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यहां बच्चे भी होते हैं मां-बाप की शादी में बाराती

Wed, 28 Jan 2015 06:30 PM IST
Updated Wed, 28 Jan 2015 06:30 PM IST
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lahaul and Spiti in the kuji marriage included child.

हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र लाहौल घाटी में विवाह संस्कारों की अनूठी परंपरा आज भी कायम है। यहां कई बार बच्चे अपने माता-पिता से यह सवाल पूछ लेते हैं कि उन्हें अपनी शादी में क्यों नहीं बुलाया।

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परंपरा के अनुसार लाहौल घाटी में बच्चे अपने मां-बाप की शादी में बाराती बन कर शामिल होते हैं। बदलते सामाजिक परिवेश के बावजूद जनजातीय जिले में कूजी विवाह (छोटी शादी) के बाद बड़ी शादी का प्रचलन आज भी देखने को मिल रहा है।
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कूजी विवाह के कई सालों बाद दोनों पक्षों के परिजनों के मानने पर होने वाली शादियों में बच्चे भी मां-बाप के हाथ पीले होते देखते हैं और उनके सात फेरों में शरीक होते हैं।
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लड़के वालों से लिया जाता है हर्जाना

lahaul and Spiti in the kuji marriage included child.
धर्म व जाति एक होने पर भी बहुत सारे युवक और युवतियां प्रेम संबंधों के चलते परिजनों के विरोध के बावजूद छोटी शादी (कूजी विवाह) करते हैं।

इसके बाद में लड़की के परिजन लड़के वालों से हजारों रुपये व सोने के आभूषण को इज्जत व जुर्माने के तौर पर रखने के बाद बड़ी शादी करने को कहते हैं।

बड़ी शादी होने पर यह पैसा व जेवर लड़की व लड़के के संयुक्त खाते में जमा किए जाते हैं। ऐसे में लाहौल घाटी में पहले छोटी और बाद में बड़ी शादी का प्रचलन साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है।

इन्होंने भी देखी अपने माता पिता की शादी

lahaul and Spiti in the kuji marriage included child.

लाहौल घाटी में इस तरह सैकडों लोगों ने कूजी विवाह के बाद कई साल बाद बड़ी शादी का सेहरा बांधा है। सलग्रां गांव के 33 साल के सुरेश कुमार का कहना है कि उन्होंने साल 1999 में कूजी विवाह (छोटी शादी) के कई साल बाद बड़ी शादी की है। इसमें उनका चार साल का बेटा राहुल और सात साल का बेटा अंकुश भी गवाह बने हैं।

प्रेम संबंधों या सामाजिक व्यवस्था के कारण कई जोड़ों ने पहले कूजी विवाह कर एक साथ रहने के बाद सामाजिक मान्यता हासिल करने के लिए बड़ी शादी रचाई है। इसके लिए बाकायदा शुभ मुहूर्त निकाल कर सात फेरे लिए जाते हैं।

सदियों से नहीं है दहेज प्रथा

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भारत देश के ज्यादातर हिस्सों में जहां दहेज प्रथा के कारण युवतियों और विवाहिताओं को प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। वहीं हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र लाहौल में सदियों से दहेज प्रथा नहीं है।

यहां पर लड़की वालों से किसी भी प्रकार का दहेज व अन्य कीमती सामान नहीं मांगा जाता है, जो ‌कि एक मिसाल है। यही नहीं कूजी शादियों में भी हर्जाना लड़के के पक्ष को चुकाना पड़ता है। यह हर्जाना लड़की भगाने पर प्रतिष्ठा को होने वाले नुकसान के बदले में देना पड़ता है।

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