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चौबीस घंटों में ठीक करने होंगे खराब जीवनरक्षक उपकरण, वरना भारी पेनल्टी

Wed, 11 Apr 2018 01:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Wed, 11 Apr 2018 01:09 PM IST
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Life Saving Equipments in govt hospitals of himachal pradesh

स्वास्थ्य महकमे के दावे को सही मान लें तो अब अस्पतालों में मशीनें खराब होने से मरीजों को परेशानी नहीं होगी। 24 घंटों के भीतर जीवनरक्षक उपकरणों को ठीक करना होगा। वरना जिस कंपनी को ये काम दिया गया है, उस पर भारी पेनल्टी लगाई जाएगी। जैसे ही कोई उपकरण खराब होगा तो अस्पताल के कर्मचारी कंपनी को टोल फ्री नंबर 18001027418 पर सूचना देंगे।

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कंपनी को सूचना मिलते ही हरकत में आना पड़ेगा। इसे 20 हजार उपकरणों की देखरेख के लिए सालाना करीब छह करोड़ रुपये दिए जाएंगे। कुछ समय पहले राज्य के 602 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की मैपिंग में पाया गया कि इनमें करीब 18 प्रतिशत उपकरण खराब पड़े हैं। उपकरणों की देखरेख के लिए बजट का भारी अभाव रहा।
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भारत सरकार के जैव चिकित्सा उपकरण प्रबंधन और रखरखाव कार्यक्रम के तहत मशीनों के रखरखाव के लिए धन का प्रबंध हुआ तो हिमाचल सरकार ने इसके लिए कड़ी शर्तों के साथ टेंडर आमंत्रित किए। चार कंपनियों ने भाग लिया। न्यूनतम रेट वाली कंपनी नेक्सटजेन मेडिकल डिवाइसेज को यह काम सौंप दिया गया।

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कंपनी को सालाना छह करोड़ मिलेंगे

Life Saving Equipments in govt hospitals of himachal pradesh

कंपनी को 6 अक्तूबर 2017 को आशय पत्र दिया गया, मगर आचार संहिता लगने के  कारण समझौता नहीं हो पाया। जो अभी सरकार के विचाराधीन है। हालांकि, कंपनी ने अस्पतालों में काम करना शुरू कर दिया है। तय हुआ है कि वेंटिलेटर, ऑक्सीजन उपकरणों समेत तमाम तरह के यंत्रों को इस कंपनी को सूचना मिलने के 24 घंटे के भीतर ठीक करना होगा।

एक्सरे, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड से लेकर कोल्ड चेन आदि तमाम बाकी उपकरणों को एक सप्ताह के भीतर ठीक करना होगा। समय पर उपकरण ठीक न हुए तो कंपनी को इनके स्थान पर अपने उपकरण लगाने होंगे। ये सरकारी उपकरणों की मरम्मत के बाद हटाए जा सकेंगे। अगर कंपनी उपकरण तय समय में ठीक नहीं कर पाई तो 300 से 3000 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से इसे पेनल्टी देनी होगी। 


यह कार्यक्रम देश के 17 राज्यों में शुरू हो चुका है। हमने भी इस कार्यक्रम में मिले धन से न्यूनतम रेट वाली कंपनी यह काम दिया है। समझौते से पहले कंपनी को आशय पत्र दे दिया गया है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम को लागू करने मेें खासी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इससे आने वाले समय में अस्पतालों में उपकरणों के खराब होने की समस्या नहीं होगी। - डा. रमेश चंद्र, राज्य कार्यक्रम अधिकारी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग  

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