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सेना का हर 10वां वीरता पुरस्कार हिमाचली सपूत को, फिर भी अपनी रेजिमेंट नहीं

Sun, 14 Apr 2019 02:26 PM IST
अरविन्द ठाकुर प्रवीण कुमार, अमर उजाला, हमीरपुर
प्रवीण कुमार, अमर उजाला, हमीरपुर Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 14 Apr 2019 02:26 PM IST
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lok sabha election 2019 himachal pradesh yet no have army regiment
भारतीय सेना (फाइल)

देश के पहले परमवीर चक्र विजेता पालमपुर के मेजर सोमनाथ। कारगिल युद्ध में दो परमवीर चक्र समेत कुल चार सर्वोच्च सैन्य सम्मान। सेना का हर 10वां वीरता पुरस्कार हिमाचली जवान के नाम। थलसेना, वायुसेना और नौसेना में सवा लाख से अधिक जवान दे रहे हैं सेवाएं और करीब इतने ही पूर्व सैनिक देश सेवा कर चुके हैं। लेकिन आजादी के 72 साल बाद भी हिमाचल को अपनी सैन्य रेजिमेंट नहीं मिल पाई है।

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चुनावों के समय हिमाचल रेजिमेंट की आवाज तो उठती रही है, लेकिन चुनावी शोर थमते ही यह मांग भी ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है। प्रदेश से हर पांच साल बाद कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों से कुल चार सांसद और छह साल बाद दो राज्यसभा सदस्य संसद में पहुंचते हैं। बावजूद इसके हिमाचल के नाम से रेजिमेंट की मांग अनसुनी रह जाती है। 
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देश के कई राज्यों के नाम पर सेना में रेजिमेंट हैं। उत्तराखंड में कुमाऊं और गढ़वाल दो रेजिमेंट है। हरियाणा में भी जाट और राजपूत नाम से सेना की दो रेजिमेंट्स हैं। लेकिन सेना में करीब एक हजार बहादुरी पुरस्कार हासिल करने वाले सैनिकों के राज्य में एक भी आर्मी की रेजिमेंट नहीं है। सूबे के युवकों को डोगरा रेजिमेंट में भर्ती होने के लिए मीलों दूर फैजाबाद भर्ती केंद्र जाना पड़ता है।
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सेवानिवृत्त आर्मी जवानों को भी रिकॉर्ड के लिए फैजाबाद के चक्कर काटने पड़ते हैं। पूर्व सैनिक कारपोरेशन ने इस मामले को कई बार रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार और प्रदेश सरकार के समक्ष उठाया। वहीं, भर्ती कोटा बढ़ाने और सीएसडी डिपो की मांग भी उठाई जाती रही है। जनसंख्या के आधार पर सर्वाधिक बहादुरी पुरस्कार हिमाचल को मिले हैं। भारतीय सेना से मिलने वाला हर दसवां मेडल हिमाचल के शूरवीर के कंधे पर सजता है। 

डोगरा रेजिमेंट में हिमाचल का हिस्सा 75 फीसदी
वर्तमान में हिमाचली युवाओं के लिए डोगरा रेजिमेंट में ही सबसे अधिक भर्ती प्रतिशतता है। डोगरा रेजिमेंट की स्थापना 1945-46 में हुई थी। इस रेजिमेंट में सूबे के 75 फीसदी सैनिक हैं। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर, गुरदासपुर और होशियारपुर के सैनिक हैं। युद्ध के समय सैनिकों में जोश पैदा करने के लिए जय ज्वाला मां का नारा लगाया जाता है, जिसे वार क्राई कहते हैं। वर्ष 1982 से पहले हिमाचल से आर्मी भर्ती कोटा 2.23 फीसदी था, जिसे बाद में कम करके .06 फीसदी कर दिया गया। देश में वर्तमान में सेना की 40 रेजिमेंट, 350 इनफेंटरी यूनिट और 22 बटालियनें हैं। हर बटालियन में 8000 जवान सेवारत हैं। 


हिमाचल के खाते में इतने मेडल
कारगिल शहीद        52
कुल वीरता पुरस्कार    998
परमवीर चक्र        4
अशोक चक्र        2
महावीर चक्र        10
कीर्ति चक्र            21
वीर चक्र            55
शौर्य चक्र            92
सेना, वायुसेना और नौसेना मेडल    453
बहादुरी पुरस्कार        164
अन्य मेडल            197

प्रदेश में हैं 52 सीएसडी कैंटीनें
सूबे में आर्मी की 52 सीएसडी कैंटीनें हैं, जहां से सेवारत जवान, सेवानिवृत्त सैनिक और उनके आश्रित रोजमर्रा का सामान खरीदते हैं। लेकिन सूबे में सीएसडी का एक भी डिपो नहीं है। सूबे की कैंटीनों में जालंधर, अंबाला और पठानकोट से सामान आता है। जीएसटी समेत अन्य टैक्स लगने से यह महंगी दरों पर सीएसडी कैंटीनों पर बिक रहा है। 

भाजपा सेना और शहीदों के नाम पर राजनीति करती है। वन रैंक वन पेंशन को लेकर अभी तक पूर्व सैनिक दिल्ली के जंतर-मंतर में धरने पर बैठे हैं। पुलवामा और बालाकोट के नाम पर वोट मांगे जा रहे हैं। हमने यूपीए सरकार में रक्षा मंत्री रहे एके एंटनी को हिमाचल रेजिमेंट के लिए प्रस्ताव भेजा था। लेकिन उसके बाद सत्ता परिवर्तन हो गया। भाजपा सरकार में इस पर कोई गौर नहीं हुआ। अगर हिमाचल रेजिमेंट बनती है तो इसमें 100 फीसदी भर्ती हिमाचली युवाओं की होगी। - कर्नल बीसी लगवाल, पूर्व चेयरमैन, हिमाचल प्रदेश पूर्व सैनिक निगम


हिमाचल में अपनी सेना रेजिमेंट होना बहुत जरूरी है। इससे युवाओं को कई तरह की सुविधाएं प्रदेश के भीतर उपलब्ध हो सकती हैं। इसके साथ ही सीएसडी डिपो भी प्रदेश में खुलना चाहिए। इस मांग को समय-समय पर उचित मंच पर उठाया जाता रहा है। आगे भी प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से इस मांग को उठाया जाएगा। - कैप्टन प्रीतम सिंह, जिला अध्यक्ष भाजपा पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ हमीरपुर

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