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184 रुपये मनरेगा की दिहाड़ी, मजदूरों को दिए 13 से 45 रुपये

Mon, 16 Jul 2018 11:54 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोहर/बालीचौकी (मंडी)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोहर/बालीचौकी (मंडी) Updated Mon, 16 Jul 2018 11:54 AM IST
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lok adalt in mandi himachal pradesh

। लोक अदालत ने एक फैसले में मनरेगा श्रमिकों को निर्धारित न्यूनतम पारिश्रमिक के भुगतान का आदेश दिया है। सराज विकास खंड की घाट पंचायत से कुल 26 शिकायतें लोक अदालत में पेश हुई थीं। आरोप था कि मनरेगा के तहत दिहाड़ी लगाई गई लेकिन पारिश्रमिक देते समय मनमानी असेसमेंट को आधार बनाया गया।

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निर्धारित दिहाड़ी के बजाय श्रमिकों को 13 से 45 रुपये तक की राशि का ही भुगतान किया गया। सिविल जज गोहर व चेयरमैन लोक अदालत अशोक कुमार वत्सल ने इन मामलों पर दलीलें सुनने के बाद कहा कि निर्धारित दर से दिहाड़ी मूल्य श्रमिकों का संवैधानिक अधिकार है।
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शनिवार को गोहर कोर्ट परिसर में आयोजित लोक अदालत के समक्ष सराज विकास खंड की घाट पंचायत की 26 शिकायतों का निपटारा इसी आदेश के साथ निपटारा कर दिया गया।

अदालत ने कहा कि श्रमिकों को काम करना है और उनसे काम करवाना कार्यान्वयन एजेंसी की जिम्मेवारी है। दिहाड़ी की असेसमेंट में संवैधानिक अधिकार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इसके बाद अदालत में खंड विकास अधिकारी सराज जगदीप ने कहा कि वह पंचायत के श्रमिकों को न्यूनतम दिहाड़ी देना सुनिश्चित करेंगे।
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गौरतलब है कि घाट पंचायत में मनरेगा श्रमिकों को कथित असेसमेंट के बाद 13 रुपये से लेकर 45 रुपये तक दिहाड़ी दी गई थी। जिस पर 26 मनरेगा श्रमिकों ने अधिवक्ता हेम सिंह ठाकुर के माध्यम से लोक अदालत में शिकायतें दर्ज करवाई थीं।

184 रुपये से कम दिहाड़ी कानून की अवहेलना- राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम दिहाड़ी एक श्रमिक का अधिकार है और कोई भी कार्यान्वयन करने वाली संस्था इससे नहीं बच सकती। यदि कहीं पर अवहेलना हो रही है तो संबंधित कर्मचारी अथवा अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

अदालत ने कहा कि मनरेगा एक्ट में निहित प्रावधानों के मुताबिक श्रमिकों को आवेदन के आधार पर रोजगार मुहैया करवाना कार्यान्वयन करने वाली संस्था पंचायत की जिम्मेदारी है।


इसमें श्रमिकों को रोजगार देना, उनसे काम लेना और फिर उचित पारिश्रमिक देना शामिल है। उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार ने प्रदेश में मनरेगा की दिहाड़ी 184 रुपये निर्धारित की है। ऐसे में श्रमिकों को 184 रुपये से कम दिहाड़ी का भुगतान नहीं किया जा सकता।

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