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Kangra parliamentary seat: प्रत्याशियों के चेहरों से नहीं छंटी धुंध, इंतजार लंबा खिंच रहा

Fri, 22 Mar 2024 11:10 AM IST
Krishan Singh मदन मोहन लखेड़ा, धर्मशाला
मदन मोहन लखेड़ा, धर्मशाला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 22 Mar 2024 11:10 AM IST
सार

 प्रदेश नेतृत्व और पार्टी हाईकमान आवेदन करने वालों से हटकर भी कुछ अन्य नामों पर विचार कर रहा है। संकेत है कि आवेदनों को दरकिनार कर हाईकमान किसी और पर भी दाव लगा सकता है।

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Kangra parliamentary seat: The fog has not cleared from the faces of the candidates, the wait is stretching lo
आशा कुमारी, कर्ण पठानिया व त्रिलोक कपूर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कांगड़ा संसदीय सीट से कांग्रेस और भाजपा के चुनावी चेहरों पर छाई धुंध अभी छंटी नहीं है। दोनों ही ओर प्रत्याशी चयन पर मंथन और फैसले का इंतजार लंबा खिंच रहा है। 13 लोगों के आवेदनों के बावजूद कांग्रेस में बात नहीं बन पाई है। प्रदेश नेतृत्व और पार्टी हाईकमान आवेदन करने वालों से हटकर भी कुछ अन्य नामों पर विचार कर रहा है। संकेत है कि आवेदनों को दरकिनार कर हाईकमान किसी और पर भी दाव लगा सकता है। उधर, भाजपा अपने प्रदेश महामंत्री त्रिलोक कपूर, प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव भारद्वाज और बागी विधायक सुधीर शर्मा के बीच उलझी है।

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कांगड़ा सीट से कांग्रेस के टिकट के लिए देहरा से पार्टी के प्रदेश कोषाध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा, नूरपुर के नानक चंद कश्यप व सुदर्शन शर्मा, जयसिंहपुर के संजय राणा, नगरोटा बगवां के सतीश कुमार, हटली सिंहुता के डॉ. सुशील कुमार शर्मा, पालमपुर के मेजर जनरल धर्मवीर सिंह राणा व केके कटोच, धर्मशाला के अश्वनी कुमार चौधरी व विक्रम चौधरी, कांगड़ा के विनय शर्मा व नागेश्वर मनकोटिया और बैजनाथ से कुलदीप राणा ने आवेदन किए हैं।
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सभी ने बाकायदा 10-10 हजार रुपये के शुल्क के साथ अपना विस्तृत ब्योरा सौंप कर दावेदारी जताई है, लेकिन पार्टी स्तर पर कुछ और नाम भी चयन प्रक्रिया में जोड़ लिए गए हैं। कांगड़ा प्रदेश की सियासत की धुरी माना जाता है और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का फोकस भी कांगड़ा पर है। आम चुनाव का बिगुल बजने से पहले सीएम के धुआंधार दौरे इसका संकेत पहले ही दे चुके हैं। संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस के 11 विधायकों की मौजूदगी उन्हें कांगड़ा सीट से उम्मीद भी बंधा रही है। इसलिए, दमदार प्रत्याशी की तलाश में आवेदन करने वालों से अलग नामों को भी शामिल कर लिया गया है।

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सूत्रों के अनुसार पूर्व मंत्री आशा कुमारी, कांगड़ा जिला कांग्रेस अध्यक्ष कर्ण पठानिया और सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष संजय चौहान के नाम पर भी चर्चा चल रही है। प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष डाॅ. राजेश शर्मा,  सेवा विस्तार पर चल रहे कांगड़ा के सीएमओ डॉ. सुशील कुमार शर्मा और पूर्व सैन्य अधिकारी धर्मवीर राणा भी दौड़ में हैं। भाजपा में कांगड़ा सीट से त्रिलोक कपूर व राजीव भारद्वाज के नाम पैनल में बताए जा रहे हैं। त्रिलोक कपूर गद्दी राजपूत हैं और जनजातीय मतदाताओं का इस सीट पर खासा प्रभाव है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की गुड बुक्स  में भी उन्हें माना जाता है। बात करें ब्राह्मण चेहरे की तो राजीव भारद्वाज पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के करीबियों में गिने जाते हैं। बताया जा रहा है कि पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा की बगावत ने टिकट को लेकर तीसरा कोण भी बना दिया है। बदले सियासी समीकरण में सुधीर शर्मा की भूमिका तय करना भी पार्टी हाईकमान के लिए जरूरी हो गया है। सूत्रों के अनुसार कांगड़ा से सिटिंग एमपी किशन कपूर का नाम हालांकि पीछे हो गया है, लेकिन उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी है। वह इंतजार कर रहे हैं।


मैंने टिकट के लिए आवेदन नहीं किया है। पार्टी स्तर पर मेरे नाम पर चर्चा हो रही है, इसकी जानकारी मीडिया से ही मिली है। हाईकमान जो भी फैसला लेगी उसका सम्मान करूंगी और पार्टी के साथ चलूंगी। -आशा कुमारी, कांग्रेस से पूर्व मंत्री

टिकट के लिए आवेदन नहीं किया है। पार्टी चुनावी चेहरा बनाने के लिए भरोसा जताती है तो पूरी ताकत के साथ चुनावी जंग में आगे बढ़ा जाएगा। - कर्ण पठानिया, जिला कांग्रेस अध्यक्ष

