देवीय शक्ति से टूटी काहिका पुजारी की मूर्च्छा
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मणिकर्ण घाटी के प्रसिद्ध चामुंडा माता मंदिर धारा-तलाड़ी में काहिका उत्सव धूमधाम से मनाया गया। हर तीन साल के बाद आयोजित होने वाले इस उत्सव में एक बार फिर से देवीय शक्ति से काहिका के पुजारी की मूर्च्छा टूटी।
शुक्रवार को माता मंदिर में काहिका उत्सव के देखने के लिए काफी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर कमेटी के प्रधान दुनी चंद ठाकुर ने बताया कि माता के मंदिर में हर तीन साल बाद काहिका उत्सव का आयोजन किया जाता है।
इस काहिका में चार खूंटे लगाए जाते हैं। एक खूंटा राज परिवार का होता है। दूसरा खूंटा स्थानीय देवता का होता है। इसके अलावा दो खूंटे हरियानों के होते हैं।
ढाई साल की आयु में किया था पहला काहिका
शुक्रवार शाम को शुरू हुए इस काहिका उत्सव के हजारों लोग गवाह बने। दुनी चंद ने बताया कि काहिका में काहिका पुरोहित (नड़) मणिकर्ण के फतेह चंद बने।
काहिका उत्सव के दौरान काहिका पुरोहित (नड़) देवीय शक्ति से मूर्च्छित हो गए। करीब आधे घंटे तक चली प्रक्रिया के बाद माता ने देवीय शक्ति से काहिका पुरोहित की मूर्च्छा तोड़ दी।
काहिका उत्सव में काहिका पुरोहित (नड़) मणिकर्ण के फतेह चंद ने बताया कि उन्होंने ढाई साल की आयु में पहला काहिका किया था। अब तक वे दर्जनों काहिके कर चुके हैं। यह सब कार्य देवीय विधि से होते हैं।