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आप अंधेरे में रहो, सरकार सस्ती बिजली भी खरीदने को तैयार नहीं

Fri, 28 Mar 2014 05:37 PM IST
Updated Fri, 28 Mar 2014 05:37 PM IST
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live in dark, govt is not buying electricity even at cheaper rates

इस बार के लोकसभा चुनाव में कई राज्यों में बिजली आपूर्ति कोई चुनावी मुद्दा नहीं।

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विधानसभा चुनाव में हिमाचल प्रदेश से कई राज्य बिजली खरीदने की होड़ में रहते थे।

इस आम चुनाव में हिमाचल प्रदेश सस्ती बिजली बेचने को तैयार है, लेकिन उसे खरीदार नहीं मिल रहे हैं। हिमाचल के पास इस समय हर रोज 940 मेगावाट बिजली बेचने के लिए उपलब्ध है।

चूंकि, मांग कम है इसलिए 3 रुपये प्रति यूनिट की दर पर ही बिजली पीटीसी के मार्फत नेशनल एनर्जी एक्सचेंज में डालनी पड़ रही है।

2009 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मांग बढ़ने से हिमाचल ने 6.50 रुपये के रेट तक बिजली बेची थी।

2011 में यूपी को भी बेची थी बिजली

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वर्ष 2011 में यूपी को भी बिजली बेची थी। तब यूपी में चुनावी साल था। लेकिन मायावती सरकार के जाने के बाद 200 करोड़ की वसूली करने में दो साल लग गए। अनुभव अच्छा नहीं रहा।

वित्त वर्ष 2013-14 में पंजाब, पश्चिम बंगाल और एनडीएमसी (दिल्ली) को बिजली बेची गई। पंजाब और हरियाणा अब खुद को पावर सरप्लस बताते हैं। दिल्ली में कोई सरकार नहीं है, इसलिए एनडीएमसी भी बिजली नहीं ले रही।

हिमाचल अब पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार से ही 10 साल का एग्रीमेंट करने की सोच रहा है। हालांकि, रेट यहां भी 4 रुपये प्रति यूनिट मिल रहा है।

यहां केंद्र सरकार के उपक्रमों द्वारा चलाए जा रहे बिजली प्रोजेक्टों में राज्य सरकार का हिस्सा है। स्वतंत्र विद्युत उत्पादक भी राज्य को 12 फीसदी फ्री पावर देते हैं।

बिजली को चूंकि स्टोर नहीं किया जा सकता, इसलिए इसे जो रेट मिले, उसी पर बेचना पड़ रहा है।

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पावर कट लगा रहे हैं कई राज्य

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बर्फ से ढके पहाड़ों के कारण हिमाचल में आजकल नदियों में पानी कम है। मई में बर्फ पिघलने पर उत्पादन बढ़ेगा।

एसजेवीएन का रामपुर प्रोजेक्ट भी इसी महीने कमीशन हो गया है। यानी बिजली उत्पादन लगातार बढ़ रहा है, लेकिन रेट लगातार गिर रहे हैं।

ऊर्जा निदेशक आरडी नजीम कहते हैं कि देश में बिजली की जरूरत है, लेकिन कई राज्य सस्ती बिजली खरीदने के बजाय पावर कट का रास्ता अपना रहे हैं।

प्रधान सचिव (ऊर्जा) एसकेबीएस नेगी ने कहा कि जिन राज्यों को बिजली की जरूरत है, वे अपने लोगों को निर्बाध बिजली देने को तैयार नहीं। जो देने को तैयार हैं, वहां डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क नहीं है।

इसलिए हमें खरीदार नहीं मिल रहे। बिजली बेचने के लिए अब हम लंबी अवधि के एग्रीमेंट की संभावनाएं देख रहे हैं। इसके लिए टेंडर जारी करेंगे। ड्राफ्ट तैयार हो रहा है।

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