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Shimla News: आईजीएमसी में दो सालों में 104 कर्मचारी सेवानिवृत्त
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कम स्टाफ के कारण बेहतर सुविधाएं प्रदान करना हुआ मुश्किल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में दो वर्षों के दौरान 104 कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति हुई है। वहीं छह कर्मचारियों की सेवाएं शुक्रवार को समाप्त हुईं। ऐसे में अस्पताल में लगातार अहम पदों पर से कर्मचारियों सेवानिवृत्त होने के बाद दूसरे कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ने लग गया है।
आईजीएमसी में मरीजों की देखभाल करने वाली मेट्रर्न, वार्ड सिस्टर, लैब तकनीशियनों समेत अन्य कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने का सिलसिला लगातार जारी है। हर दूसरे या तीसरे महीने औसतन पांच से छह कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इनके खाली पदों को भरने का काम तक नहीं किया जा रहा है। अस्पताल के कर्मचारियों का कहना है कि बढ़े हुए कार्यभार के कारण उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ा है। आलम यह है कि एक कर्मचारी के हवाले तीन से चार-चार विभागों का काम है। इस वजह से कई कर्मचारी तो सप्ताह का शेड्यूल बनाकर विभिन्न विभागों में क्लर्क का काम संभाल रहे हैं। जबकि स्टाफ की कमी के कारण मरीजों की देखभाल करना मुश्किल हो गया है। आईजीएमसी कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष हरिंद्र सिंह मेहता और महासचिव हनीश ठाकुर ने बताया कि इस बारे में शुक्रवार को भी आईजीएमसी प्राचार्य डॉ. सीता ठाकुर और वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव से यह मुद्दा उठाकर स्थायी समाधान करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि अगर इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया तो कर्मचारी कड़े फैसले लेने पर मजबूर हो जाएंगे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में दो वर्षों के दौरान 104 कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति हुई है। वहीं छह कर्मचारियों की सेवाएं शुक्रवार को समाप्त हुईं। ऐसे में अस्पताल में लगातार अहम पदों पर से कर्मचारियों सेवानिवृत्त होने के बाद दूसरे कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ने लग गया है।
आईजीएमसी में मरीजों की देखभाल करने वाली मेट्रर्न, वार्ड सिस्टर, लैब तकनीशियनों समेत अन्य कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने का सिलसिला लगातार जारी है। हर दूसरे या तीसरे महीने औसतन पांच से छह कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इनके खाली पदों को भरने का काम तक नहीं किया जा रहा है। अस्पताल के कर्मचारियों का कहना है कि बढ़े हुए कार्यभार के कारण उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ा है। आलम यह है कि एक कर्मचारी के हवाले तीन से चार-चार विभागों का काम है। इस वजह से कई कर्मचारी तो सप्ताह का शेड्यूल बनाकर विभिन्न विभागों में क्लर्क का काम संभाल रहे हैं। जबकि स्टाफ की कमी के कारण मरीजों की देखभाल करना मुश्किल हो गया है। आईजीएमसी कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष हरिंद्र सिंह मेहता और महासचिव हनीश ठाकुर ने बताया कि इस बारे में शुक्रवार को भी आईजीएमसी प्राचार्य डॉ. सीता ठाकुर और वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव से यह मुद्दा उठाकर स्थायी समाधान करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि अगर इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया तो कर्मचारी कड़े फैसले लेने पर मजबूर हो जाएंगे।
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