{"_id":"60e892a48ebc3eb157488e7c","slug":"late-virbhadra-singh-gave-the-biggest-drinking-water-scheme-of-the-state-to-anurag-and-pk-dhumal-s-home-panchayat","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्मृति विशेष: वीरभद्र ने अनुराग और धूमल की गृह पंचायत को दी प्रदेश की सबसे बड़ी पेयजल योजना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्मृति विशेष: वीरभद्र ने अनुराग और धूमल की गृह पंचायत को दी प्रदेश की सबसे बड़ी पेयजल योजना
Sat, 10 Jul 2021 10:41 AM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, हमीरपुर
अमर उजाला नेटवर्क, हमीरपुर
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 10 Jul 2021 10:41 AM IST
सार
वर्ष 2002 से 2007 के दौरान वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री रहे तो हमीरपुर से कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल उनसे पेयजल समस्या को लेकर मिला। उन्होंने बमसन और भोरंज में पेयजल समस्या की बात रखी।
विज्ञापन
वीरभद्र ने धूमल की गृह पंचायत को दी थी सबसे बड़ी पेयजल योजना
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अकसर अपने कार्यक्रमों में कहते रहे हैं कि उन्होंने कभी क्षेत्रवाद, जातिवाद और धर्म की राजनीति नहीं की। पूरे हिमाचल को उन्होंने एक माना है। इसी का एक उदाहरण हमीरपुर में भी देखने को मिला। केंद्रीय युवा सेवाएं एवं खेल और सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर और पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की गृह पंचायत समीरपुर में जो नल हैं, उन्हें उस पेयजल स्कीम से पानी की आपूर्ति होती है। इसे मुख्यमंत्री रहते हुए वीरभद्र सिंह ने बजट स्वीकृत करवाया था।
विज्ञापन
वर्ष 2002 से 2007 के दौरान वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री रहे तो हमीरपुर से कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल उनसे पेयजल समस्या को लेकर मिला। उन्होंने बमसन और भोरंज में पेयजल समस्या की बात रखी। वीरभद्र सिंह ने जलशक्ति विभाग को शीघ्र एक बड़ी पेयजल योजना का प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिए। जलशक्ति विभाग ने 68 करोड़ की डीपीआर तैयार की। वीरभद्र सिंह ने योजना को मंजूरी देते हुए 15 अक्तूबर 2006 को प्रदेश की पहली कंप्यूटरीकृत पेयजल योजना का शिलान्यास किया।
विज्ञापन
आज यह पेयजल योजना हमीरपुर जिले के भोरंज, बमसन और सुजानपुर समेत आसपास की करीब 70 ग्राम पंचायतों के लोगों की प्यास बुझा रही है। 70 लाख लीटर क्षमता वाली मेवा-बमसन-लगवालती योजना पर 68 करोड़ खर्च हुए थे और रिकॉर्ड दो साल के भीतर यह योजना चालू हुई। योजना की खास बात यह है कि कंप्यूटर के जरिये ही सारी मशीनें ऑन और ऑफ होती हैं। उधर, जलशक्ति विभाग भोरंज के एक्सईएन अनूप ठाकुर ने कहा कि मेवा-बमसन लगवालती प्रदेश की पहली कंप्यूटरीकृत पेयजल योजना है। 70 लाख क्षमता की इस पेयजल योजना पर करीब 68 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
विज्ञापन