हिमाचल में लाखों किसानों-बागवानों से धोखा, यहां जानिए पूरा मामला
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प्रदेश के लाखों किसानों और बागवानों से बैंकों की धोखाधड़ी सामने आई है। प्रदेश में कायदे से फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड से चार लाख किसान अब तक जोड़े जाने थे।
लेकिन भारत सरकार के फसल बीमा पोर्टल पर कई बैंकों ने डाटा ही अपलोड नहीं किया है। सरकार ने कड़ा संज्ञान लेते हुए बैंकाें को एक हफ्ते में डाटा अपलोड न करने पर बैंकों से रिकवरी की चेतावनी जारी कर दी है। बैंकों को बाकायदा हफ्ते भर में रिपोर्ट देनी होगी।
शिमला में हुई राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की 147वीं बैठक में बैंकों की सुस्त कार्यप्रणाली और किसानों के प्रति अनदेखी उजागर हुई। बैठक की चर्चा के दौरान पाया गया कि प्रदेश के लाखों किसानों और बागवानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त ने ये कहा
किसानों को संशोधित मौसम आधारित फसल बीमा योजना से भी वंचित रखा जा रहा है। प्रदेश में स्थित कई बैंकों ने अभी तक किसानों का डाटा भारत सरकार के फसल बीमा पोर्टल पर अपलोड नहीं किया है।
नौ लाख किसानों में से चार लाख किसान क्रेडिट कार्ड स्कीम से जोड़े गए हैं, लेकिन उसमें से एक लाख को कार्ड ही जारी नहीं हुए। यही नहीं, जिन किसानों को कार्ड जारी हुए उसमें से मात्र एक लाख को ही बीमा योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
तीन लाख किसानों का डाटा अपलोड नहीं होने से केंद्र सरकार से बीमा राशि प्राप्त नहीं हो रही है। बैठक की अध्यक्षता करते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त ने मामला उजागर होने पर कड़ी नाराजगी जताई।
कहा, योजना के तहत कवरेज केवल 14 प्रतिशत है और दावे भी बहुत कम हैं। बैंक हर हाल में यह डाटा एक हफ्ते में ऑनलाइन अथवा ऑफ.लाइन अपलोड करें। डाटा अपलोड न करने वाले बैंक प्रबंधकों से बीमा राशि की रिकवरी की जाएगी।
ये है धोखाधड़ी का पूरा मामला
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हर छह माह में इस योजना का समीक्षा कर रही है। उन्होंने बैंकर्स समिति के डीजीएम से एक सप्ताह के बाद इस मामले को लेकर रिपोर्ट तलब की है।
- प्रदेश में 9,45,892 किसानों-बागबानों से 4.1 लाख केसीसी स्कीम में
- किसान क्रेडिट कार्ड से मात्र 45 प्रतिशत किसान ही जोड़े बैंकों ने
- स्कीम में आने वाले तीन लाख किसानों को बीमा योजना का लाभ नहीं
- चंबा में 23 और कांगड़ा में 27 प्रतिशत कार्ड बने, 96 प्रतिशत के साथ सिरमौर सबसे आगे