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जल गया कोटला गांव, एक-दूसरे के सिर ठीकरा फोड़ रहे अफसर

Sun, 22 Nov 2015 11:06 AM IST
Updated Sun, 22 Nov 2015 11:06 AM IST
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Kotla fire tragedy kullu himachal pradesh fire brigade and pwd officers hits out at each other.

अग्निकांड के बाद कोटला गांव जलकर राख हो गया है। वहीं, सरकारी तंत्र अपनी नाकामी छिपाने को कोशिशों में लगा है। एक ही महकमे के अधिकारी अलग-अलग बयान दे रहे हैं। एक आला अधिकारी शिमला से बयान जारी करते हैं कि कोटला गांव के लिए सड़क तो थी, लेकिन अग्निशमन विभाग आधुनिक तकनीक से लैस नहीं था। बंजार में बैठे अधिकारी का कहना है कि पंचायत का रोड था।

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लोगों की मदद के लिए मशीनों और मजदूरों को लगाया गया। ऐसे में सवाल यह है कि कौन सच बोल रहा है। दूसरी ओर जिला प्रशासन का कहना है कि अग्निकांड वाले दिन फायर ब्रिगेड की गाड़ियां गांव तक नहीं पहुंच पाई, लेकिन इसी मार्ग से बचाव दल मौके पर पहुंचा। यानी सड़क तो थी लेकिन हालत खस्ता थी।
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इधर, फायर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सड़क की हालत ठीक न होने के कारण गाड़ियां घटनास्थल से दो किमी पिछले ही रह गईं। जवानों ने मौके पर पहुंच कर गांव के लोगों और एसएसबी के जवानों के साथ आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन यह नाकाफी रहा। फिर भी किसी तरह आठ घरों को बचाया गया था।
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फायर ब्रिगेड के दल का नेतृत्व कर रहे लीड फायरमैन भीम सिंह ने कहा कि सड़क खराब थी। गाड़ी मौके तक नहीं पहुंच पाई है। लोनिवि के अधिकारियों के बयान पर हैरत हुई है। गाड़ियां दो किलोमीटर पीछे रह गई थीं। फायर ब्रिगेड के पास सभी सुविधाएं थीं, लेकिन सड़क तंग होने से गाड़ियां मौके पर नहीं पहुंचीं।

लोनिवि बंजार के एक्सईएन ने कहा कि लिंक रोड लोनिवि का नहीं है। पंचायत स्तर पर रोड का निर्माण हुआ है। जिला प्रशासन के कहने पर जेसीबी और मजदूर मौके पर भेजे गए थे।

डीसी राकेश कंवर ने ये कहा

Kotla fire tragedy kullu himachal pradesh fire brigade and pwd officers hits out at each other.

उपायुक्त राकेश कंवर का कहना है कि कोटला गांव जीप योग्य सड़क से जुड़ा हुआ है। 15 नवंबर की शाम को गांव में अग्निकांड का पता चलने पर सभी अधिकारी और बचाव दल इसी मार्ग से ही घटनास्थल पर पहुंचे थे। राहत कार्यों के दौरान इस संपर्क मार्ग पर वाहनों की आवाजाही सुचारु बनाए रखने के लिए लोक निर्माण विभाग का सहयोग लिया गया था। सड़क तंग होने के कारण 15 नवंबर की शाम को अग्निशमन की गाड़ियां घटनास्थल तक नहीं पहुंच पाई।

लेकिन लोक निर्माण विभाग की जेसीबी और मजदूरों ने रात-दिन कार्य कर इस संपर्क मार्ग पर यातायात सुचारु रखा। लोक निर्माण विभाग ने कोटला गांव का एक हिस्सा पहले ही बस योग्य सड़क से जोड़ा हुआ है, लेकिन जमीन उपलब्ध न होने के कारण गांव की एक बड़ी बस्ती मुख्य मार्ग से नहीं जुड़ पाई। मुख्यमंत्री ने इस लिंक रोड की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को जल्द पूरा कर सड़क को चौड़ा करने का कार्य आरंभ करने के निर्देश दिए हैं।

पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता राकेश गुप्ता से पांच तीखे सवाल

Kotla fire tragedy kullu himachal pradesh fire brigade and pwd officers hits out at each other.

