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Shimla News: बालूगंज में भूस्खलन की वजह उचित जल निकासी न होना

Thu, 07 Nov 2024 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 07 Nov 2024 11:59 PM IST
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Landslide in Baluganj due to lack of proper drainage
जियोलॉजिकल सर्वे में खुलासा, एडवांस्ड स्टडी की सुरक्षा के लिए विस्तृत भू-तकनीकी सर्वे की सिफारिश
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क्रॉसर
5 से 15 मीटर लंबी दरारें मिले हैं सर्वे के दौरान
70 सेंटीमीटर गहरी तक है कई जगह दरारें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। बालूगंज बाईफिरकेशन (क्राॅसिंग) के पास 19 अगस्त को हुए भारी भूस्खलन की वजह उचित जल निकासी नहीं होना है।

यह खुलासा जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के वैज्ञानिकों की प्रारंभिक जांच में हुआ है। विशेषज्ञों ने एडवांस्ड स्टडी की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए भूस्खलन का विस्तृत भू-तकनीकी सर्वे करवाने की भी सिफारिश की है।रिपोर्ट के मुताबिक भारी बारिश के दौरान पानी की उचित निकासी नहीं हुई और वह भारी मात्रा में पहाड़ी के भीतर चला गया। इससे जमीन में पानी की अधिक मात्रा के कारण दबाव बढ़ा और 40 से 60 डिग्री झुकाव वाली खड़ी ढलान होने से भूस्खलन हो गया। गौरतलब है कि क्षेत्र में भारी भूस्खलन के कारण कई दिनों तक बालूगंज-शिमला मुख्य मार्ग अवरुद्ध रहा था।

बालूगंज-एडवांस्ड स्टडी मार्ग ढाई महीनों के बाद भी अभी तक बहाल नहीं हो पाया है। विशेषज्ञों को सर्वे के दौरान 5 से 15 मीटर लंबी, करीब 70 सेंटीमीटर गहरी और 1 से 15 सेंटीमीटर चौड़ी दरारें मिली हैं। इसको देखते हुए वैज्ञानिकों ने भविष्य में यहां पर भूस्खलन रोकने के लिए कई सिफारिशें भी की हैं। इसमें उन्होंने प्रशासन से पहाड़ी के ऊपरी सतह पर गिरे मलबे को मशीन का इस्तेमाल न करके मजदूरों से उठवाने के लिए कहा है, जिससे दोबारा मिट्टी खिसकने जैसी स्थिति से बचा जा सके। वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि भूस्खलन पर निगरानी रखने के लिए क्रेक मीटर (उपकरण) स्थापित किया जाए।
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इंजीनियर की देखरेख में ही हो निर्माण कार्य
वैज्ञानिकों ने यहां पर किए जाने वाले निर्माण कार्य को उचित तकनीक से डिजाइन इंजीनियर की देखरेख में करवाने की हिदायत दी है। जीएसआई ने इसके साथ ही ढह चुके बालूगंज-एडवांस्ड स्टडी मार्ग के डिजाइन पहले की तरह रखने की हिदायत दी है। इसके साथ ही पानी की उचित निकासी का इंतजाम करने के भी निर्देश दिए हैं। वैज्ञानिकों ने डंगा लगाने को लेकर भी ग्रेविटी, कैंटीलीवर रीइन्फोर्समेंट अर्थ वॉल का निर्माण करने की सलाह दी है। इसके साथ ही डंगे में पानी की निकासी के लिए छिद्रों का निर्माण करने के लिए भी कहा है।
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