खुशवंत सिंह लिटफेस्ट: किरपाल बोले-1950 के संविधान में शिक्षण संस्थानों में नहीं था आरक्षण
उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता और लेखक सौरभ किरपाल से पूर्व गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा और 21 साल बाद आए अयोध्या राम मंदिर के फैसले पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि इस फैसले को विवाद रहित नहीं माना जा सकता।
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खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के तीसरे और अंतिम दिन राम जन्मभूमि का मुद्दा गूंजा। उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता और लेखक सौरभ किरपाल से पूर्व गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा और 21 साल बाद आए अयोध्या राम मंदिर के फैसले पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि इस फैसले को विवाद रहित नहीं माना जा सकता। न्यायालय का काम का कानून के मुताबिक अपना फैसला सुनाना है, न की मध्यस्थ नियुक्त करना। रामजन्म भूमि के मामले में दोनों पक्षों को मनाने के लिए मध्यस्थ नियुक्त किए गए। शाहिनबाग मामले में भी मध्यस्थ की नियुक्ति की गई।
सम इंडियन आर मोर इक्वल देन अदर्स पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह सोच का विषय है कि उस समय न्यायालय को सबसे ज्यादा चिंता कानून व्यवस्था बिगड़ने की थी और न्यायालय ने इसे लेकर पुलिस को भी आगाह कर दिया था। जबकि न्यायालय का काम निर्णय देना है। संविधान पर चर्चा करते हुए कहा कि 26 जनवरी 1950 में लागू हुए संविधान में शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं था लेकिन देश में पहले चुनाव के बाद शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण को लागू किया गया। सौरभ किरपाल ने कहा कि वर्ष 1954 में हिंदू कानून को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने मंजूरी नहीं दी लेकिन सांसद ने इसे लागू कर दिया, हालांकि वर्ष 2005 में इसमें कुछ सुधार किए गए। दूसरी और मुस्लिम कानून में अभी तक कोई संशोधन नहीं किया गया है। जब तक यह नहीं होगा तब तक मुस्लिम महिलाओं को समानता नहीं मिलेगी।
विकसित भारत बनने के लिए तीन चुनौतियां : अमिताभ
जी-20 सम्मेलन के शेरपा रहे अमिताभ कांत नेे कहा कि 2047 तक यदि विकसित भारत बनाना है तो इसके लिए तीन बड़े चैलेंज होंगे। सबसे पहला है कि भारत को स्थिरता लानी होगी। जिस तरह से रशिया यूक्रेन वॉर चल रहा है, जिसमें करीब 40 हजार लोग मर चुके । इलेक्ट्रिक मार्केट में भारत का काम करना होगा, जबकि मौजूदा समय में चीन का इसमें 70 फीसदी कब्जा है। इसके अलावा तीसरा चैलेंज नई सेना तैयार करना है।
पाकिस्तान के तीन सेना प्रमुखों ने भारत को युद्ध में झोंका : जनरल केजे सिंह
पूर्व सेना जनरल केजे सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के तीन आर्मी चीफ ने भारत को युद्ध में झोंका था। पाकिस्तान में वर्तमान हालात के लिए पूर्व आर्मी चीफ स्व. जियाउल हक जिम्मेवार है। इनकी महत्वाकांक्षा के चलते ही सेना ने पाकिस्तान में तख्तापलट हुआ और तानाशाही का जन्म हुआ। इसी तरह मिर्जा असलम वेग भी पाकिस्तान के आर्मी चीफ बने। तीसरे मुहाजिर परवेज मुशर्रफ पाकिस्तान के आर्मी चीफ बने। अधिवक्ता रोहिन भट्ट ने चर्चा के दौरान कहा कि राजनीति भी कई बार न्यायपालिका पर हावी हो जाती है। क्या वजह है सेवानिवृति के बाद न्यायाधीश भाजपा को ज्वाइन करते हैं और उन्हें पार्टी से टिकट भी मिल जाता है। प्रसिद्ध लेखक देवदत्त पटनायक ने कहा कि हड़प्पा संस्कृति के बारे में जो भी हमें बताया गया वह केवल एक सोच थी। अपनी किताब अहिंसा के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हड़प्पा के लोग बणिया थे। अब तक वहां जितने भी अवशेष मिले हैं, वह सभी व्यापारियों के थे। वह केवल व्यापार के लिए वहां पर आए थे।