यहां हुआ अदालतों में लंबित मामले कम करने पर मंथन
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प्रभावी न्यायालय प्रबंधन विषय पर धर्मशाला में व्याख्यानमाला का आयोजन हुआ। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने कहा कि न्यायिक अधिकारी संविधान की प्रस्तावना में निहित न्याय दर्शन को ध्यान में रखकर कार्य करें।
इसके अलावा न्याय प्रणाली से जुड़े सभी अधिकारी सामाजिक न्याय सुलभ बनाने के लिए प्रयास करें। न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने धर्मशाला के डीआरडीए भवन में आयोजित व्याख्यान माला की दूसरी कड़ी में यह बात कही।
व्याख्यानमाला का उद्देश्य अदालतों में लंबित मामलों का बैकलॉग कम करने व त्वरित न्याय दिलाने में सुधारों के लिए अपनाई जा सकने वाली प्रणाली से अवगत करवाना था। इस मौके पर प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल एवं न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी भी मौजूद रहे।
पब्लिक पोर्टल ‘राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड के उपयोग पर बल
न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने न्यायिक अधिकारियों से लोगों को उनके अधिकारों के बारे में अवगत करवाने और उन्हें अधिकारों को प्राप्त करने के रास्ते सुझाने के लिए प्रयास करने को भी कहा।
उन्होंने पब्लिक पोर्टल ‘राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड’ (एनजेडीजी) के समुचित उपयोग पर बल दिया, ताकि लंबित मामलों की आसानी से निगरानी की जा सके। इस अवसर पर प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल ने न्यायिक दर्शन पर बात की और सभी को न्याय प्राप्त करने के समान अवसरों पर जोर दिया।
न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी ने न्यायालयों के प्रभावी प्रबंधन को लेकर अपने अनुभव साझा किए एवं सुझाव भी दिए। न्यायिक अकादमी के निदेशक चिराग भानु सिंह ने स्वागत भाषण दिया, जबकि न्यायिक अकादमी के उप निदेशक अविनाश चंद्र ने मुख्य अतिथि का धन्यवाद किया।
सचिव, सीनियर सिविल जज नेहा दहिया ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कांगड़ा पुरेंद्र वैद्य सहित ऊना, हमीरपुर, मंडी, कुल्लू और लाहौल-स्पीति जिलों के सिविल और सत्र न्यायालयों के लगभग 73 न्यायिक अधिकारी उपस्थित थे।