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Shimla News: लाखों रुपये लेकर बनवाए थे निजी कंपनी के नाम फर्जी सेंक्शन ऑर्डर

Wed, 03 Jun 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 03 Jun 2026 11:59 PM IST
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Lakhs of rupees were spent to obtain fake sanction orders in the name of a private company.
एक्सक्लूसिव
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राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन विभाग में हुए 68 लाख के घोटाले का मामला, आरोपी की जमानत याचिका खारिज
फर्जी सेंक्शन ऑर्डर बनाने के नाम पर लिए थे 14.80 लाख
रुचि सांख्यान
शिमला। हिमाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में सरकारी दस्तावेज पर फर्जी हस्ताक्षर कर करीब 68.31 लाख रुपये के घोटाले के आरोपी आउटसोर्स कर्मचारी कार्तिक ठाकुर की दूसरी जमानत याचिका भी अदालत ने खारिज कर दी है।

पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी ने लाखों रुपये लेकर निजी कंपनी के नाम पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खरीद के फर्जी सेंक्शन ऑर्डर बनाए थे। आरोपी के बैंक खाते में अलग-अलग तारीखों पर मैसर्स एनके ट्रेडर्स की ओर से 14.80 लाख रुपये ट्रांसफर भी किए थे। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-एक शिमला प्रवीण गर्ग की अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि मामले में चार्जशीट दाखिल होने मात्र को परिस्थितियों में बड़ा बदलाव नहीं माना जा सकता है।
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अदालत ने साफ किया कि पिछली जमानत याचिका खारिज होने के बाद वर्तमान हालात में ऐसा कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ है, जिससे आरोपी को जमानत दी जा सकती हो। मामला उस समय सामने आया था जब लाहौल-स्पीति की वर्तमान सहायक आयुक्त कल्याणी गुप्ता ने शिमला में अपनी पिछली पोस्टिंग के दौरान के रिकॉर्ड में सितंबर 2025 का एक मंजूरी आदेश देखा था। इस सरकारी दस्तावेज पर उनके जाली हस्ताक्षर थे। यह मामला संज्ञान में आने के बाद कल्याणी गुप्ता ने लिखित शिकायत पुलिस स्टेशन छोटा शिमला में दर्ज करवाई। इस आधार पर पुलिस ने विभिन्न धाराओं में केस दर्जकर मामले की जांच शुरू।
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पुलिस जांच के दौरान सामने आया कि शिमला के रहने वाले कार्तिक ठाकुर जो कसुम्पटी स्थित हिमाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन कार्यालय में आउटसोर्स कर्मचारी के रूप में कार्यरत था ने ही कल्याणी गुप्ता के फर्जी हस्ताक्षर कर 68,31,200 रुपये का फर्जी सेंक्शन ऑर्डर तैयार किया और इसे मैसर्स एनके ट्रेडर्स को जारी कर दिया। जांच में यह भी पता चला कि इस जालसाजी के बदले कार्तिक ठाकुर के बैंक खाते में अलग-अलग तारीखों पर मैसर्स एनके ट्रेडर्स की ओर से 14.80 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि केवल चार्जशीट दाखिल होने से आरोपों की गंभीरता कम नहीं हो जाती कोर्ट ने पहले भी जमानत याचिका अपराध की गंभीरता को देखते हुए खारिज की गई थी ऐसे में दोबारा जमानत याचिका स्वीकार करना पुराने आदेश की समीक्षा करने जैसा होगा, जिसकी कानूनी अनुमति नहीं है अदालत ने याचिका को विचार योग्य न मानते हुए सीधे खारिज कर दिया।
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