गुड़िया रेप हत्याकांड: एक चिरानी ने ही खोली दूसरे की पोल, ऐसे पकड़े गए
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बहुचर्चित गुड़िया दुराचार और हत्या मामले की गुत्थी सुलझाने में सीबीआई को खासी मशक्कत करनी पड़ी। लंबी तहकीकात के बाद आखिर एक चिरानी ने ही दूसरे चिरानी की पोल खोल दी। अब ये चिरानी ही इस मामले में सीबीआई का प्रमुख गवाह होगा। ये चिरानी आरोपी चिरानी अनिल उर्फ नीलू के साथ काम कर चुका है।
हालांकि, सीबीआई के पास अपनी तफ्तीश को सही साबित करने को कई अन्य गवाह और वैज्ञानिक सबूत हैं। सूत्रों की मानें तो सीबीआई को इस मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए प्रारंभिक सुराग राजू और सुभाष से ही मिला। पुलिस ने इन दोनों समेत छह लोगों को इस मामले में आरोपी बनाकर मामला सुलझाने का दावा कर लिया था।
मगर सीबीआई जांच के बीच राजू और सुभाष न्यायिक हिरासत से बाहर निकले तो इन्हीं ने ही चिरानी के इस मामले में संलिप्त होने का संदेह उजागर किया। सूत्रों की मानें तो दोनों ही ये जानकारी बार-बार पुलिस को भी दे रहे थे, मगर जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों ने इस पर ज्यादा गौर नहीं किया। सूत्रों के अनुसार वे अपने वरिष्ठों के निर्देश पर राजू, सुभाष और अन्य चार लोगों से ही जबरन जुर्म कबूलवाने में जुटे हुए थे।
वैज्ञानिक सबूतों का लिया सहारा
उन्हें पुलिस की थर्ड डिग्री तक दी गई। राजू और सुभाष के अलावा सीबीआई को एक नेपाली महिला से भी सुराग मिला। ये महिला अपनी बेटी के पास मुंबई गई हुई थी। उसे मुंबई से बुलाकर पूछा गया। ये चिरानी इस महिला से भी अभद्र व्यवहार कर चुका है। इसके बाद एक कड़ी के बाद दूसरी कड़ी जुड़ती गई। आरोपी को पकड़ने के लिए सीबीआई के पास काफी सबूत एकत्र हो गए।
मोबाइल फोन के डंप डाटा और कई वैज्ञानिक सबूतों का भी सहारा लिया गया। आखिर में एक अन्य चिरानी ही इस मामले में सीबीआई के लिए गवाह बन गया। उसने दुराचार और हत्या से जुड़ी कई जानकारियां दीं, जो साक्ष्यों से मेल खाने लगी।
सूत्रों ने बताया कि अब यही चिरानी इस मामले का अहम गवाह है। सोमवार को भी जैसे ही दांदी जंगल में मुआयना करने के बाद सीबीआई ने आरोपी नीलू को सीबीआई के शिमला थाने में लाया। इस मामले में सीबीआई के गवाह बने दूसरे चिरानी से भी सीबीआई सोमवार को शिमला में कई बिंदुओं पर पूछताछ करती रही।
गुड़िया के सहपाठियों को भी बुलाया
सीबीआई ने गुड़िया के सहपाठियों को भी पूछताछ के लिए बानकुफर वन विश्राम गृह बुलाया। इनके घर जंगल के दूसरी ओर गुड़िया के घर से काफी नीचे हैं। ये दोनों सहपाठी लड़के अब इस स्कूल में नहीं पढ़ते हैं, जहां पर गुड़िया पढ़ती थी। हालांकि, जब तक ये हलाइला पहुंचे, तब तक देरी हो चुकी थी।
सीबीआई की टीम आरोपी को जंगल में घुमाने के बाद वापस शिमला ला रही थी। सीबीआई की एक अधिकारी ने इन बच्चों और इनके परिजनों को बताया कि अब उनसे पूछताछ की जरूरत नहीं हैं। ये सीबीआई के जाने के बाद जंगल के रास्ते दूसरी ओर चले गए।
चिरानियों के डेरे के पास ही यहां पानी पीकर विश्राम करने बैठते थे बच्चे
गुड़िया के एक सहपाठी ने दांदी में बताया कि यहां पर पहले चिरानियों के डेरे थे। अब ये गिरा दिए गए हैं। गुड़िया और सब बच्चे कई बार यहां पानी पीने के लिए रुकते थे। खतरनाक जंगल के लगभग डेढ़-दो किलोमीटर सफर के बाद वे यहां विश्राम भी करते थे।
इसी बीच कई बार कुछ चिरानी यहां पानी पीने या कपड़े धोने के लिए आते थे, मगर कभी भी उन्होंने गुड़िया को किसी चिरानी से बात करते नहीं देखा। उन्होंने बताया कि उन्हें तो आधे जंगल के सफर के बाद यहां मंदिर के साथ चिरानियों को देखकर सुरक्षा का एहसास होता रहा है। उन्हें नहीं मालूम था कि चिरानी ही गुड़िया का कातिल निकलेगा।
सीबीआई ने मुझे बेटा लौटाकर दिया
राजू की मां केसरी देवी बोली - सीबीआई के अफसर मुझसे ऐसे बात करते थे, जैसे मां से बात की जाती है। मैं सीबीआई का इसके लिए धन्यवाद करती हूं कि उन्होंने मुझे मेरा बेटा लौटाकर दिया है।
मेरे लिए वही भगवान है। उसे इतना मारा, इतना मारा कि उसके शरीर पर आज भी निशान है। उसे अभी तक चलने में दिक्कत है। दर्द होता है। दवाइयां खानी पड़ती है। पुलिस ने तो फर्जी केस बनाकर जीते जी उसे मार दिया था।
यकीन था दांदी का भूत करेगा इंसाफ- गुड़िया के एक सहपाठी के पिता ने मंदिर की ओर इशारा करते हुए कहा - ये जो दांदी का भूत यानी दांदी पर्वत का जो प्रमुख देवता है न उसे हम भूत कहते हैं।
उन्हें यकीन था कि यही भूत इंसाफ करेगा। सीबीआई भी इसी के प्रताप से इंसाफ दिला रही है। इसके सामने कुछ भी नहीं छिपता है।
सूरज के डेरे पर लगा है ताला
दांदी जंगल में सूरज के डेरे पर ताला लगा हुआ है। सूरज की पुलिस हिरासत में हत्या हुई तो उसके बाद उसकी पत्नी को आश्रम में रखा गया। उसके बच्चे भी वहीं हैं। ये राजू के डेरे के ही साथ है।
राजू की मां बोली- राजू ही नहीं, मुझे सूरज भी मां बोलता था। उसके बच्चे मेरे बगैर नहीं रहते थे। अब आश्रम मेें हैं। ये देखिए, वहां ताला लगा हुआ है। बोलो - इसकी भरपाई कोई कर सकता है क्या? कोई नहीं।