मंडी में चुनौती भरी होगी जीत की राह, सुखराम फैक्टर भी रहेगा अहम
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हॉट सीट बने सीएम जयराम ठाकुर के गृह संसदीय क्षेत्र मंडी में भाजपा ने दूसरी बार रामस्वरूप पर दांव तो खेल दिया है लेकिन जीत की राह चुनौतियों से भरी होगी। एक तरफ टिकट के दावेदारों के समर्थकों की नाराजगी को भाजपा को पार पाना होगा। वहीं संसदीय क्षेत्र में ऐसी दूसरी लाइन में भी समन्वय स्थापित करना होगा जो भाजपा को नहीं बल्कि व्यक्ति विशेष या संबंधित लॉबी को नुकसान पहुंचाने की फिराक में हो सकती है।
दूसरी तरफ मंडी सीट में इस बार सुखराम फैक्टर अहम रहेगा। राजनीति में चाणक्य कहे जाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम के अपने पोते को टिकट दिलाने के सारे प्रयास धरे के धरे रह गए हैं। ऐसे में पिछली बार कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए सुखराम परिवार को संभालना अड़चनों से भरा होगा। ऐसे में जब खुद आश्रय मंडी संसदीय क्षेत्र के 15 विस क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं वहीं दादा-पोते की कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें भी जोरों पर हैं।
कांग्रेस के आला नेताओं से संपर्क साधने की चर्चा है। इसके साथ-साथ टिकट की दौड़ में शामिल स्नोर वैली से सेवानिवृत ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर को टिकट की मांग कर चुके पूर्व सैनिक भी भाजपा की राह में रोड़ा अटका सकते हैं।
पूर्व सैनिक कारगिल हीरो की टिकट कटने के बाद सैनिकों का वोट बैंक हासिल करना भी चुनौती होगी। वहीं कुल्लू का वोट बैंक फिर से हासिल करना भाजपा के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। देव समाज का वोट बैंक भी जीत व हार में अहम होगा।
हालांकि सीएम जयराम ठाकुर का गृह जिला होने का लाभ रामस्वरूप शर्मा को मिलेगा। सीएम के करीबी रामस्वरूप शर्मा ने पांच साल के कार्यकाल में अपने साधारण व्यक्त्वि का परिचय तो दिया लेकिन लोगों के बीच वह स्थान नहीं पा सके। उनकी कई अहम घोषणाएं धरातल पर नहीं उतरी। कई स्थानों पर सांसद निधि का पैसा तक नहीं पहुंचा जिस कारण कई जगहों में लोगों में रोष भी है।
ऐसे में इन मतदाताओं को भेदने के लिए भी रामस्वरूप को कड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है। सीएम जयराम ठाकुर के इनके साथ काफी घनिष्ठ संबंध रहे हैं जबकि संघ में भी काफी पकड़ है। विस चुनावों में सुखराम परिवार को भाजपा में शामिल करवाने का काफी हद तक श्रेय भी रामस्वरूप को ही गया था।
रामस्वरूप शर्मा को मुबारक: बिग्रेडियर
टिकट के दावेदार रहे कारगिल हीरो ने टिकट मिलने पर रामस्वरूप शर्मा को मुबारकबाद दी है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता के तौर पर वह पार्टी को मजबूत करेंगे और हर कदम पर पार्टी के साथ रहेंगे। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों के बयानों से वे इत्तेफाक नहीं रखते।
सभी मिलकर काम करेंगे: महेश्वर
महेश्वर सिंह ने कहा कि परिवार की ही बात है। जब टिकट मिला है तो अच्छी बात है। हमें कौन सी दिक्कत है। परिवार में दौड़ तो मैनें नहीं लगाई लेकिन आवेदन किया है। उस आवेदन में लोगों ने साथ दिया। लोगों का आभार जताता हूं। पार्टी के भीतर की बात है। सभी मिलकर काम करेंगे।
यह रहे हैं विस चुनावों के समीकरण
मंडी लोकसभा सीट के तहत 17 विधानसभा सीटें भरमौर, लाहौल और स्पीति, मनाली, कुल्लू, बंजार, आनी, करसोग, सुन्दरनगर, नाचन, सिराज, द्रंग, जोगिंद्रनगर, मंडी, बल्ह, सरकाघाट, रामपुर और किन्नौर आते हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में इनमें से भाजपा ने 13 सीटों भरमौर, लाहौल और स्पीति, मनाली, बंजार, आनी, करसोग, सुंदरनगर, नाचन, सिराज, द्रंग, मंडी, बल्ह, सरकाघाट पर परचम लहराया है। कांग्रेस ने 3 सीटें कुल्लू, रामपुर और किन्नौर अपनी झोली में डाली हैं। जोगिंद्रनगर की सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी प्रकाश राणा विजयी रहे।
एक नजर 2014 के चुनावों पर
2014 के लोकसभा चुनाव में 7,26,094 लोगों मतदान किया था। इनमें 3,77,569 मतदाता पुरुष और 3,48,525 मतदाता महिलाएं थीं। 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर कुल 63 फीसदी मतदान हुआ था। भारत निर्वाचन आयोग की 2014 की रिपोर्ट के मुताबिक इस लोकसभा क्षेत्र में 11.50 लाख वोटर हैं जिनमें 5.87 लाख पुरुष और 5.62 लाख महिला वोटर हैं। 1957 से 2014 के बीच इस सीट पर 10 बार कांग्रेस और 4 बार भाजपा जीती है।