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पीलिया मामले में जेई और प्लांट सुपरवाइजर गिरफ्तार

Fri, 22 Jan 2016 12:02 AM IST
Updated Fri, 22 Jan 2016 12:02 AM IST
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JE and plant supervisor arrest in shimla jaundice case.

राजधानी शिमला में पीलिया फैलने के लिए जिम्मेदार आईपीएच के जूनियर इंजीनियर और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के सुपरवाइजर को वीरवार देर रात गिरफ्तार कर लिया गया। मामले में यह पहली बड़ी कार्रवाई की गई है। ट्रीटमेंट प्लांट के ठेकेदार की तलाश की जा रही है। देर रात उसके ठिकानों पर पुलिस दबिश देती रही।

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शहर में पीलिया फैलने के आरोपी लापरवाह अफसरों, कर्मचारियों और ठेकेदार की गिरफ्तारी के लिए सबूत जुटा रही पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। राजधानी के दोनों सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में सीवरेज पानी मिलने और दूषित पानी की सप्लाई की वजह से बीमार हो रहे लोगों के मामले में छह जनवरी को एफआईआर दर्ज की गई थी।

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जांच में सामने आई थी लापरवाही

JE and plant supervisor arrest in shimla jaundice case.

बता दें कि इस मामले की जांच के लिए बनी एसआईटी को दोनों ही वाटर ट्रीटमेंट प्लांटों में कई तरह की अव्यवस्था देखने को मिली थी। जांच के दौरान आरोपियों के खिलाफ एसआईटी को काफी साक्ष्य मिले थे। शुरुआती जांच में साफ हो गया था कि इसमें लापरवाही बरती गई है। लिहाजा, इसके जिम्मेदार लोगों को गिरफ्त में लेने का सिलसिला एसआईटी शुरू करने की कवायद में जुटी थी।

देर रात आला अधिकारियों से कार्रवाई को लेकर हरी झंडी मिलने के बाद मामले में जेई और एक सुपरवाइजर की गिरफ्तारी की गई। एसपी डीडब्ल्यू नेगी ने कहा कि मामले की तेजी से छानबीन की जा रही है। इस मामले में आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारी हो सकती हैं।

जमानत की कोशिश में जुटे थे आरोपी

JE and plant supervisor arrest in shimla jaundice case.

इस मामले से जुड़े अफसर और ठेकेदार अग्रिम जमानत की फिराक में हैं। आरोपी अपने ठिकानों से नदारद थे और पुलिस को बराबर चकमा दे रहे थे। वीरवार को दिन में एसआईटी फोरेंसिक टीम को साथ लेकर मल्याणा स्थिति ट्रीटमेंट प्लांट में पहुंची।

यहां पानी में इस्तेमाल किए जाने वाले कैमिकल के सैंपल लिए। शुरुआती जांच में केमिकल की गुणवत्ता पर फोरेंसिक टीम ने सवाल उठाए हैं। इससे पहले फोरेंसिक टीम ढली ट्रीटमेंट का निरीक्षण कर आई है वहां की कार्यप्रणाली पर अंसतोष जताया है।

इन दो ट्रीटमेंट प्लांटों में मिली खामियां ही अब आरोपियों के गिरफ्तारी का ग्राउंड बन रही है। जब तक एसआईटी के हाथ सबूत आए तब तक आरोपी गिरफ्तारी के डर से फरार हो गए हैं।

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राज्यपाल ने पीलिया पर तलब किए अफसर

JE and plant supervisor arrest in shimla jaundice case.

