KCC बैंक को लेकर हुआ बड़ा खुलासा, आंकड़े कर देंगे हैरान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजनीति और भाई-भतीजावाद ने कांगड़ा केंद्रीय सहकारी (केसीसी) बैंक को आईसीयू में पहुंचा दिया है। नॉन परफार्मिंग असेट्स (एनपीए) को बढ़ाने और घटाने का खेल कर आरबीआई, नाबार्ड और प्रदेश सरकार को गुमराह किया जा रहा है। बैंक का एनपीए अलार्मिंग स्थिति में है। जल्द ही इसका इलाज न किया तो ताला लगने की नौबत आ सकती है।
साल 2013 में 7 से 8 फीसदी एनपीए मार्च 2017 में करीब 588 करोड़ यानी 16 फीसदी था। अब जनवरी 2018 में बैंक का एनपीए करीब 559 करोड़ यानी 14.6 फीसदी है। बीते एक साल में बैंक का एनपीए करीब डेढ़ फीसदी कम हुआ।
मतलब, बैंक की सेहत कुछ सुधरी हुई दिखाई गई। वहीं, एनपीए घटने से इतर बैंक के ओवर ड्यूज पिछले एक वर्ष में करीब 134 करोड़ रुपये बढ़ गए। 31 मार्च को बैंक के ओवर ड्यूज करीब 309 करोड़ थे, जो जनवरी 2019 में बढ़कर 443 करोड़ रुपये पहुंच गए।
जानकारों का कहना है कि एनपीए घट रहा है तो लेनदारी भी घटनी चाहिए लेकिन बैंक प्रबंधन तर्क दे रहा है कि ओवर ड्यूज घटते-बढ़ते रहते हैं। इसका बैलेंस शीट पर कोई असर नहीं पड़ता।
लेकिन, यह तर्क आर्थिक जानकारों के गले नहीं उतर रहा। दरअसल, पिछले वर्ष अगस्त में नाबार्ड ने एनपीए बढ़ने पर केसीसी बैंक की रेटिंग ए से घटाकर बी श्रेणी में ला दी थी। इसके बाद नाबार्ड के समक्ष छवि सुधारने के लिए एनपीए घटाने का खेल चला।
ऑन रिकॉर्ड 14.6 फीसदी बताया जा रहा एनपीए
आरबीआई की गाइडलाइंस के अनुसार किसी भी बैंक का एनपीए अगर 10 फीसदी से ऊपर चला जाए तो उसकी सेहत खतरे में होती है। वर्तमान में बैंक का एनपीए 14.6 फीसदी है। इसका अर्थ यह है कि 100 में 14 लोन एनपीए यानी खतरे की स्थिति में हैं।
नाम न छापने की शर्त पर कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों ने बताया कि असल में बैंक का एनपीए 20 फीसदी से ज्यादा पहुंच चुका है। लेकिन, तथ्यों को छिपाकर बैंक वर्तमान में करीब 14.6 फीसदी एनपीए दिखा रहा है। एनपीए को कम दिखाने के लिए बैंक ने कई ऋण इसमें शामिल ही नहीं किए हैं।
ऐसा अपनी कमियों को छिपाकर आरबीआई और नाबार्ड के समक्ष छवि बेहतर दिखाने के लिए किया जा रहा है। वर्तमान में एनपीए में जा चुके 40 फीसदी ऋण करोड़ों का लोन लेने वाले डिफॉल्टरों के हैं।
उधर, केसीसी बैंक के एमडी पीसी अकेला ने कहा कि बैंक की सेहत अच्छी है। एनपीए और ओवर ड्यूज में अंतर है। जरूरी नहीं कि एनपीए घटने के दौरान ओवर ड्यूज भी घटे। ओवर ड्यूज घटता-बढ़ता रहता है।
क्या है एनपीए और ओवर ड्यूज
बैंकों में एनपीए का अर्थ है कि नॉन प्रफॉरमिंग एसेट यानी कुछ ऋण वापस नहीं आ रहे हैं। अब इन ऋणों से बैंक को कोई आमदन नहीं होगी। ऋण की रिकवरी पसोपेश में पड़ गई है।
जब किसी ऋणदाता की तीन से ज्यादा किश्तें लंबित हो जाएं तो उस ऋण को एनपीए में दर्शा दिया जाता है। वहीं, बैंक ने अपने ऋणदाताओं से कितना पैसा लेना है इसके लिए ओवर ड्यूज का डाटा रखा जाता है। यानी, ऋणों की सभी बकाया किश्तें ओवर ड्यूज के अंतर्गत दर्शाई जाती हैं।
राजनीतिक नियुक्तियों से बिगड़ी बैंक की सेहत
बैंक की खराब सेहत की असली जड़ राजनीति को माना जा रहा है। नॉन बैंकिंग क्षेत्र से संबंध रखने वाले एमडी और चेयरमैन बैंक को चला रहे हैं। अन्य बैंकों में एमडी और चेयरमैन बैंकिंग क्षेत्र के ही होते हैं।
महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाली बीओडी के अधिकतर सदस्य राजनीतिक क्षेत्र के होते हैं। यही सदस्य राजनीतिक प्रभाव वाले व्यक्ति को चेयरमैन चुनते हैं। राजनीतिक प्रभाव की वजह से कई बार गलत ऋणों का आवंटन कर दिया जाता है जो बाद में गले की फांस बन जाते हैं।
कुछ अधिकारी और कर्मचारी को पदोन्नति का लालच तो कुछेक को ट्रांसफर का डर दिखाकर गलत ऋण आवंटित करवाए जाते हैं। राजनीतिक प्रभाव के चलते रिकवरी प्रक्रिया में भी बाधा आती है।