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HP High Court: डीओ नोट पर बदल दिया डिग्री कॉलेज का स्थान, हाईकोर्ट ने चार हफ्ते में मांगा जवाब

Fri, 02 Dec 2022 10:37 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 02 Dec 2022 10:37 AM IST
सार

 मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी डीओ नोट के आधार पर डिग्री कॉलेज खोलने पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। याचिका के माध्यम से गुहार लगाई गई है कि ममलीग में कॉलेज खोलने की अधिसूचना को रद्द किया जाए। 
 

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी डीओ नोट के आधार पर डिग्री कॉलेज खोलने पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद व न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने प्रधान सचिव शिक्षा को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ता केडी शर्मा और अन्य की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोलन जिला के सायरी के आसपास के लगभग 15 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों के लिए सायरी में डिग्री कॉलेज खोलने की अधिसूचना जारी की गई थी। इसके लिए 21 बीघा जमीन का चयन किया गया।

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इसके बावजूद राज्य सरकार ने कॉलेज खोलने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाए। 25 अगस्त 2022 को मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी डीओ नोट के आधार पर ममलीग में डिग्री कॉलेज खोलने का निर्णय लिया गया। राज्य सरकार ने 30 सितंबर 2022 को इसके लिए अधिसूचना जारी की। याचिकाकर्ता ने दलील दी गई है कि ममलीग में किसी भी तरीके से डिग्री कॉलेज खोला जाना उचित नहीं है। सायरी से नजदीकी डिग्री कॉलेज 40 किलोमीटर से भी अधिक दूरी पर है। याचिका के माध्यम से गुहार लगाई गई है कि ममलीग में कॉलेज खोलने की अधिसूचना को रद्द किया जाए। 
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कर्मचारी की छुट्टियों का वेतन रोका लोनिवि पर 25 हजार रुपये जुर्माना
 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारी की छुट्टियों का वेतन रोकने के लिए लोक निर्माण विभाग पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह गलती भविष्य में न दोहराई जाए, इसके लिए हाईकोर्ट ने अपना निर्णय वित्त सचिव को भेजा है। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने अमिता गुप्ता की याचिका को स्वीकार करते हुए यह निर्णय सुनाया। खंडपीठ ने याचिकाकर्ता की छुट्टियों के वेतन को चार हफ्ते में अदा करने के आदेश पारित किए हैं। मामले के अनुसार याचिकाकर्ता अमिता गुप्ता 30 सितंबर 2020 को लोक निर्माण विभाग से वरिष्ठ वास्तुकार के पद से सेवानिवृत्त हुईं थीं। उस समय उसके खाते में 300 ऐसी छुट्टियां थीं, जिसके बदले में विभाग में सेवाएं दी थीं।
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 सेवानिवृत्ति के समय उन्हें 13,93,520 रुपये  छुट्टियों का वेतन दिया गया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि संशोधित वेतन निर्धारण की तर्ज पर 85 हजार रुपये कम वेतन दिया गया। विभाग ने यह कहकर वेतन रोक दिया था कि संशोधित वेतन निर्धारण का लाभ छुट्टियों के वेतन अदायगी में नहीं दिया जा सकता।  अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन कर पाया कि जिन छुट्टियों के बदले में कर्मचारी ने विभाग को अपनी सेवाएं दी हैं, उसके बदले में वह वेतन का हकदार है। यदि कर्मचारी का वेतन संशोधित कर बढ़ा दिया जाता है तो उस स्थिति में छुट्टियों के वेतन अदायगी करते समय भी इसका लाभ दिया जाएगा।  अदालत ने राज्य सरकार के महाधिवक्ता को आदेश दिए कि वह अदालत के इस निर्णय को वित्त सचिव को भेजें, जिससे अन्य विभागों में इस तरह से किसी अन्य कर्मचारी के साथ ऐसा न हो। 

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