढ़ना शुरू हो गई हैं। शुक्रवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शिमला में पत्रकारों से कहा कि चुनाव में अनिल की भूमिका की रिपोर्ट संसदीय क्षेत्र और पार्टी की जिला इकाई से मांगी है।
उसी आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई का फैसला लिया जाएगा। जीत के बाद सरकार के नए एजेंडे से जल्द लोगों को अवगत कराया जाएगा। इससे पहले मुख्यमंत्री ने एतिहासिक जीत के लिए प्रदेश की जनता और केंद्रीय नेतृत्व का धन्यवाद किया।
पहली बार 68 सीटों में भाजपा आगे रही
कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के गढ़ जैसे रोहडू़, अर्की, शिमला ग्रामीण, हरोली, नालागढ़, कांगड़ा, नयनादेवी और सोलन में भी भाजपा दस हजार से ज्यादा की लीड लेकर आगे रही। पहली बार 68 सीटों में भाजपा आगे रही।
इनमें 9 में लीड 30 हजार से ज्यादा, 34 में 20 हजार से ज्यादा, 21 में दस हजार से ज्यादा और 4 में दस हजार से कम रही। प्रदेश में भाजपा का कुल मत प्रतिशत 68.41 फीसदी रहा। प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती, मंत्री महेंद्र सिंह, सुरेश भारद्वाज, वीरेंद्र कंवर, बिक्रम ठाकुर और सुरेश कश्यप मौजूद रहे।
इतनी बड़ी जीत की नहीं की कल्पना, सदमें में कांग्रेसी
जयराम ने कहा कि प्रदेश में कई मुख्यमंत्री हुए, लेकिन किसी को अपने क्षेत्र से इतनी लीड नहीं मिली। पहली बार सराज विधानसभा क्षेत्र के लोगों ने उनकी अपील पर 37 हजार 147 मतों की भारी लीड दी।
यह प्रदेश में इस बार दूसरे नंबर की लीड थी। 39970 मतों के साथ नालागढ़ पहले और 36292 मतों के साथ जोगिंद्रनगर तीसरे स्थान पर रहा। सीएम ने कहा कि उन्हें बड़ी जीत का भरोसा था। इस जीत ने कांग्रेसियों की गलतफहमी दूर कर दी है।
बयानबाजी गलत, पर क्रिया की प्रतिक्रिया थी
कांग्रेस नेताओं पर चुटकी ली, इन्हें भाजपा की इतनी बड़ी जीत की उम्मीद ही नहीं थी। यही वजह है कि खुद की हार और भाजपा की जीत से कांग्रेसी अभी भी सदमे में है। हाल यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को यह तक कहना पड़ा कि उन्होंने आज तक इतनी बुरी हार नहीं देखी।
सत्ती की बदजुबानी पर मुख्यमंत्री बोले - यह महज प्रतिक्रिया भर थी। जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी मंच से प्रधानमंत्री के लिए खराब शब्दों का प्रयोग कर रहे थे तो ऐसे में कार्यकर्ताओं के मन में गुस्सा होना स्वाभाविक है। फिर भी नेताओं को संयम बदलने की जरूरत है।