कोटला गांव जलकर राख हो गया। सरकारी विभाग इस गांव को आग से नहीं बचा पाने का ठीकरा एक-दूसरे पर फोड़ रहे हैं। लोक निर्माण विभाग का कहना है कि गांव के लिए दो-दो सड़कें थीं तो अग्निशमन महकमा कह रहा है कि ऐसी कोई ठीकठाक सड़क नहीं थी जिससे लोडिड गाड़ियां आग बुझाने के लिए मौके पर पहुंचाई जा सकें। दोनों जिम्मेवार महकमों के प्रमुखों से ‘अमर उजाला’ ने तीखे सवाल किए :
प्रश्न 1: कोटला गांव के लिए लोक निर्माण विभाग ने आज तक कोई सड़क ही नहीं बनाई और इसी कारण दमकमकर्मी सड़क तक समय पर नहीं पहुंच पाए, क्या ये सही है?
उत्तर: यह कहना गलत है। लोक निर्माण विभाग ने वर्ष 2006 में ही एक सड़क बना ली थी भुइंतला से कोटला तक। यह सड़क एकदम खुली है। उस समय गांववालों से जहां से जमीन मिली, वहीं से एनलाइनमेंट बनी। इसी कारण यह सड़क गांव से 200 मीटर ऊपर से जाती है। जो सड़क गांव के बीच तक जाती है, वह दूसरी है। यह हमारी नहीं पंचायत की है।
प्रश्न 2. अग्निशमन विभाग का कहना है कि गांव तक गाड़ियां ही नहीं पहुंच सकती थीं। ऐसे में आग कैसे बुझाई जातीं।
उत्तर: दमकल महकमे की गाड़ियां पंचायत की सड़क में गईं। इसका रखरखाव हम नहीं करते। अग्निशमन विभाग गांव के पीछे वाली सड़क से उतराई में गांव तक पाइपें बिछा सकता था। फिर भी 15 की रात को हमने जिला प्रशासन के कहने पर अपना जेसीबी इस सड़क पर भेज दिया था। दूसरे दिन तीन जेसीबी भेजे।
प्रश्न 3: इसी सड़क को आपने सीएम के लिए एकदम ठीकठाक कर दिया और पहले क्यों नहीं किया?
उत्तर: देखिये! हम दो अलग-अलग सड़कों की बात कर रहे हैं। पीडब्ल्यूडी की सड़क भी कोटला के नाम से है। यह भुइंतापुल से कोटला के लिए बनाई गई है। इसकी लंबाई 10 किलोमीटर 800 मीटर है। जो दूसरी सड़क है, वह पंचायत की है। इसी से सीएम भी गांव तक गए। इसका रखरखाव पीडब्ल्यूडी नहीं करता। अगर लोगों ने पीएमजीएसवाई सड़क के लिए 2006 से पहले जमीन दी होती तो ये गांव तक जाती।
प्रश्न 4: पीडब्ल्यूडी ने ऐसे कई गांवों के लिए सड़कें नहीं बनाई हैं और कई प्रोजेक्ट लंबे समय से अटके पड़े हैं। जब आग लगती है तो ही इनकी जरूरत महसूस होती है। इस पर विभाग गंभीर क्यों नहीं?
उत्तर: जमीनें तो लोगों ने ही देनी है। अगर निजी जमीन न मिले तो सर्वेक्षण बदलना पड़ता है। पीडब्ल्यूडी जहां से सड़क बन सके , वहां से हमेशा इसके लिए प्रयासरत रहा है।
प्रश्न 5: आपने हाल ही में एक आपदा प्रबंधन प्लान बनाया है। इसमें आगजनी को भी प्रदेश की बड़ी आपदा दर्शाया है, मगर ये बताएं कि सड़क के निकटवर्ती गांवों को आग से बचाने की योजना इसमें क्यों शामिल नहीं है?
उत्तर: अभी प्लान का ड्राफ्ट ही तैयार किया गया है। इस पर आम जनता से सुझाव मांगे गए हैं। इसमें संशोधन किया जा सकता है। इस पर संबंधित अधिकारियों से बात करूंगा।

