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Shimla News: खाकी ने नशे के दलदल से युवाओं को निकाला, फिर शुरू की नई जिंदगी
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पुलिस ने नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए शुरू की है हेल्पलाइन नंबर 112, रुस्तम योजना के जरिये कर रही मदद
111 युवाओं की निगरानी और काउंसिलिंग भी शुरू
देवेंद्र ठाकुर
शिमला। संजौली के दो भाई गलत संगत में पड़कर नशे के आदी हो गए। परिवार को पता चला तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। मां ने थक हारकर हेल्पलाइन नंबर 112 पर फोन किया और पुलिस को आप बीती सुनाई।
पुलिस ने दोनों युवकों से बातचीत की और उन्हें काउंसिलिंग के लिए अस्पताल लेकर गई। परिजनों को भी विश्वास दिलवाया कि उनके बेटे अपराधी नहीं पीड़ित हैं और उन्हें नशे की लत से बाहर निकालने में पूरी मदद की जाएगी। पुलिस ने उनकी निगरानी शुरू की और उन्हें नशे में धकेलने वालों दोस्तों से अलग किया। पुलिस, चिकित्सकों और अभिभावकों की महीनों की मेहनत का असर यह रहा कि दोनों भाई अब नशा छोड़कर नई जिंदगी की शुरुआत कर रहे हैं।
जिले के नशे के आदी युवाओं को इस लत से बाहर निकालने के लिए शिमला पुलिस ने रुस्तम यानी नशे के खिलाफ लड़ने वाले योद्धा नाम से योजना शुरू की है। इसके तहत स्पेशल सेल की टीम के 25 कर्मचारी दिन-रात काम कर रहे हैं। पुलिस की यह टीम सादी वर्दी में इस अभियान को चला रही है। जिससे की ऐसे परिवारों की निजता भी बनी रहे। पुलिस वर्तमान में जिले में ऐसे करीब 111 युवाओं की निगरानी और पुनर्वास का काम कर रही है। इस योजना की निगरानी एसएसपी शिमला गौरव सिंह कर रहे हैं। पुलिस युवाओं को अस्पताल ले जाने, निगरानी, काउंसिलिंग और भविष्य में बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। यही वजह है कि कई युवा नशा छोड़कर अब पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
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केस स्टडी वन
32 वर्षीय महिला से छूट गया परिवार
शहर में रहने वाली 32 वर्षीय महिला लंबे समय से चिट्टे की लत शिकार थी। इस वजह से वह अपने परिवार से भी दूर हो गई थी। ज्यादातर समय वह नशा करने वाले साथियों के साथ ही बिताती थी। कुछ समय पहले महिला शिमला पुलिस के स्पेशल सेल के संपर्क में आई, उसने काउंसिलिंग के दौरान बताया कि वह नशा छोड़ना चाहती है लेकिन उपचार और पुनर्वास का खर्च वहन करने में असमर्थ है। विशेष सेल ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उसके उपचार, परामर्श और पारिवारिक सहयोग की व्यवस्था सुनिश्चित की। अब महिला नशा छोड़कर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कर रही है।
इनसेट
केस स्टडी 2
नशा छोड़ फिर शुरू की पढ़ाई
पुलिस को कुछ समय पहले सूचना मिली कि न्यू शिमला का रहने वाला युवक नशीले पदार्थों से संबंधित गतिविधियों में संलिप्त हो सकता है। पुलिस ने युवक का पता लगाकर छानबीन की लेकिन उससे किसी प्रकार का मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ। जांच में पता चला कि युवक लंबे समय से नशे की लत से जूझ रहा है। पुलिस की टीम ने युवक और उसके परिवार संपर्क किया तथा उन्हें विश्वास दिलवाया कि नशा छोड़ा जा सकता है लेकिन परिवार को बेटे के हाथ पकड़कर उसकी मदद करनी होगी। युवक की मनोरोग विशेषज्ञों से काउंसिलिंग करवाई गई, उसे गलत संगत से अलग किया। कई महीनों की मेहनत के बाद अब युवक में सकारात्मक बदलाव नजर आने लगे हैं जिससे अभिभावक खुश हैं। अब युवक पढ़ाई करके अपनी नई जिंदगी की ओर कदम बढ़ा रहा है।
कोट्स
बेझिझक पुलिस से संपर्क करें अभिभावक
रुस्तम योजना जिले के ऐसे युवाओं के लिए शुरू की है जोकि किसी कारणवश नशे की लत के शिकार हो गए हैं। योजना का उद्देश्य युवा पीढ़ी को सही राह पर लाना है। नशा छोड़ने के लिए बच्चों को अभिभावकों का सकारात्मक सहयोग जरूरी है। पुलिस काउंसिलिंग के साथ ही हर संभव मदद कर रही है। अभिभावक बेझिझक हेल्पलाइन नंबर 112 पर कॉल कर सकते हैं। ऐसे युवा अपराधी नहीं बल्कि पीड़ित हैं और हमें उन्हें सही रास्ते पर लाना है।
