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ट्रॉली गिरने के बाद जाखू रोप-वे के निर्माण पर रोक
विश्वास भारद्वाजअमर उजाला, शिमला
Updated Fri, 25 Dec 2015 11:48 AM IST
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अलाइनमेंट की जांच के दौरान बुधवार को जाखू रोप-वे से केबिन गिरने की घटना के बाद रोप-वे के निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई है। वीरवार को रोप-वे इंस्पेक्टर ने निर्माणाधीन जाखू रोप-वे का निरीक्षण किया। वीरवार को दोपहर पौने एक बजे रोप-वे इंस्पेक्टर जोधा निवास स्थित जाखू रोप-वे के लोअर टर्मिनल में निरीक्षण के लिए पहुंचे।
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घटना को लेकर इंस्पेक्टर ने रोप-वे का निर्माण कर रही कंपनी को नोटिस जारी कर तुरंत निर्माणकार्य पर रोक लगाने के लिखित निर्देश जारी किए। रोप-वे एक्ट के तहत यह कार्रवाई अमल में लाई गई। उधर, निरीक्षण के बाद रोप-वे इंस्पेक्टर ने रोप से छूटकर मकान पर गिरे केबिन को हटाने की अनुमति दे दी है। रोप में अटके तीन केबिनों को केचर की मदद से हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
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रोप-वे इंस्पेक्टर बीएस नेगी ने बताया कि निर्माणाधीन जाखू रोप-वे का वीरवार को निरीक्षण किया गया है। घटना को लेकर कंपनी को नोटिस देकर फिलहाल रोप-वे के निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई है। उन्होंने बताया कि घटना की जांच के लिए कमेटी भी गठित की जाएगी।
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अब छह महीने देरी से तैयार होगा रोप-वे- शिमला के बहुप्रतीक्षित जाखू रोप वे के लिए शहर के लोगों और सैलानियों को अब करीब पांच-छह महीने और इंतजार करना होगा। बुधवार को रोप-वे अलाइनमेंट जांचने के दौरान हुए हादसे में अपर टर्मिनल का टावर बैंड हो गया है। इसके अलावा कालम में भी क्रैक आ गए हैं।
रोप-वे के टावर और कालम की मरम्मत के बाद ही अब पुन: ट्रायल की प्रक्रिया शुरू हो पाएगी। रोप-वे अलाइनमेंट जांचने की प्रक्रिया तक पहुंचने में तीन महीने का समय लगने की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद विभिन्न स्तरों पर ट्रायल किए जाएंगे, तब कहीं जाकर जाखू रोप-वे का लोकार्पण हो पाएगा।
उधर जाखू रोप-वे अलाइनमेंट के दौरान केबिन गिरने की घटना की जांच के लिए जैक्सन कंपनी ने एक एक्सपर्ट कमेटी गठित कर दी है। वीरवार को कंपनी के कारपोरेट आफिस से ईमेल के जरिये फील्ड स्टाफ को इसकी जानकारी दी गई।
एक सप्ताह के भीतर एक्सपर्ट कमेटी क्षतिग्रस्त रोप-वे का निरीक्षण करने शिमला पहुंचेगी। जब तक कमेटी निरीक्षण नहीं करती तब तक रोप-वे से संबंधित कोई नया काम शुरू नहीं होगा। उधर, प्रारंभिक जांच में लोड फैक्टर को घटना का कारण माना जा रहा है।
केबिन के फ्रेम की होगी जांच- लोअर टर्मिनल के पास रोप-वे से अलग होकर मकान पर गिरा केबिन दोबारा इस्तेमाल योग्य है या नहीं, इसके लिए केबिन के फ्रेम की बारीकी से जांच की जाएगी। यदि फ्रेम सही पाया जाता है तो केबिन की रिपेयर की जाएगी।
अगर हादसे में फ्रेम को नुकसान पहुंचा होगा तो नया केबिन मंगवाया जाएगा। फिलहाल निरीक्षण में पाया गया है कि फ्रेम के इर्दगिर्द लगे ग्लास क्षतिग्रस्त हुए हैं। केबिन के बाहर का ग्लास टूटा चुका है जबकि भीतर का ग्लास खिसककर केबिन के अंदर चला गया।
टेस्टिंग के बाद ही टावर पर चढ़ेगी स्विस रोप- हादसे के बाद टावर से उतर चुकी स्विस रोप को अब टेस्टिंग के बाद ही दोबारा टावर पर चढ़ाया जाएगा। कंपनी का दावा है कि हादसे में रोप को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा है। बावजूद इसके एहतियात के लिए रोप को टावर पर चढ़ाने से पहले मेकेनिकल टेस्टिंग की जाएगी।
जाखू रोप-वे का ट्रायल करने से पहले अब निर्माण कर रही कंपनी को जिला प्रशासन की अनुमति लेनी होगी। जिला प्रशासन ने रोप-वे का निर्माण कर रही कंपनी को ट्रायल से पहले प्रशासन को सूचित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ट्रायल के दौरान कोई अप्रिय घटना न घटे इसके लिए पुख्ता बंदोबस्त करने के लिए भी कहा गया है।
सेवानिवृत्त सहायक अभियंता सुभाष वर्मा ने कहा कि ट्रायल के दौरान ही केबिन गिर जाना बेहद गंभीर मामला है। पर्यटन विभाग को मेकेनिकल इंजीनियर से ट्रायल के दौरान रोप-वे का काउंटर चेक करवाना चाहिए था। रोप-वे की मौजूदा स्लोप और हाईट भी जांच का विषय है।
जाखू रोप-वे इतनी ऊंचाई पर स्थित है कि यहां हवा, बर्फबारी और लिवलोड (भारक क्षमता) इन तीन फैक्टरों में से किसी एक की भी अनदेखी जानमाल पर भारी पड़ सकती है। आबादी और रिहायशी इलाके के ऊपर से गुजर रहे इस रोप वे के ट्रायल में विशेष एहतियात बरतने की जरूरत है।