Himachal: लक्ष्मीधर बेहरा बोले- क्वांटम तकनीक, भूकंप और जलवायु परिवर्तन पर शोध करेगा आईआईटी मंडी
संस्थान के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने शनिवार को आयोजित 14वें दीक्षांत समारोह में कहा कि केंद्र सरकार ने क्वांटम तकनीक के विकास के लिए संस्थान को 200 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की है, जिसके तहत अत्याधुनिक अनुसंधान कार्य किए जाएंगे।
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी आने वाले वर्षों में क्वांटम तकनीक, भूकंप और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़े स्तर पर अनुसंधान करेगा। संस्थान के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने शनिवार को आयोजित 14वें दीक्षांत समारोह में कहा कि केंद्र सरकार ने क्वांटम तकनीक के विकास के लिए संस्थान को 200 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की है, जिसके तहत अत्याधुनिक अनुसंधान कार्य किए जाएंगे। प्रो. बेहरा ने कहा कि क्वांटम तकनीक भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक है। इसके माध्यम से कम लागत वाले उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग सिस्टम विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। वर्तमान में सुपर कंप्यूटर के निर्माण और संचालन पर भारी खर्च आता है, लेकिन संस्थान ऐसी तकनीकों पर कार्य कर रहा है जो भविष्य में इस लागत को कम कर सकेंगी।
आईआईटी मंडी में जल्द ही जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन से जुड़े अनुसंधान कार्यों को नई गति दी जाएगी। इसके लिए विशेष केंद्र स्थापित करने की दिशा में काम चल रहा है। हिमालयी राज्यों में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए संस्थान भूकंप संबंधी अनुसंधान को भी प्राथमिकता दे रहा है। इसी कड़ी में भूकंप के प्रभावों और संरचनाओं की मजबूती का अध्ययन करने के लिए थ्री-डी पेंडुलम विकसित किया जा रहा है, जो शोधकर्ताओं को नई जानकारियां उपलब्ध कराएगा। निदेशक ने कहा कि संस्थान आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में केवल शोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रशिक्षित करने का भी कार्य करेगा। पुलिस तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से आम नागरिकों को आपदा के दौरान बचाव और सुरक्षा के उपाय सिखाने की योजना बनाई जा रही है।
प्रो. बेहरा ने कहा कि आईआईटी मंडी युवाओं को रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है। संस्थान का प्रयास है कि यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले कम से कम 10 प्रतिशत विद्यार्थी उद्यमी बनें और दूसरों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करें। संस्थान विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा दे रहा है। संस्थान ने हाल ही में लगभग 100 करोड़ रुपये की बाह्य प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाएं हासिल की हैं।
मेड इन इंडिया को वैश्विक पहचान दिलाने में एआई की अहम भूमिका : गोयनका
आईआईटी मंडी के 14वें दीक्षांत समारोह में वेलस्पन समूह के संस्थापक एवं चेयरमैन बीके गोयनका ने विद्यार्थियों को बदलती दुनिया की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया। कहा कि आज के दौर में केवल डिग्री, अंक और ज्ञान पर्याप्त नहीं हैं। तेजी से बदलती दुनिया में सफलता उन्हीं को मिलेगी जो बदलाव को स्वीकार करेंगे, जोखिम उठाएंगे और अपने ज्ञान को प्रभावी ढंग से लागू कर पाएंगे। गोयनका ने कहा कि भारत को मेड इन इंडिया के सपने को साकार करने के लिए एआई और तकनीक का प्रभावी उपयोग करना होगा।
तकनीक बदलेगी दुनिया, मानवीय चुनौतियों का समाधान बाकी : बनर्जी
आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने कहा कि तकनीक और एआई की तेज प्रगति के बावजूद भूख, गरीबी, स्वच्छ ऊर्जा, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा जैसी चुनौतियां आज भी दुनिया के सामने हैं। कहा कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में आज स्नातक हो रहे छात्र आने वाले दो दशकों में देश और दुनिया के बदलाव के प्रमुख भागीदार होंगे।