टिकट का फैसला पार्टी का संसदीय बोर्ड करता है। फैसला जो भी होगा, भाजपा की प्रचंड जीत के लिए पूरी ताकत के साथ काम करूंगा। -त्रिलोक कपूर, प्रदेश भाजपा महामंत्री 

 

संगठन के स्तर पर तैयारियों के मामले में भाजपा 21 तो कांग्रेस 19 भी नहीं
चुनावी जंग की तैयारियों के मोर्चे पर भाजपा ने कांग्रेस के सामने बड़ा फासला खड़ा कर दिया है। कांगड़ा संसदीय क्षेत्र को ही लें तो सांगठनिक गतिविधियों में भाजपा 21 तो कांग्रेस 19 भी नहीं है। अभियानों-कार्यक्रमों के जरिये चरणबद्ध तरीके से निरंतर आगे बढ़ रही भाजपा बूथ स्तर तक सक्रिय हो चुकी है। उधर, कांग्रेस अभी चुनावी अंगड़ाई भी लेती हुई नहीं दिख रही। हकीकत यह है कि गतिविधियों के नाम पर सत्तारूढ़ दल में सन्नाटा है और कार्यकर्ताओं में असमंजस।चुनावी जंग के लिए भाजपा ने संगठन को हर दृष्टि से मजबूती देने के लिए छह महीने पहले से कदमताल शुरू कर दी थी। लगातार पार्टी अभियान, कार्यक्रमों व बैठकों के जरिये निचले से निचले स्तर तक संगठन को सक्रिय करने का काम किया गया।

अग्रिम मोर्चों, प्रकोष्ठों और बूथ पालकों की भागीदारी के साथ पार्टी ने बूथ समितियां खड़ीं कीं। पार्टी का मानना है कि 51 लोगों की यही बूथ समितियां चुनावी जंग में संगठन की जान-प्राण होंगी। लाभार्थी संपर्क और संकल्प पत्र अभियानों के जरिये घर-घर पहुंचकर जनता के नजदीक पहुंचा गया। बूथों की सक्रियता सुनिश्चित होने के बाद अब संगठन अपने सातों मोर्चों को पूरी तरह से चुनावी मोड में लाने जा रहा है। पार्टी पदाधिकारियों व नेताओं का विधानसभावार ड्यूटी शेड्यूल भी जल्द जारी होने के संकेत हैं। बूथों की ग्रेडिंग कर कमजोर कड़ियों में प्रदर्शन सुधारने के लिए भी संगठन स्तर पर काम शुरू हो चुका है। अनगिनत कॉल सेंटरों के माध्यम से भाजपा संगठन का पूरा नेटवर्क नीचे से ऊपर तक आपसे में कनेक्ट हैं। 

पदाधिकारियों के साथ पार्टी की ऑफलाइन व ऑनलाइन बैठकों का सिलसिला और जोर पकड़ रहा है। चारों सीटों पर संसदीय क्षेत्र स्तर के चुनावी कार्यालय खोले जा चुके हैं और अब हर हलके में कार्यालय खोलने की तैयारी है। 43 हलकों में स्थान तय कर लिया गया है। दूसरी ओर, कांग्रेस संगठनात्मक तैयारियों के मामले में पिछड़ती दिख रही है। बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने के प्रयास दिखाई नहीं दे रहे हैं। चुनाव के नाम पर फरवरी के शुरुआती दिनों में संसदीय क्षेत्र के पार्टी समन्वयक नेगी निगम भंडारी ने धर्मशाला पहुंचकर एक बैठक जरूर ली थी। कुछ दिनों बाद पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता की पत्रकार वार्ता भी हुई, पर इसके आगे कुछ नहीं। 

चुनावी तैयारियों को लेकर कांग्रेस की संगठनात्मक बैठकों का अभाव है। कार्यकर्ताओं को चुनावी दंगल के लिए कमर कस लेने को सक्रिय करने के प्रयास शुरू ही नहीं हो पाए हैं। धर्मशाला की 9 मार्च को भंग ब्लॉक कांग्रेस कमेटी का भी 12 दिन बाद वीरवार को अध्यक्ष नियुक्त हुआ है। कुल मिलाकर संगठन स्तर पर यह सुस्ती पार्टी कार्यकर्ताओं को समझ नहीं आ रही है। असमंजस के माहौल में कांग्रेस कार्यकर्ता आगे आकर तैयारियों में जुटने से बच रहे हैं। 

जल्द चुनाव के लिए संगठन को सक्रिय किया जाएगा। पार्टी के संसदीय क्षेत्र चुनाव प्रभारी कैबिनेट मंत्री चंद्र कुमार मंगलवार को व्यापक स्तर बड़ी बैठक लेने जा रहे हैं। हर स्तर के पदाधिकारियों व निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ मंथन कर रणनीति बनाई जाएगी। - पुनीत मल्ली, सचिव एवं मीडिया समन्वयक प्रदेश कांग्रेस

चुनाव के लिए भाजपा हर तरह से तैयार है। संगठन को मजबूती देकर सक्रिय करने की मुहिम पूरी हो चुकी है। बूथ स्तर तक पार्टी सक्रियता के साथ जनता के करीब है। संगठन के दम पर भाजपा हिमाचल में भी प्रचंड जीत दर्ज करेगी। - कर्ण नंदा, प्रदेश भाजपा मीडिया प्रभारी 

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