हिमाचल प्रदेश के मुख्य अग्निशमन अधिकारी भूपाल सिंह चौहान से पांच तीखे सवाल

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प्रश्न 1: कोटला में गांव तबाह हो गया और आपका महकमा तमाशा देखता रह गया, ऐसा क्यों?
उत्तर: यह कहना गलत है कि विभाग तमाशा देखता रह गया। हमारी चार गाड़ियां सूचना मिलते ही स्पॉट के लिए रवाना हो गई थीं। अग्निशमन विभाग के 17 कर्मचारी और होमगार्ड के 30 कर्मचारी घटनास्थल के लिए रवाना हो गए थे।
प्रश्न 2: आपकी न तो गाड़ियां घटनास्थल पर पहुंचीं और न ही समय पर आपके सभी कर्मचारी। आप कैसे दावा करते हैं कि आपने सब कुछ समय पर किया, आग तो नहीं बुझी?
उत्तर: अगर दमकल महकमा स्पॉट पर पहुंच जाता तो भी आग से गांव को पार्शियली बचाया जा सकता था। आग बहुत भड़क चुकी थी। जैसे ही सूचना मिली, वैसे ही गाड़ियां घटनास्थल को रवाना हुईं। हम समय रहते मौके पर पहुंच जाते, अगर सड़क गांव तक होती।
प्रश्न 3: आप यह गलत कह रहे हैं कि गांव तक सड़क नहीं थी, लोक निर्माण विभाग तो ऐसा मान ही नहीं रहा। लोनिवि के इस दावे पर गौर करे तो कसूर दमकल महकमे का ही नजर आता है। क्या ऐसा नहीं है?
उत्तर: सच्चाई सबको पता है कि गांव में जहां आग लगी, वहां तक सड़क थी या नहीं। सड़क होती तो हम गांव तक क्यों नहीं जाते। कच्ची सड़क थी, वह भी वहां तक नहीं, जहां से आग बुझाई जा सके। हमारी गाड़ियां लोडेड होती हैं। चढ़ाई चढ़ते हुए हमारी गाड़ियों को लॉस तक हो गया। ये कच्ची और अधूरी सड़क से कै से पहुंचतीं। इस मामले में अग्निशमन महकमे को लपेटना गलत है।
प्रश्न 4: हिमाचल में अग्निशमन महकमा महज औपचारिकता है और इसे मैदानों की तर्ज पर स्थापित किया गया है। पहाड़ी भौगोलिकता को ध्यान में रखकर नहीं, क्या ये सही है?
उत्तर: ऐसा नहीं है। यह सही है कि हिमाचल की भौगोलिकता भी अग्निशमन महकमे के आड़े आती है, मगर ऐसा नहीं कि यह विभाग महज औपचारिकता है। हमने आग की कई बड़ी घटनाओं पर समय रहते काबू किया है। आग बुझाने के लिए स्थानीय लोगों का बड़ा योगदान रहता है। हम प्रदेश के आम लोगों को भी हिदायतें और प्रशिक्षण लगातार देते आ रहे हैं। अग्निशमन विभाग ने नई फायर पोस्टें हाल ही में खोली हैं। नयना, कालाअंब और लारजी में। चार फायर पोस्टें सुन्नी, घुमारवीं, बैजनाथ और सरकाघाट में खोली जा रही हैं। यह सिलसिला जारी है। हिमाचल में लकड़ी के मकान होते हैं। ये बचाने मुश्किल हो जाते हैं।
प्रश्न 5: बताते हैं कि आग बुझाने वाले आपके होमगार्ड पूरी तरह से प्रशिक्षित ही नहीं होते हैं। कई बार अप्रशिक्षित गृहरक्षकों को ही मौके पर भेज दिया जाता है। इस पर क्या कहते हैं?
उत्तर: ऐसा नहीं है। हम अपने साथ जोड़े गए गृहरक्षकों को फायर फाइटिंग कोर्स करवा रहे हैं। वे आग बुझाने में दक्ष होते हैं। मैं प्रदेश के आम लोगों से अपील करता हूं कि वे आग लगने की सूरत में खुद ही अलर्ट रहें। विभाग की समय रहते मदद लें।

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