-गौरव सिंह, एसएसपी शिमला
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111 युवाओं की निगरानी और काउंसिलिंग भी शुरू
देवेंद्र ठाकुर
शिमला। संजौली के दो भाई गलत संगत में पड़कर नशे के आदी हो गए। परिवार को पता चला तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। मां ने थक हारकर हेल्पलाइन नंबर 112 पर फोन किया और पुलिस को आप बीती सुनाई।
पुलिस ने दोनों युवकों से बातचीत की और उन्हें काउंसिलिंग के लिए अस्पताल लेकर गई। परिजनों को भी विश्वास दिलवाया कि उनके बेटे अपराधी नहीं पीड़ित हैं और उन्हें नशे की लत से बाहर निकालने में पूरी मदद की जाएगी। पुलिस ने उनकी निगरानी शुरू की और उन्हें नशे में धकेलने वालों दोस्तों से अलग किया। पुलिस, चिकित्सकों और अभिभावकों की महीनों की मेहनत का असर यह रहा कि दोनों भाई अब नशा छोड़कर नई जिंदगी की शुरुआत कर रहे हैं।
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जिले के नशे के आदी युवाओं को इस लत से बाहर निकालने के लिए शिमला पुलिस ने रुस्तम यानी नशे के खिलाफ लड़ने वाले योद्धा नाम से योजना शुरू की है। इसके तहत स्पेशल सेल की टीम के 25 कर्मचारी दिन-रात काम कर रहे हैं। पुलिस की यह टीम सादी वर्दी में इस अभियान को चला रही है। जिससे की ऐसे परिवारों की निजता भी बनी रहे। पुलिस वर्तमान में जिले में ऐसे करीब 111 युवाओं की निगरानी और पुनर्वास का काम कर रही है। इस योजना की निगरानी एसएसपी शिमला गौरव सिंह कर रहे हैं। पुलिस युवाओं को अस्पताल ले जाने, निगरानी, काउंसिलिंग और भविष्य में बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। यही वजह है कि कई युवा नशा छोड़कर अब पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
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32 वर्षीय महिला से छूट गया परिवार
शहर में रहने वाली 32 वर्षीय महिला लंबे समय से चिट्टे की लत शिकार थी। इस वजह से वह अपने परिवार से भी दूर हो गई थी। ज्यादातर समय वह नशा करने वाले साथियों के साथ ही बिताती थी। कुछ समय पहले महिला शिमला पुलिस के स्पेशल सेल के संपर्क में आई, उसने काउंसिलिंग के दौरान बताया कि वह नशा छोड़ना चाहती है लेकिन उपचार और पुनर्वास का खर्च वहन करने में असमर्थ है। विशेष सेल ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उसके उपचार, परामर्श और पारिवारिक सहयोग की व्यवस्था सुनिश्चित की। अब महिला नशा छोड़कर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कर रही है।
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केस स्टडी 2
नशा छोड़ फिर शुरू की पढ़ाई
पुलिस को कुछ समय पहले सूचना मिली कि न्यू शिमला का रहने वाला युवक नशीले पदार्थों से संबंधित गतिविधियों में संलिप्त हो सकता है। पुलिस ने युवक का पता लगाकर छानबीन की लेकिन उससे किसी प्रकार का मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ। जांच में पता चला कि युवक लंबे समय से नशे की लत से जूझ रहा है। पुलिस की टीम ने युवक और उसके परिवार संपर्क किया तथा उन्हें विश्वास दिलवाया कि नशा छोड़ा जा सकता है लेकिन परिवार को बेटे के हाथ पकड़कर उसकी मदद करनी होगी। युवक की मनोरोग विशेषज्ञों से काउंसिलिंग करवाई गई, उसे गलत संगत से अलग किया। कई महीनों की मेहनत के बाद अब युवक में सकारात्मक बदलाव नजर आने लगे हैं जिससे अभिभावक खुश हैं। अब युवक पढ़ाई करके अपनी नई जिंदगी की ओर कदम बढ़ा रहा है।
कोट्स
बेझिझक पुलिस से संपर्क करें अभिभावक
रुस्तम योजना जिले के ऐसे युवाओं के लिए शुरू की है जोकि किसी कारणवश नशे की लत के शिकार हो गए हैं। योजना का उद्देश्य युवा पीढ़ी को सही राह पर लाना है। नशा छोड़ने के लिए बच्चों को अभिभावकों का सकारात्मक सहयोग जरूरी है। पुलिस काउंसिलिंग के साथ ही हर संभव मदद कर रही है। अभिभावक बेझिझक हेल्पलाइन नंबर 112 पर कॉल कर सकते हैं। ऐसे युवा अपराधी नहीं बल्कि पीड़ित हैं और हमें उन्हें सही रास्ते पर लाना है।
-गौरव सिंह, एसएसपी शिमला