सिक्किम दौरे से लौटते ही राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने राजधानी शिमला में पीलिया फैलने से बिगड़े हालात पर अफसरों को तलब किया। वीरवार को उन्होंने स्वास्थ्य, आईपीएच विभाग के अधिकारियों को राजभवन बुलाकर पीलिया को तुरंत नियंत्रण करने के निर्देश दिए। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने भी राज्यपाल से मुलाकात कर स्थिति स्पष्ट की।

मुलाकात के बाद राज्यपाल ने प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना तो की लेकिन दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। राज्यपाल आचार्य देवव्रत के हिमाचल लौटते ही वीरवार सुबह ही राजभवन में हलचल शुरू हो गई। उन्होंने राजभवन के अधिकारियों से पीलिया पर अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी लेने के बाद स्वास्थ्य और आईपीएच विभाग के अधिकारियों को तलब किया।

अब तक हुई कार्रवाई की समीक्षा के दौरान उन्होंने अधिकारियों को जनता को साफ पानी उपलब्ध कराने और बीमार लोगों को हर संभव स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। अधिकारियों के बाद स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर भी राजभवन पहुंचे। राज्यपाल ने उनसे आधे घंटे तक चर्चा की। स्वास्थ्य मंत्री ने पीलिया पर नियंत्रण को लेकर हर संभव कदम उठाने की बात कही।

अश्वनी खड्ड की ताजा जांच में फिर निकला सीवरेज का पानी

JE and plant supervisor arrest in shimla jaundice case.

अश्वनी खड्ड से शहर के लिए पानी की सप्लाई बंद होने के 20 दिन बाद भी हालात जस के तस हैं। स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम ओर आईपीएच द्वारा संयुक्त रूप से भरे अश्वनी खड्ड के सैंपलों में कॉलीफार्म पाया गया है। ज्वाइंट टीम ने मंगलवार को अश्वनी खड्ड की स्ट्रीम और इनलैट से पानी के सैंपल भरे थे।

सैंपल की रिपोर्ट से साफ हो गया है कि पंपिंग बंद करने के 20 दिन बाद भी मल्याणा स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट काम नहीं कर रहा और सीवरेज सीधे अश्वनी खड्ड में बह रही है। अश्वनी खड्ड का यही पानी आगे बह कर सोलन शहर के लिए लिफ्ट किया जा रहा है जिसके कारण सोलन के लोग पीलिया की चपेट में आ रहे हैं।

ज्वाइंट टीम की ओर से भरे सैंपलों की रिपोर्ट में कॉलीफार्म की मात्रा इतनी अधिक निकली है कि यह पानी ट्रीट करने के बाद भी पीने योग्य नहीं बन सकता। अश्वनी खड्ड के पानी में एक बार फिर कॉलीफार्म मिलने से प्रदेश सरकार के दावों की पोल खुल गई है।

साठ के दशक का है ट्रीटमेंट प्लांट: समिति

JE and plant supervisor arrest in shimla jaundice case.

शिमला। हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति ने शहर में फैले पीलिया को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। समिति के राज्याध्यक्ष डा. ओम प्रकाश भूरेटा ने बताया कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट 60 के दशक में बना है। इसी तकनीक का इस्तेमाल अभी तक किया जा रहा है। यह पानी की शुद्धिकरण के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने बताया कि सरकार की लापरवाही के कारण छोटे कर्मचारियों पर गाज गिर रही है।

डा. भूरेटा ने बताया कि सीवरेज प्लांट 17 से 27 डिग्री तक के तापमान में कार्य करता है जोकि सर्दियों के मौसम में फायदेमंद नहीं है। ज्ञान विज्ञान समिति ने अपने स्तर पर समस्या की गंभीरता के मद्देनजर एक विशेष जांच समिति का गठन किया है जिसने इस

समस्या के लिए जिम्मेदार कारणों की गहनता से जांच की और पाया कि सीवरेज को साफ करने के लिए जिस तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है वह 60 के दशक की तकनीक है। मौजूदा समय में जो प्लांट लगे हैं उनमें शहर की पूरी गंदगी पहुंचती है तो उसे साफ करने के लिए इसकी क्षमता पर्याप्त नहीं है।

कुसुम्पटी के टैंक में नहीं मिला कॉलीफार्म- पीलिया के कारण दहशत के साये में जी रहे शहर के लोगों के लिए थोड़ी राहत की बात है। ज्वाइंट टीम ने अश्वनी खड्ड के अतिरिक्त रिज टैंक, कुसुम्पटी टैंक, रिज और विकासनगर वाटर एटीएम से भी पानी के सैंपल भरे थे। इन सैंपलों में कॉलीफार्म नहीं पाया गया है।

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