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मंच ने चेताया: किसानों को हल्के में लेने की गलती कर रही हिमाचल सरकार
Mon, 20 Dec 2021 10:43 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Mon, 20 Dec 2021 10:43 PM IST
सार
किसानों और बागवानों के मुद्दों के लिए संघर्षरत संयुक्त किसान मंच ने सोमवार को ‘जवाब दो सरकार’ अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत कर दी। आंदोलन की रूपरेखा को लेकर जानकारी देते हुए मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान ने बताया कि चार महीने बाद भी सरकार ने मांगें हल करना तो दूर किसानों को बातचीत के लिए भी नहीं बुलाया।
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मंच के संयोजक हरीश चौहान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
किसान आंदोलन के आगे केंद्र सरकार झुक गई लेकिन प्रदेश सरकार किसानों और बागवानों को हल्के में ले रही है। उपचुनाव में करारी हार से भी सरकार ने सबक नहीं लिया। इसलिए संयुक्त किसान मंच ने 2022 विधानसभा चुनाव तक संघर्ष जारी रखने का फैसला लिया है। किसानों और बागवानों के मुद्दों के लिए संघर्षरत संयुक्त किसान मंच ने सोमवार को ‘जवाब दो सरकार’ अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत कर दी। आंदोलन की रूपरेखा को लेकर जानकारी देते हुए मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान ने बताया कि चार महीने बाद भी सरकार ने मांगें हल करना तो दूर किसानों को बातचीत के लिए भी नहीं बुलाया। सरकार के उदासीन रवैये के खिलाफ 2022 विधानसभा चुनावों तक संघर्ष चलेगा।
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उपचुनाव की तरह विस चुनाव में भी भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ वोट के लिए जनता को जागरूक किया जाएगा। जनवरी, फरवरी और मार्च में प्रदेश के सभी 12 जिलों में ब्लॉक स्तर पर बैठकें होंगी। इस दौरान 15 सूत्रीय मांगपत्र को लेकर तैयार पर्चा प्रदेश के हर घर तक पहुंचाया जाएगा। अप्रैल में प्रदेश स्तरीय किसान बागवान अधिवेशन आयोजित होगा। दिल्ली की तर्ज पर राजधानी शिमला में धरना भी होगा। ‘जवाब दो सरकार’ अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत सोमवार को रोहड़ूू में ब्लॉक स्तर की बैठक के साथ की गई। बैठक की अध्यक्षता गुलाब सिंह ठाकुर ने की। मंच के संयोजक सुखदेव सिंह चौहान, सह संयोजक संजीव ठाकुर, वीर सिंह ठाकुर, दलीप शर्मा और त्रिलोक मेहता सहित अन्य नेता बैठक में मौजूद रहे।
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इसलिए नाराज हैं बागवान
चार माह पहले 24 अगस्त को सरकार को मांग पत्र भेजा था। 13 सितंबर को ब्लॉक, तहसील, उपमंडल और जिला स्तर पर प्रदर्शन हुए। 27 सितंबर को संयुक्त किसान मोर्चा के भारत बंद के आह्वान पर संयुक्त किसान मंच ने अपनी मांगों को लेकर बंद तथा प्रदर्शन किए। बावजूद इसके सरकार ने सुध नहीं ली।
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68 विधानसभा क्षेत्रों में पहुंच बनाने की तैयारी
प्रदेश की 70 फीसदी आबादी किसानी बागवानी से जुड़ी है। 17 विधानसभा क्षेत्र सीधे तौर पर जबकि 10 आंशिक तौर पर बागवानी से जुड़े हैं। 27 विधानसभा क्षेत्रों में मंच का सीधा प्रभाव है। सब्जी, अदरक, टमाटर, धान और फूल उत्पादकों को भी मंच साथ जोड़ने के प्रयास में है ताकि सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों में वोट की चोट की जा सके।