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Kargil Vijay Diwas 2020: कैप्टन बत्रा के परिजनों को मलाल, बेटे के नाम पाठ्यक्रम में जुड़ती जीवनी तो युवाओं को मिलती प्रेरणा

Sun, 26 Jul 2020 02:57 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, पालमपुर (कांगड़ा)
अमर उजाला नेटवर्क, पालमपुर (कांगड़ा) Published by: Krishan Singh Updated Sun, 26 Jul 2020 02:57 PM IST
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Kargil War Vijay Diwas 2020: Paramveer Chakra Winner Martyr Captain Vikram Batra Parents Demands On Including His Biography In School Curriculum
परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन विक्रम बतरा - फोटो : अमर उजाला

वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध में देवभूमि हिमाचल के 52 जवानों ने शहादत पाई। इनमें दो परमवीर चक्र, पांच वीर चक्र, नौ सेना मेडल, एक युद्ध सेना मेडल, दो उत्तम युद्ध सेना मेडल से नवाजा गया। इनमें से इस युद्ध में दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा भी एक थे।  कारगिल युद्ध में दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा के परिजनों को सरकार से किसी चीज को लेकर कोई मांग नहीं है।

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लेकिन उन्हें आज भी इस बात का मलाल है कि  कारगिल युद्ध में उनके शहीद बेटे की बहादुरी पर मिले परमवीर चक्र को देख किसी पाठ्यक्रम में कोई जीवनी जुड़ जाती तो आने वाली युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन जाती।
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कारगिल युद्ध में टाइगर हिल पर कब्जा करने के बाद सात जुलाई को शहीद हुए कैप्टन विक्रम बत्रा के परिजनों को अभी इस बात का मलाल है कि उनके बेटे की शहादत को किसी पाठ्यक्रम में नहीं जोड़ा गया, जिसके लिए उन्होंने कई बार पत्राचार भी किया। शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा के पिता जीएल बत्रा ने कहा कि इसके लिए उन्होंने सरकारों से पत्राचार भी किया है।
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लेकिन अभी तक इस मामले में किसी ने कोई कदम नहीं उठाया है। कहा कि जिस तरह से उन्होंने कारगिल युद्ध में दुश्मनों को मार कर 'यह दिल मांगे मोर' का नारा दिया था।

उससे साफ था कि कैप्टन विक्रम बत्रा दुश्मनों का सफाया कर ही दम लेंगे। लेकिन, दुश्मन की गोली लगने से शहीद होने से पहले उन्होंने पाकिस्तान के कई सैनिकों को मारकर टाइगर हिल चोटी को कब्जा करने के बाद शहादत पाई थी। जिसे लेकर उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र मिला था। शही के पिता की मांग है कि उनके बेटे की शहादत पर किसी पाठ्यक्रम में जीवनी जुड़नी चाहिए।

शहीद बिजेंद्र के नाम पर  सड़क आज भी अधूरी

कारगिल युद्ध के शहीद बिजेंद्र सिंह के नाम पर सात किलोमीटर की सड़क को 20  वर्ष बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं बनाया जा सका है। देहरा ब्लॉक की नौशहरा पंचायत के गांव नडु के शहीद विजेंद्र सिंह के घर तक पक्की सड़क बनाई जानी थी। जिसमें गांव बणे दी हट्टी से बगलामुखी मंदिर तक लगभग सात किलोमीटर सड़क का निर्माण होना था।

परंतु इस सड़क का निर्माण तीन किलोमीटर ही हो पाया है। शहीद की माता संतोष कुमारी का कहना है कि 20 साल बाद भी इस सड़क मार्ग का न बन पाना सरकार की खोखली घोषणाओं को दर्शाता है। हालांकि शहीद के भाई को सरकार ने सरकारी नौकरी दे दी है। साथ ही देहरा में एक पेट्रोल पंप भी चलता है।

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